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Ghaziabad News: 10 प्रतिशत मुनाफे का झांसा देकर 1.79 करोड़ हड़पे
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10 प्रतिशत मुनाफे का झांसा देकर 1.79 करोड़ हड़पे
गाजियाबाद। राजनगर निवासी नरेश कुमार त्यागी से उनके ही परिचित ने साझे में शराब के ठेके लेकर 10 प्रतिशत का मुनाफा देने का झांसा देकर 1.79 करोड़ रुपये हड़प लिए। आरोप है कि उनके परिचित मनीष शर्मा ने विश्वास में लेकर ठेके ले लिए। एक साल बाद हिसाब मांगने पर टालमटोल करता रहा। इसके बाद दुकानों का नवीनीकरण कराकर रुपये फंसा दिए। मामले में उन्होंने कोर्ट के आदेश पर कविनगर थाने में केस दर्ज कराया है।
नरेश कुमार का कहना है कि 2020 में उनके घर मनीष शर्मा आए। मनीष ने उनसे साझे में शराब के ठेके लेने की बात कही और बचत का 10 प्रतिशत हिस्सा देने का झांसा दिया। विश्वास में आकर उन्होंने साझेदारी करने के लिए हां कर दी। आरोप है कि मनीष ने उनसे दस्तावेज ले लिए और हापुड़ व गाजियाबाद में अलग-अलग जगह शराब के ठेके ले लिए। इसके बाद मनीष ने उनसे माल लेने और आबकारी की फीस जमा करने के नाम पर कई बार में 1.79 करोड़ रुपये ले लिए। एक साल पूरा होने के बाद उन्होंने हिसाब करने को कहा तो वह टाल मटोल करता रहा। बाद में उसने उनकी बिना अनुमति के उसने दुकानों का नवीनीकरण करा लिया। आरोप है कि इसी बीच मनीष ने बैंक खाते में केवल 752 रुपये छोड़े। एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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गाजियाबाद। राजनगर निवासी नरेश कुमार त्यागी से उनके ही परिचित ने साझे में शराब के ठेके लेकर 10 प्रतिशत का मुनाफा देने का झांसा देकर 1.79 करोड़ रुपये हड़प लिए। आरोप है कि उनके परिचित मनीष शर्मा ने विश्वास में लेकर ठेके ले लिए। एक साल बाद हिसाब मांगने पर टालमटोल करता रहा। इसके बाद दुकानों का नवीनीकरण कराकर रुपये फंसा दिए। मामले में उन्होंने कोर्ट के आदेश पर कविनगर थाने में केस दर्ज कराया है।
नरेश कुमार का कहना है कि 2020 में उनके घर मनीष शर्मा आए। मनीष ने उनसे साझे में शराब के ठेके लेने की बात कही और बचत का 10 प्रतिशत हिस्सा देने का झांसा दिया। विश्वास में आकर उन्होंने साझेदारी करने के लिए हां कर दी। आरोप है कि मनीष ने उनसे दस्तावेज ले लिए और हापुड़ व गाजियाबाद में अलग-अलग जगह शराब के ठेके ले लिए। इसके बाद मनीष ने उनसे माल लेने और आबकारी की फीस जमा करने के नाम पर कई बार में 1.79 करोड़ रुपये ले लिए। एक साल पूरा होने के बाद उन्होंने हिसाब करने को कहा तो वह टाल मटोल करता रहा। बाद में उसने उनकी बिना अनुमति के उसने दुकानों का नवीनीकरण करा लिया। आरोप है कि इसी बीच मनीष ने बैंक खाते में केवल 752 रुपये छोड़े। एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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