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मेट्रो से कम बिजली से चलेगी रैपिड ट्रेन
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रैपिड ट्रेन का प्रस्तावित डिजाइन
- फोटो : GHAZIABAD City
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मेट्रो से कम बिजली से चलेगी रैपिड ट्रेन
गाजियाबाद। रैपिड ट्रेन आधुनिक होने के साथ बिजली की खपत को कम करने वाली होगी। बिजली की खपत को 40 फीसदी कम करने करने लिए एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के विभिन्न स्रोत और नवीन तकनीक का इस्तेमाल करेगा। स्टेशन पहुंचने पर रैपिड ट्रेन के दरवाजे ऑटोमेटिक की जगह पुश बटन के जरिए खुलेंगे। ट्रेन में कम भीड़ होने पर सभी दरवाजों को खोलने की जरूरत नहीं होगी। पुश बटन लगाने का उद्देश्य भी बिजली की बचत करना है।
अभी दिल्ली मेट्रो में ट्रेन के स्टेशन पहुंचने पर सभी दरवाजे ऑटोमेटिक खुल जाते हैं। सवारी बैठने तक भीड़ न होने के बावजूद ट्रेन के सभी दरवाजे खुले रहते हैं। इससे ट्रेन की कूलिंग प्रभावित होने के साथ एसी पर लोड पड़ने से बिजली की अधिक खपत होती है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस रैपिड ट्रेन बॉम्बार्डियर इंडिया के सावली प्लांट, गुजरात में बन रही है। 2022 में ट्रेन का पहला प्रोटोटाइप बनकर तैयार हो जाएगा। मार्च 2023 में रैपिड ट्रेन प्राथमिकता वाले खंड में साहिबाबाद से दुहाई के बीच दौड़ने लगेगी। हर ट्रेन में छह कोच होंगे।
आरआरटीएस ट्रेन में एक बार में लगभग 1700 लोग यात्रा कर सकेंगे। ट्रेन में 400 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। हाई स्पीड रेल से 60 मिनट से भी कम समय में मेरठ से नई दिल्ली की दूरी तय की जा सकेगी। आरआरटीएस ट्रेन की डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा है। जबकि ऑपरेशनल स्पीड 160 किमी प्रति घंटा निर्धारित होगी। ट्रेन की औसत स्पीड 100 किमी प्रति घंटा होगी। मेरठ के मोदीपुरम से दिल्ली के सराय काले खां तक का किराया 164 रुपये होगा।
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सभी स्टेशन सौर ऊर्जा से होंगे जगमग:
महानगर में मेट्रो फेज-दो कॉरिडोर के सभी स्टेशनों की तरह रैपिड रेल कॉरिडोर में पड़ने वाले सभी स्टेशन सौर ऊर्जा से जगमग होंगे। बिजली की खपत को कम करने के उद्देश्य से सभी स्टेशनों पर सौर ऊर्जा पैनल लगाने की योजना है। ऐसे में स्टेशन में अधिकांश ऊर्जा की खपत सौर ऊर्जा के जरिए पूरी होगी। महानगर में पहले प्राथमिकता वाले खंड में साहिबाबाद, मेरठ रोड तिराहा, गुलधर और दुहाई स्टेशन के अलावा दूसरे चरण में मुरादनगर, मोदीनगर नॉर्थ और मोदीनगर साउथ में स्टेशन प्रस्तावित हैं।
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प्राथमिकता वाले खंड में 390 पिलर्स का निर्माण:
एनसीआरटीसी को साहिबाबाद से दुहाई तक प्राथमिकता वाले सेक्शन को मार्च 2023 से संचालन में सफलता मिलती दिखाई दे रही है। साहिबाबाद से दुहाई के बीच रैपिड का निर्माण कार्य तेज गति से जारी है। साहिबाबाद से दुहाई तक कुल 525 पिलर्स का निर्माण होना है। इनमें से 390 से अधिक का निर्माण पूरा किया जा चुका है। निर्माण कार्य की गति को देखते हुए एनसीआरटीसी की ओर से सिविल संबंधी कार्य 2022 तक काम पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। प्राथमिकता वाले खंड में साहिबाबाद से मेरठ रोड व मेरठ रोड से दुहाई तक दोनों भागों में करीब डेढ़ किमी का एलिवेटेड ट्रैक (वायडक्ट) का निर्माण पूरा हो चुका है। केवल इस पर रैपिड की पटरी बिछना बाकी है। एलिवेटेड ट्रैक तैयार करने के लिए और वसुंधरा कास्टिंग यार्ड में गार्डर को एलिवेटेड ट्रैक पर लाँच करने के लिए प्राथमिकता वाले खंड में आठ लॉंचिंग गैंट्री मशीनों को लगाया गया है।
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कोट...
बिजली की खपत 40 फीसदी कम करने के लिए अक्षय ऊर्जा के विभिन्न स्रोत व नवीन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी के तहत रैपिड ट्रेन में पुश बटन के जरिए ट्रेन के दरवाजे खुलेंगे। इससे बिजली की खपत कम करने और एसी की कूलिंग को बरकरार रखने में मदद मिलेगी। -- पुनीत वत्स, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, एनसीआरटीसी
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गाजियाबाद। रैपिड ट्रेन आधुनिक होने के साथ बिजली की खपत को कम करने वाली होगी। बिजली की खपत को 40 फीसदी कम करने करने लिए एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के विभिन्न स्रोत और नवीन तकनीक का इस्तेमाल करेगा। स्टेशन पहुंचने पर रैपिड ट्रेन के दरवाजे ऑटोमेटिक की जगह पुश बटन के जरिए खुलेंगे। ट्रेन में कम भीड़ होने पर सभी दरवाजों को खोलने की जरूरत नहीं होगी। पुश बटन लगाने का उद्देश्य भी बिजली की बचत करना है।
अभी दिल्ली मेट्रो में ट्रेन के स्टेशन पहुंचने पर सभी दरवाजे ऑटोमेटिक खुल जाते हैं। सवारी बैठने तक भीड़ न होने के बावजूद ट्रेन के सभी दरवाजे खुले रहते हैं। इससे ट्रेन की कूलिंग प्रभावित होने के साथ एसी पर लोड पड़ने से बिजली की अधिक खपत होती है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस रैपिड ट्रेन बॉम्बार्डियर इंडिया के सावली प्लांट, गुजरात में बन रही है। 2022 में ट्रेन का पहला प्रोटोटाइप बनकर तैयार हो जाएगा। मार्च 2023 में रैपिड ट्रेन प्राथमिकता वाले खंड में साहिबाबाद से दुहाई के बीच दौड़ने लगेगी। हर ट्रेन में छह कोच होंगे।
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आरआरटीएस ट्रेन में एक बार में लगभग 1700 लोग यात्रा कर सकेंगे। ट्रेन में 400 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। हाई स्पीड रेल से 60 मिनट से भी कम समय में मेरठ से नई दिल्ली की दूरी तय की जा सकेगी। आरआरटीएस ट्रेन की डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा है। जबकि ऑपरेशनल स्पीड 160 किमी प्रति घंटा निर्धारित होगी। ट्रेन की औसत स्पीड 100 किमी प्रति घंटा होगी। मेरठ के मोदीपुरम से दिल्ली के सराय काले खां तक का किराया 164 रुपये होगा।
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सभी स्टेशन सौर ऊर्जा से होंगे जगमग:
महानगर में मेट्रो फेज-दो कॉरिडोर के सभी स्टेशनों की तरह रैपिड रेल कॉरिडोर में पड़ने वाले सभी स्टेशन सौर ऊर्जा से जगमग होंगे। बिजली की खपत को कम करने के उद्देश्य से सभी स्टेशनों पर सौर ऊर्जा पैनल लगाने की योजना है। ऐसे में स्टेशन में अधिकांश ऊर्जा की खपत सौर ऊर्जा के जरिए पूरी होगी। महानगर में पहले प्राथमिकता वाले खंड में साहिबाबाद, मेरठ रोड तिराहा, गुलधर और दुहाई स्टेशन के अलावा दूसरे चरण में मुरादनगर, मोदीनगर नॉर्थ और मोदीनगर साउथ में स्टेशन प्रस्तावित हैं।
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प्राथमिकता वाले खंड में 390 पिलर्स का निर्माण:
एनसीआरटीसी को साहिबाबाद से दुहाई तक प्राथमिकता वाले सेक्शन को मार्च 2023 से संचालन में सफलता मिलती दिखाई दे रही है। साहिबाबाद से दुहाई के बीच रैपिड का निर्माण कार्य तेज गति से जारी है। साहिबाबाद से दुहाई तक कुल 525 पिलर्स का निर्माण होना है। इनमें से 390 से अधिक का निर्माण पूरा किया जा चुका है। निर्माण कार्य की गति को देखते हुए एनसीआरटीसी की ओर से सिविल संबंधी कार्य 2022 तक काम पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। प्राथमिकता वाले खंड में साहिबाबाद से मेरठ रोड व मेरठ रोड से दुहाई तक दोनों भागों में करीब डेढ़ किमी का एलिवेटेड ट्रैक (वायडक्ट) का निर्माण पूरा हो चुका है। केवल इस पर रैपिड की पटरी बिछना बाकी है। एलिवेटेड ट्रैक तैयार करने के लिए और वसुंधरा कास्टिंग यार्ड में गार्डर को एलिवेटेड ट्रैक पर लाँच करने के लिए प्राथमिकता वाले खंड में आठ लॉंचिंग गैंट्री मशीनों को लगाया गया है।
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कोट...
बिजली की खपत 40 फीसदी कम करने के लिए अक्षय ऊर्जा के विभिन्न स्रोत व नवीन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी के तहत रैपिड ट्रेन में पुश बटन के जरिए ट्रेन के दरवाजे खुलेंगे। इससे बिजली की खपत कम करने और एसी की कूलिंग को बरकरार रखने में मदद मिलेगी। -- पुनीत वत्स, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, एनसीआरटीसी