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Ghaziabad News : जेल में बनाते थे प्लान, बाहर निकल चुराते थे वाहन, गिरोह के तीन शातिर गिरफ्तार

Mon, 22 Aug 2022 04:21 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: गाजियाबाद ब्यूरो Updated Mon, 22 Aug 2022 04:21 AM IST
सार

Ghaziabad News : पकड़े गए तीनों शातिर संजय सैनी निवासी खरखौंदा मेरठ, कमल उर्फ सोनू निवासी पसोंडा और मासूम अली, निवासी जहांगीराबाद बुलंदशहर हैं। तीनों शातिर 200 से अधिक वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। इनके पास से चोरी की पांच बाइक और एक कार बरामद की गई है।

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Ghaziabad News : criminals used to make plans in jail and steal vehicles outside
demo pic... - फोटो : amar ujala

विस्तार

जेल में प्लान बनाकर और जेल छूटने के बाद वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले वाहन चोर गिरोह के तीन शातिरों को पुलिस से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए तीनों शातिर संजय सैनी निवासी खरखौंदा मेरठ, कमल उर्फ सोनू निवासी पसोंडा और मासूम अली, निवासी जहांगीराबाद बुलंदशहर हैं। तीनों शातिर 200 से अधिक वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। इनके पास से चोरी की पांच बाइक और एक कार बरामद की गई है।

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क्राइम ब्रांच प्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दकी ने बताया कि सूचना मिली थी कि चोरी के वाहनों को बेचने के लिए गिरोह के सदस्य नंदग्राम आने वाले हैं। टीम बनाकर नंदग्राम पुलिस के सहयोग से आशाराम रोड चौकी के पास चोरी की कार व मोटरसाइकिल के साथ तीनों शातिरों को पकड़ लिया गया। पकड़े गए बदमाशों की निशानदेही पर सिहानी चुंगी चौकी क्षेत्र के खाली पड़े मैदान से बाइक बरामद की गई है।
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संजय सैनी गिरोह का सरगना है। इसके खिलाफ दिल्ली-एनसीआर के कई थानों में 43 मामले दर्ज हैं। कमल पर छह मामले दर्ज हैं। पूछताछ में शातिरों ने बताया कि वह गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, दिल्ली, हापुड़ व बदायूं में वाहन चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं। जेल से छूटने के बाद वह ठिकाना बदलकर दोबारा वारदात शुरू कर देते थे।
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जेल में बंद शातिरों से सीखते थे तरीका
पूछताछ में शातिरों ने बताया कि जेल में जाने के बाद वह वाहन चोरी के मामले में जेल में बंद अन्य शातिरों से जान-पहचान बढ़ाते थे। उनके चोरी करने के तरीकों की जानकारी लेेते थे। इसमें हुलिया बदलना, किसी के टोकने पर चाबी खो जाने की बात कहना, भीड़ भाड़ वाली सड़क के पास से चोरी करना, वाहनों को छिपाने के लिए चौकी या थाने के पास वाली जगह चुनना आदि शामिल है।

सोसायटी में बच्चों से लेते थे जानकारी
सोसायटी में चोरी करने से पहले शातिर वहां किसी बच्चे से दोस्ती कर जानकारी जुटाते थे। इसके बाद जिस बाइक को चुराना होता था उसके पास उसी कंपनी की बाइक खड़ी कर देते थे। साथ ही पकड़े जाने पर भ्रम होने की बात कहकर भाग जाते थे।


जहांगीराबाद में बनाया नया ठिकाना
तीनों शातिर अधिकतर बाइक को ही निशाना बनाते थे। मौका मिलने पर कार भी चोरी करते थे। शातिरों ने बताया कि मेरठ के सोतीगंज में वाहन कटान का काम बंद होने के बाद उन्होंने बुलंदशहर के जहांगीराबाद में चोरी के वाहनों को काटने का नया ठिकाना बनाया था। कबाड़ी का का काम करने वाला मासूम अली चार से पांच हजार में रुपये में चोरी के वाहनों को खरीदकर काट देता था।

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