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सॉफ्टवेयर अपडेट करने के नाम पर जापानी कंपनियों को ठगने वाला गैंग पकड़ा

Wed, 14 Apr 2021 12:12 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Wed, 14 Apr 2021 12:12 PM IST
सार

  • छह आरोपी गिरफ्तार, सरगना फरार
  • विदेशी कंपनियों को झांसा देने के लिए कोचिंग में सीखी जापानी भाषा
  • हवाला के जरिये भारतीय मुद्रा में बदलवाकर अपने खाते में मंगाते थे रकम

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Gang caught cheating Japanese companies in the name of updating software
कंप्यूटर कीबोर्ड - फोटो : Social media

विस्तार

साइबर सेल ने जापानी कंपनियों से सॉफ्टवेयर अपडेट और लाइसेंस रिन्युअल के नाम पर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी दिल्ली, बिहार, गौतमबुद्धनगर, मेरठ और गाजियाबाद के रहने वाले हैं। विदेशी कंपनियों को झांसा देने के लिए आरोपियों ने कोचिंग में जापानी भाषा सीखी थी। ठगी की रकम को हवाला के जरिये कमीशन पर कैश कराया जाता था। गिरोह के सरगना दिल्ली निवासी राम और गौरव फरार हैं, जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

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एसएसपी अमित पाठक ने प्रेसवार्ता में बताया कि कुछ समय पहले इंदिरापुरम क्षेत्र में फर्जी कॉल सेंटर के जरिए विदेशी कंपनियों से ठगी करने की सूचना मिली थी। आरोपियों की धरपकड़ के लिए साइबर सेल को लगाया गया था। जांच में पता चला कि आरोपी जापानी कंपनियों को ही निशाना बनाते हैं। इसके लिए वह जापानी भाषा में ही बातचीत करते हैं। 
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पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है जिनकी पहचान आशीष सूरी निवासी बेगमपुर रोहिणी दिल्ली, अविनाश गुप्ता निवासी मोहल्ला हीरालाल कस्बा मवाना मेरठ, एडविन जॉर्ज निवासी जेएनयू मेन गेट मुनीरका दिल्ली, उमेश नेगी निवासी रामपार्क एक्सटेंशन ट्रॉनिका सिटी गाजियाबाद और विक्रमचंद दास निवासी जोशी कॉलोनी मंडावली पटपड़गंज दिल्ली के रूप में हुई है। आदर्श 12वीं और विक्रमचंद दास 8वीं पास है। बाकी सभी आरोपी ग्रेजुएट हैं। आरोपियों के कब्जे से आठ मोबाइल फोन, 80 डाटा पेपर शीट, पांच लैपटॉप, चार एटीएम कार्ड, आईकार्ड व वाई-फाई मॉडम बरामद हुआ है।
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नामी सॉफ्टवेयर कंपनियों का डाटा कराया लीक
एसएसपी ने बताया कि तमाम विदेशी सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर कंपनियों ने भारत में इंस्टालेशन के लिए एजेंसियां हायर की हुई हैं। उनके पास डाटा रहता है कि किस कंपनी के सिस्टम (कंप्यूटरों) के सॉफ्टवेयर की अवधि खत्म हो चुकी है। इसके बाद एजेंसियां उन कंपनियों को कॉल करके सॉफ्टवेयर बेचती हैं। गिरोह से जुड़े लोगों ने जापानी कंपनियों का यही डाटा लीक करा लिया था। जापानी कंपनियों को गुमराह करने के लिए गिरोह के सदस्यों को जापानी भाषा की कोचिंग कराई गई थी।

सिस्टम का एक्सेस लेकर हाथिया लेते थे प्रोडक्ट-की, अन्य को बेच देते थे
लीक कराई गई सूची में शामिल जापानी कंपनियों से बात करने के लिए आरोपी स्काइप व एक्स-लाइट एप के जरिये इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल करते थे। जापानी भाषा में बात करने के कारण कोई इन पर शक भी नहीं करता था। वह नामी कंपनी के नाम से सॉफ्टवेयर अपडेट कराने के लिए कहते थे। इसके लिए लोकल स्तर पर सॉफ्टवेयर खरीदवाते और फिर उसे इंस्टाल करने के बहाने कंप्यूटर का एक्सेस अपने हाथ में ले लेते। इस दौरान वह सॉफ्टवेयर की प्रोडक्ट-की (चाबी) हासिल कर लेते और उसे किसी अन्य को बेचकर उनसे पैसे वसूल लेते थे।

गिफ्ट वाउचर के रूप में लेते थे रकम, कमीशन पर कराते थे कैश
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य सॉफ्टवेयर अपडेट करने की एवज में गिफ्ट वाउचर (स्क्रेच कार्ड) के रूप में रकम लेते थे। अधिकांश गिफ्ट वाउचर गूगल-पे के होते थे। उन्हें दिल्ली के एक व्यक्ति से हवाला के जरिये हासिल करते थे। हवाला के जरिये 15 से 20 फीसदी कमीशन देकर गिफ्ट वाउचर को कैश करा लेते थे। एसएसपी ने बताया कि आरोपियों और उनके परिजनों के करीब 15 खाते ट्रेस हुए हैं, जिनमें वह ठगी की रकम मंगाते थे।

दो महीने में विदेशी कंपनियों से हजारों डॉलर ठगे
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने जॉब के लिए नौकरी डॉट कॉम पर अप्लाई किया था। नौकरी मिलने के बाद उन्हें असलियत पता चली तो वह भी ठगी के धंधे से जुड़ गए। साइबर सेल के नोडल अधिकारी व सीओ कविनगर अभय कुमार मिश्र ने बताया कि दो माह में गैंग जापानी कंपनियों से करीब दस हजार डॉलर की ठगी कर चुका है। गिरोह के सरगना राम व गौरव अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद ठगी की रकम का सही आंकलन किया जा सकेगा।


खाता छोड़कर सब फर्जी
पुलिस का कहना है कि आरोपी करीब डेढ़ साल से ठगी का गोरखधंधा चला रहे थे। आरोपी फर्जी आईडी पर सिम खरीदकर उनका इस्तेमाल करते थे। इंटरनेट कॉलिंग का नंबर भी फर्जी होता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी सब कुछ फर्जी इस्तेमाल करते थे, लेकिन रकम मंगाने के लिए खाता नंबर असली इस्तेमाल करते थे। इसी के जरिये वह पकड़े गए। अधिकारियों का कहना है कि सभी खातों की डिटेल संबंधित बैंक से मांगी गई है।

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