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Ghaziabad News: पूछ रहे लोग, बारिश भी जा चुकी अब तो बता दो कब तक होगा सड़क निर्माण
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गाजियाबाद। लंबे समय से सड़क के नाम पर गड्ढों में चल रहे हम-तुम रोड के निवासियों ने जीडीए से पूछा है कि बारिश भी बीत चुकी, अब तो बता दो कब तक यह रोड बनेगी। तीन साल में 300 बार से अधिक पत्र लिखकर सड़क बनवाने की मांग कर चुके है लोग अब थक चुके हैं।
लोगों का कहना है कि लाखों रुपये के फ्लैट में रहते हुए रास्ते के नाम पर गांव से भी बदतर जीवन बिताने को विवश हैं। हम-तुम रोड फोरम के लोगों ने मंगलवार को एक बार फिर से जीडीए में शिकायत देकर विरोध जताया है। हम-तुम रोड फोरम के पदाधिकारी मंजीत सिंह का कहना है कि पिछले कई वर्षों से फाइल जीडीए के दफ्तर में घूम रही है।
रोड के किनारे बसी कॉलोनियों के करीब 50 हजार लोगों को गड्ढों से होकर गुजरना पड़ रहा है। कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। स्कूटी सवार की गड्ढे में गिरने से मौत भी हो चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जीडीए ने पिछले महीने ही काम शुरू करने का दावा किया था, लेकिन पता चला कि इसी महीने छह अक्तूबर को फिर से टेंडर निकाला गया है। इस बार एस्टिमेट करीब तीन करोड़ बढ़कर 26 करोड़ रुपये हो गया है।
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हम-तुम रोड वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य मुरारीलाल शर्मा का कहना है कि निवासियों के अथक प्रयासों के बाद पहली बार 2025 को 23.38 करोड़ की लागत से निर्माण के लिए टेंडर निकाले गए थे। 2.7 किमी लंबी सड़क का निर्माण आज तक नहीं हो पाया। गर्मियों में शुरू करने का दावा किया गया था लेकिन बारिश आ गई। इसके बाद बारिश के बाद काम शुरू करने का दावा किया गया, कई बार मापजोख भी कई लेकिन काम शुरू नहीं हो सका।
जीडीए के मुख्य अभियंता आलोक रंजन का कहना है कि सड़क के चौड़ीकरण के लिए जमीन नहीं मिलने की वजह से काम रुक गया था। किसानों से लगातार वार्ता के बाद अब आपसी सहमति से जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। किसानों के साथ ही कुछ बिल्डरों की जमीन रास्ते में आ रही है। भू-अर्जन विभाग के अधिकारियों की वार्ता किसानों और बिल्डरों से हो गई है। उम्मीद है कि इस बार अगले महीने से काम शुरू हो जाएगा।
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लोगों का कहना है कि लाखों रुपये के फ्लैट में रहते हुए रास्ते के नाम पर गांव से भी बदतर जीवन बिताने को विवश हैं। हम-तुम रोड फोरम के लोगों ने मंगलवार को एक बार फिर से जीडीए में शिकायत देकर विरोध जताया है। हम-तुम रोड फोरम के पदाधिकारी मंजीत सिंह का कहना है कि पिछले कई वर्षों से फाइल जीडीए के दफ्तर में घूम रही है।
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रोड के किनारे बसी कॉलोनियों के करीब 50 हजार लोगों को गड्ढों से होकर गुजरना पड़ रहा है। कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। स्कूटी सवार की गड्ढे में गिरने से मौत भी हो चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जीडीए ने पिछले महीने ही काम शुरू करने का दावा किया था, लेकिन पता चला कि इसी महीने छह अक्तूबर को फिर से टेंडर निकाला गया है। इस बार एस्टिमेट करीब तीन करोड़ बढ़कर 26 करोड़ रुपये हो गया है।
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हम-तुम रोड वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य मुरारीलाल शर्मा का कहना है कि निवासियों के अथक प्रयासों के बाद पहली बार 2025 को 23.38 करोड़ की लागत से निर्माण के लिए टेंडर निकाले गए थे। 2.7 किमी लंबी सड़क का निर्माण आज तक नहीं हो पाया। गर्मियों में शुरू करने का दावा किया गया था लेकिन बारिश आ गई। इसके बाद बारिश के बाद काम शुरू करने का दावा किया गया, कई बार मापजोख भी कई लेकिन काम शुरू नहीं हो सका।
जीडीए के मुख्य अभियंता आलोक रंजन का कहना है कि सड़क के चौड़ीकरण के लिए जमीन नहीं मिलने की वजह से काम रुक गया था। किसानों से लगातार वार्ता के बाद अब आपसी सहमति से जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। किसानों के साथ ही कुछ बिल्डरों की जमीन रास्ते में आ रही है। भू-अर्जन विभाग के अधिकारियों की वार्ता किसानों और बिल्डरों से हो गई है। उम्मीद है कि इस बार अगले महीने से काम शुरू हो जाएगा।