UP: दंपती और कबूतरों की मौत बनी रहस्य... राज खंगालने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम, जानें क्या है पूरा मामला
स्वास्थ्य विभाग की छह सदस्यीय टीम जांच को क्षेत्र में पहुंची। मृतक दंपती की बिसारा रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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बुलंदशहर के डिबाई के गांव उमरारा में बीते दिनों मृतक वृद्ध दंपती और उनके पालतू करीब 20 कबूतरों की मौत का रहस्य अभी तक अनसुलझा है। दंपती और कबूतरों की मौत किसी वायरस के चलते तो नहीं हुई, इसकी जांच के लिए सोमवार को गांव उमरारा में दिल्ली और मेरठ से स्वास्थ्य विभाग की जांच के लिए पहुंची। लेकिन, इस दौरान कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी है। अब टीम की जांच मृतक दंपती की बिसरा रिपोर्ट पर अटक गई है। घटनास्थल से कोई वायरस नहीं मिला है।
डिबाई के गांव उमरारा में गत 20 जून को 72 वर्षीय लक्ष्मण और उनकी पत्नी 68 वर्षीय सोमवती का शव उनके घर की ऊपरी मंजिल पर अलग-अलग कमरों में पड़ा हुआ मिला था। जिनके शवों से काफी दुर्गंध आ रही थी। जबकि, दूसरे कमरे में उनके पालतू करीब 20 कबूतर मृत मिले थे। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया था।
रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने पर उनका बिसरा प्रिजर्व कर जांच को लैब भेजा गया। दंपती और कबूतरों की मौत का रहस्य उजागर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के राज्य सर्विलांस अधिकारी के निर्देश पर सोमवार को छह सदस्यीय टीम गांव उमरारा पहुंची। जहां, उन्हें जांच के लिए निर्देश दिए गए थे कि दंपती और कबूतरों की मौत किसी वायरस की वजह से तो नहीं हुई है।
टीम में आईपीएसपी-एनसीडीसी डा. संकीत कुलकर्णी जेडी व डॉ. सत्यम कुमार कंसलटेंट इपीडीयोलाजिस्ट, मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान, जिला सर्विलांस अधिकारी डा. रमित कुमार, एमओआईसी दानपुर डा. नवल किशोर के साथ बीपीएम विनय कुमार समेत अन्य स्थानीय स्वास्थ्य अफसर पहुंचे। जिन्होंने मृतकों के कमरों व जिस स्थल पर कबूतर रहते थे वहां की जांच पड़ताल की।
साथ ही मौके से कुछ सैंपल भी लिए हैं। इस दौरान मृतकों के परिजनों ने भी बताया कि दंपती की मौत स्वाभाविक है। टीम ने उनके भी बयान दर्ज किए। टीम की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि कमरे में बंद कबूतरों की मौत गर्मी व दाना पानी न मिलने से ही हुई है। अभी तक कोई खतरनाक वायरस की घटनास्थल पर पुष्टि नहीं हुई है। इस दौरान उनके साथ डॉ. रामकुमार उप मुख्य पशु चिकित्सा अधीक्षक, पशु चिकित्सक डॉ अजय प्रताप भी मौजूद रहे।