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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   Dog attacks continue despite crores in spending; over twenty six thousand people received anti-rabies vaccines in eight months.

Ghaziabad News: करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं थमे कुत्तों के हमले, आठ महीने में 26 हजार से अधिक को लगी एआरवी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 02:25 AM IST
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Dog attacks continue despite crores in spending; over twenty six thousand people received anti-rabies vaccines in eight months.
गाजियाबाद। आवारा कुत्तों के हमलों पर अंकुश लगाने के लिए नगर निगम करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन लोगों को कुत्तों के काटने से राहत नहीं मिल रही है। जिले में एंटी रेबीज वैक्सीन की मांग लगातार बनी हुई है। एमएमजी अस्पताल की आठ महीने की रिपोर्ट के अनुसार 26 हजार से अधिक लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। इनमें 18 हजार से अधिक लोग आवारा कुत्तों के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे। लगातार बढ़ते मामलों के बीच शासन से एंटी रेबीज वैक्सीन की आपूर्ति की जा रही है, जबकि कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और पहचान के लिए नगर निगम की ओर से भी लगातार खर्च किया जा रहा है।
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नगर निगम के स्तर से वर्ष 2021 से अब तक कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण पर करीब 1.80 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अक्तूबर 2023 से अगस्त 2026 के बीच करीब 30 हजार कुत्तों की नसबंदी किए जाने का दावा है। इसके बावजूद कुत्तों के हमले पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सके हैं। आवारा कुत्तों की पहचान और उनके टीकाकरण की निगरानी आसान बनाने के लिए करीब 60 हजार कुत्तों को माइक्रोचिप लगाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इस योजना पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के कई नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कुत्ते के काटने के मामले लगातार पहुंच रहे हैं। मई 2026 में जिले के 10 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को कुत्ते के काटने के मामलों के लिहाज से संवेदनशील बताया गया था। खोड़ा क्षेत्र में जनवरी से अगस्त के बीच ही 4500 से अधिक लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुत्तों के काटने के मामले किस स्तर पर सामने आ रहे हैं।
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अगस्त 2026 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया था कि जिले में रोजाना नए और पुराने मरीजों को मिलाकर करीब 500 एआरवी की खुराक लगाई जा रही हैं। इनमें नए मरीजों की संख्या करीब 250 प्रतिदिन थी। इससे एंटी रेबीज वैक्सीन की लगातार बनी मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है। सितंबर में कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन का स्टॉक खत्म होने के बाद मरीजों को जिला अस्पताल और बड़े स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ा था। एमएमजी और संयुक्त अस्पताल में स्थानीय स्तर पर वैक्सीन की व्यवस्था की गई।




नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता के अनुसार कुत्ते या किसी अन्य संदिग्ध जानवर के काटने पर घाव को तत्काल साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी चिकित्सकीय सलाह लेकर एंटी रेबीज उपचार शुरू कराना जरूरी है। रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद बीमारी बेहद गंभीर और लगभग घातक हो सकती है। इसलिए कुत्ते के काटने के बाद लापरवाही न करते हुए समय पर टीका लगवाना ही बचाव का सबसे अहम उपाय है।
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