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Pratapgarh News: मौत के करीब पहुंच रहे थे, सहयोगी बन गई बदहाल सड़क

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Sep 2026 11:50 PM IST
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They were on the verge of death; the dilapidated road played a role in the tragedy.
दंपती की आत्महत्या का मामला
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अमरौना श्रीकांत का पुरवा गांव की सड़क इतनी बदहाल है कि उस रास्ते से घटनास्थल तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। करीब 500 मीटर दूर राम वनगमन पथ पर उसे खड़ा करना पड़ा। फिर ई-रिक्शा से दंपती को पहुंचाया गया। जिंदगी के लिए जहां पल-पल भारी हो, ऐसे में बदहाल सड़क मौत को नजदीक लाने में सहयोगी बन गई।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर गांव में सड़क बनी होती तो शायद जान बच जाती। सड़क के कारण ही इलाज मिलने में देरी हुई। बुधवार सुबह चार बजे जैसे ही डायल 112 पर दंपती के जहर खाने की सूचना थाने पहुंची, वायरलेस सेट पर संदेश गूंजने लगे। पुलिस घटना स्थल की तरफ दौड़ी, लेकिन गांव में घर तक जाने के लिए पक्का रास्ता नहीं था। खेत में कीचड़ और पानी भरा था। पुलिस वाहन का वहां पहुंचना मुश्किल था। पुलिसकर्मी हाथ में जूता लेकर दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि इस वजह से वे करीब आधे घंटे लेट हो गए थे।
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हम निवाला था भाई, सब छिन गया...
किराए पर कमरा लेकर करते थे झाड़-फूंक
प्रतापगढ़। कोतवाली देहात के अमरौना श्रीकांत का पुरवा निवासी त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि छोटे भाई सुभाष ने दहिलामऊ में किराये पर मकान लिया था। दिन में वहीं झाड़-फूंक करते और रात में घर आ जाते थे। दोनों भाई एक साथ बैठकर खाना खाते थे। उसके जाने से मानो निवाला छिन गया।
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सुभाष तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। बड़े भाई श्याम शंकर सेना से सेवानिवृत्त हुए, दूसरे नंबर पर त्रिभुवन होमगार्ड में जवान हैं। त्रिभुवन और सुभाष का परिवार एक घर में साथ-साथ रहता था। संतान न होने से सुभाष अक्सर गुमसुम रहते थे। गांव वाले बताते हैं कि वह मिलनसार थे। संतान न होने के कारण वह अंदर ही अंदर घुट रहे थे, लेकिन उन्होंने कभी किसी से अपना दर्द साझा नहीं किया। संवाद




पोस्टमार्टम के बाद सुभाष का शव पहुंचा गांव
बुधवार देर शाम सुभाष का शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचा। परिजनों में चीख-पुकार मच गई। गांव के साथ ही आसपास के लोग जुट गए। परिजन प्रयागराज से सपना के शव के आने का इंतजार करते रहे। परिजनों के अनुसार, बृहस्पतिवार को दंपती का अंतिम संस्कार होगा।
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