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मेवाड़ यूनिवर्सिटी के चेयरमैन को भेजा जेल
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 14 Jun 2016 12:59 AM IST
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जेल में होगी पढ़ाई
विजलेंस की टीम ने गिरफ्तार मेवाड़ यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अशोक गादिया को सोमवार को अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
सीओ चंद्रपाल तितियाल के मुताबिक कुछ लोगों ने गाजियाबाद में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम पर एक ब्रांच खोली थी। इस इंस्टीट्यूट में एनजीओ संचालक के माध्यम से उत्तराखंड के 440 छात्रों के एडमिशन कराए गए।
इसके अलावा अन्य प्रांतों के भी छात्र थे। एडमिशन के बाद उत्तराखंड समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति की मांग की गई। समाज कल्याण के पास पर्याप्त बजट नहीं होने के कारण गढ़वाल डिवीजन से कुछ पैसा स्वीकृत किया गया लेकिन कुमाऊं डिवीजन के पास पैसे ही नहीं थे।
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इस मामले में एक अधिवक्ता की शिकायत पर शासन ने विजिलेंस जांच करने का आदेश दिया। जांच की जानकारी मिलते ही बैंक ने छात्रवृत्ति का पैसा रोक दिया। जांच के के बाद विजिलेंस टीम ने रिपोर्ट दर्ज कर एनजीओ संचालक ललित नेगी, गौरव, अनीस सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर छात्रवृति फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।
जांच में आया कि लाल कुआं के दस छात्रों ने छात्रवृत्ति के कागज पर दस्तखत नहीं किए थे। फिर भी फर्जी दस्तखत से छात्रवृत्ति निकालने की कोशिश की गई। इसी आधार पर सीओ चंद्रपाल तितियाल ने हल्द्वानी से यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अशोक गादिया को रविवार को गिरफ्तार कर लिया था।
गिरफ्तार चेयरमैन काशीनगर सेक्टर-4 सदर चित्तौड़गढ़ के रहने वाले हैं। सोमवार को आरोपी को विजलेंस टीम ने अदालत में पेश किया। अदालत के आदेश पर चेयरमैन को जेल भेजा गया।
विद्यार्थियों के नहीं आने पर दाखिला निरस्त करने का दावा
गाजियाबाद के वसुंधरा स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने उत्तराखंड में स्कॉलरशिप से दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के फर्जी खाते खुलवाने केे आरोप को गलत बताया है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी की सिर्फ इतनी ही भूमिका थी कि बैंक मैनेजर को बताया गया था कि वे उनके विद्यार्थी हैं, खाते विद्यार्थियों ने खुद ही खुलवाए थे। दाखिला लेने के बाद ये विद्यार्थी पढ़ने ही नहीं आए। उनका दाखिला भी निरस्त कर दिया गया है। इस मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी की कोई भूमिका नहीं है।
यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता हरीश गुरनानी ने बताया कि सत्र 2014-15 में उत्तराखंड से करीब 400 और वर्ष 2015-16 में करीब 125 विद्यार्थियों ने अनुसूचित जाति/जनजाति कोटे में प्रवेश लिया था।
सरकारी स्कॉलरशिप के विद्यार्थियों का पंजीकरण उत्तराखंड राज्य के समाज कल्याण बोर्ड की वेबसाइट पर तत्काल कराया गया था। यूनिवर्सिटी पर फर्जी खाते खुलवाने की बात निराधार है।
दाखिला निरस्त कर सूचना समाज कल्याण अधिकारी को लिखित में दी गई। यूनिवर्सिटी को स्कॉलरशिप की कोई रकम नहीं मिली है। मेवाड़ यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और कर्मचारियों को बेवजह परेशान कर बदनाम किया जा रहा है।
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सीओ चंद्रपाल तितियाल के मुताबिक कुछ लोगों ने गाजियाबाद में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम पर एक ब्रांच खोली थी। इस इंस्टीट्यूट में एनजीओ संचालक के माध्यम से उत्तराखंड के 440 छात्रों के एडमिशन कराए गए।
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इसके अलावा अन्य प्रांतों के भी छात्र थे। एडमिशन के बाद उत्तराखंड समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति की मांग की गई। समाज कल्याण के पास पर्याप्त बजट नहीं होने के कारण गढ़वाल डिवीजन से कुछ पैसा स्वीकृत किया गया लेकिन कुमाऊं डिवीजन के पास पैसे ही नहीं थे।
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इस मामले में एक अधिवक्ता की शिकायत पर शासन ने विजिलेंस जांच करने का आदेश दिया। जांच की जानकारी मिलते ही बैंक ने छात्रवृत्ति का पैसा रोक दिया। जांच के के बाद विजिलेंस टीम ने रिपोर्ट दर्ज कर एनजीओ संचालक ललित नेगी, गौरव, अनीस सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर छात्रवृति फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।
जांच में आया कि लाल कुआं के दस छात्रों ने छात्रवृत्ति के कागज पर दस्तखत नहीं किए थे। फिर भी फर्जी दस्तखत से छात्रवृत्ति निकालने की कोशिश की गई। इसी आधार पर सीओ चंद्रपाल तितियाल ने हल्द्वानी से यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अशोक गादिया को रविवार को गिरफ्तार कर लिया था।
गिरफ्तार चेयरमैन काशीनगर सेक्टर-4 सदर चित्तौड़गढ़ के रहने वाले हैं। सोमवार को आरोपी को विजलेंस टीम ने अदालत में पेश किया। अदालत के आदेश पर चेयरमैन को जेल भेजा गया।
विद्यार्थियों के नहीं आने पर दाखिला निरस्त करने का दावा
गाजियाबाद के वसुंधरा स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने उत्तराखंड में स्कॉलरशिप से दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के फर्जी खाते खुलवाने केे आरोप को गलत बताया है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी की सिर्फ इतनी ही भूमिका थी कि बैंक मैनेजर को बताया गया था कि वे उनके विद्यार्थी हैं, खाते विद्यार्थियों ने खुद ही खुलवाए थे। दाखिला लेने के बाद ये विद्यार्थी पढ़ने ही नहीं आए। उनका दाखिला भी निरस्त कर दिया गया है। इस मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी की कोई भूमिका नहीं है।
यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता हरीश गुरनानी ने बताया कि सत्र 2014-15 में उत्तराखंड से करीब 400 और वर्ष 2015-16 में करीब 125 विद्यार्थियों ने अनुसूचित जाति/जनजाति कोटे में प्रवेश लिया था।
सरकारी स्कॉलरशिप के विद्यार्थियों का पंजीकरण उत्तराखंड राज्य के समाज कल्याण बोर्ड की वेबसाइट पर तत्काल कराया गया था। यूनिवर्सिटी पर फर्जी खाते खुलवाने की बात निराधार है।
दाखिला निरस्त कर सूचना समाज कल्याण अधिकारी को लिखित में दी गई। यूनिवर्सिटी को स्कॉलरशिप की कोई रकम नहीं मिली है। मेवाड़ यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और कर्मचारियों को बेवजह परेशान कर बदनाम किया जा रहा है।