{"_id":"6078931f8ebc3ecbb54f8286","slug":"ghaziabad-ghaziabad-city-news-gbd2172466152","type":"story","status":"publish","title_hn":"सर्किल रेट के आधार पर तय होगा नगर निगम की दुकानों का किराया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सर्किल रेट के आधार पर तय होगा नगर निगम की दुकानों का किराया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सर्किल रेट के आधार पर तय होगा नगर निगम की दुकानों का किराया
गाजियाबाद। सर्किल रेट के आधार पर हाउस टैक्स निर्धारण के लिए पॉलिसी तैयार किए जाने के बाद अब नगर निगम की दुकानों का किराया भी सर्किल रेट के आधार पर तय होगा। नगर निगम का संपत्ति विभाग इसकी तैयारी कर रहा है। इसके लिए 1200 से ज्यादा दुकानों का सर्वे पूरा कर उन पर नंबरिंग की जा चुकी है। निगम सर्किल रेट का सात फीसदी किराया तय करने की प्लानिंग कर रहा है। जल्द ही इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर निगम की आगामी बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा।
रमतेराम रोड, कविनगर, घंटाघर, विजयनगर समेत कई अन्य क्षेत्रों में नगर निगम की दुकानें हैं। लंबे समय पहले नगर निगम ने इन दुकानों को किराए पर दिया था। करीब आठ साल से इन दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया। प्रमुख बाजारों में मौजूद इन दुकानों का किराया महज 300 रुपये से एक हजार रुपये तक है। इन्हीं बाजारों में प्राइवेट दुकानों का किराया 10 हजार रुपये प्रतिमाह तक है। ऐसे में नगर निगम अब अपनी दुकानों का किराया बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर के आदेश पर संपत्ति विभाग ने करीब एक माह पूर्व अपनी संपत्तियों का सर्वे कर इन पर नंबरिंग करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब सर्किल रेट के आधार पर किराया दरें तय की जाएंगी। निगम अधिकारियों के मुताबिक जिस क्षेत्र में जितना सर्किल रेट होगा, उसका सात फीसदी किराया तय किया जाएगा। किराया दर तय करने के लिए नगर निगम ने स्टांप विभाग से सर्किल रेट की सूची मांगी है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में दुकानों पर ऐसे लोग काबिज मिले हैं, जिनके नाम दुकान आवंटित नहीं की गई थी। लोगों ने दुकान आवंटित कराकर मोटी रकम लेकर सिकमी किराएदारों को दे दी हैं। उन्हें भी चिह्नित किया गया है।
पांच गुना बढ़ जाएगा किराया, निगम की होगी आमदनी
नगर निगम सर्किल रेट की सूची मिलने के बाद दुकानों के किराए का आगणन करेगा। माना जा रहा है कि सर्किल रेट के आधार पर किराया दर तय होने से निगम की दुकानों का किराया चार से पांच गुना तक बढ़ जाएगा। कविनगर जैसी पॉश कॉलोनी में सर्किल रेट ज्यादा होने की वजह से यहां दुकानों के किराए में और ज्यादा बढ़ोतरी भी हो सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बढ़ने के बावजूद निगम की दुकानों का किराया, निजी दुकानों से कम रहेगा।
विज्ञापन
परिचर्चा
नगर निगम द्वारा सर्किल रेट के आधार पर दुकानों का किराया बढ़ाया जा रहा है। कोरोना काल में जब व्यापार मंदा है, ऐसे में इस निर्णय से व्यापारियों पर बोझ बढ़ेगा। नगर निगम और सरकार को व्यापार को फिर से पटरी पर लाने के लिए प्रोत्साहन करना चाहिए, उन पर बोझ नहीं बढ़ाना चाहिए। - तिलकराज अरोड़ा, प्रदेश महामंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल
------
सर्किल रेट के आधार पर पहले भी किराया बढ़ाने का विरोध किया था। इन हालातों में व्यापारियों को सहूलियत देने के बजाय उनसे वसूली की जाने की योजना बन रही है। किराए में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की गई तो इसका विरोध किया जाएगा। - संजय गोयल, महानगर अध्यक्ष राष्ट्रीय व्यापार मंडल
-----
नगर निगम को अपना प्रस्ताव वापस लेना चाहिए। सर्किल रेट के आधार पर किराया कई गुना बढ़ जाएगा। ऐसे में व्यापारी अपनी व्यापार को मुश्किल बचा पायेगा। इसका प्रस्ताव आने के बाद निगम अधिकारियों से वार्ता करेंगे। - धनेश सिंघल, जिलाध्यक्ष युवा महानगर व्यापार मंडल
------
कोट
दुकानों का किराया करीब 7-8 साल से नहीं बढ़ा है। निगम को दुकानों से बहुत कम किराया मिल रहा है, जबकि निजी दुकानों का किराया बहुत बढ़ चुका है। सर्वे पूरा होने के बाद अब किराया दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से इस प्रस्ताव को सदन में प्रस्तुत करेंगे। - डॉ. संजीव सिन्हा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी, नगर निगम
विज्ञापन
गाजियाबाद। सर्किल रेट के आधार पर हाउस टैक्स निर्धारण के लिए पॉलिसी तैयार किए जाने के बाद अब नगर निगम की दुकानों का किराया भी सर्किल रेट के आधार पर तय होगा। नगर निगम का संपत्ति विभाग इसकी तैयारी कर रहा है। इसके लिए 1200 से ज्यादा दुकानों का सर्वे पूरा कर उन पर नंबरिंग की जा चुकी है। निगम सर्किल रेट का सात फीसदी किराया तय करने की प्लानिंग कर रहा है। जल्द ही इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर निगम की आगामी बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा।
रमतेराम रोड, कविनगर, घंटाघर, विजयनगर समेत कई अन्य क्षेत्रों में नगर निगम की दुकानें हैं। लंबे समय पहले नगर निगम ने इन दुकानों को किराए पर दिया था। करीब आठ साल से इन दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया। प्रमुख बाजारों में मौजूद इन दुकानों का किराया महज 300 रुपये से एक हजार रुपये तक है। इन्हीं बाजारों में प्राइवेट दुकानों का किराया 10 हजार रुपये प्रतिमाह तक है। ऐसे में नगर निगम अब अपनी दुकानों का किराया बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर के आदेश पर संपत्ति विभाग ने करीब एक माह पूर्व अपनी संपत्तियों का सर्वे कर इन पर नंबरिंग करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब सर्किल रेट के आधार पर किराया दरें तय की जाएंगी। निगम अधिकारियों के मुताबिक जिस क्षेत्र में जितना सर्किल रेट होगा, उसका सात फीसदी किराया तय किया जाएगा। किराया दर तय करने के लिए नगर निगम ने स्टांप विभाग से सर्किल रेट की सूची मांगी है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में दुकानों पर ऐसे लोग काबिज मिले हैं, जिनके नाम दुकान आवंटित नहीं की गई थी। लोगों ने दुकान आवंटित कराकर मोटी रकम लेकर सिकमी किराएदारों को दे दी हैं। उन्हें भी चिह्नित किया गया है।
विज्ञापन
पांच गुना बढ़ जाएगा किराया, निगम की होगी आमदनी
नगर निगम सर्किल रेट की सूची मिलने के बाद दुकानों के किराए का आगणन करेगा। माना जा रहा है कि सर्किल रेट के आधार पर किराया दर तय होने से निगम की दुकानों का किराया चार से पांच गुना तक बढ़ जाएगा। कविनगर जैसी पॉश कॉलोनी में सर्किल रेट ज्यादा होने की वजह से यहां दुकानों के किराए में और ज्यादा बढ़ोतरी भी हो सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बढ़ने के बावजूद निगम की दुकानों का किराया, निजी दुकानों से कम रहेगा।
विज्ञापन
परिचर्चा
नगर निगम द्वारा सर्किल रेट के आधार पर दुकानों का किराया बढ़ाया जा रहा है। कोरोना काल में जब व्यापार मंदा है, ऐसे में इस निर्णय से व्यापारियों पर बोझ बढ़ेगा। नगर निगम और सरकार को व्यापार को फिर से पटरी पर लाने के लिए प्रोत्साहन करना चाहिए, उन पर बोझ नहीं बढ़ाना चाहिए। - तिलकराज अरोड़ा, प्रदेश महामंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल
------
सर्किल रेट के आधार पर पहले भी किराया बढ़ाने का विरोध किया था। इन हालातों में व्यापारियों को सहूलियत देने के बजाय उनसे वसूली की जाने की योजना बन रही है। किराए में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की गई तो इसका विरोध किया जाएगा। - संजय गोयल, महानगर अध्यक्ष राष्ट्रीय व्यापार मंडल
-----
नगर निगम को अपना प्रस्ताव वापस लेना चाहिए। सर्किल रेट के आधार पर किराया कई गुना बढ़ जाएगा। ऐसे में व्यापारी अपनी व्यापार को मुश्किल बचा पायेगा। इसका प्रस्ताव आने के बाद निगम अधिकारियों से वार्ता करेंगे। - धनेश सिंघल, जिलाध्यक्ष युवा महानगर व्यापार मंडल
------
कोट
दुकानों का किराया करीब 7-8 साल से नहीं बढ़ा है। निगम को दुकानों से बहुत कम किराया मिल रहा है, जबकि निजी दुकानों का किराया बहुत बढ़ चुका है। सर्वे पूरा होने के बाद अब किराया दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से इस प्रस्ताव को सदन में प्रस्तुत करेंगे। - डॉ. संजीव सिन्हा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी, नगर निगम