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स्ट्रीट लाइट्स का मेंटेनेंस करेगी प्राइवेट कंपनी, मशीनें खरीद लीं निगम ने
ब्यूरो,अमर उजाला/गाजियाबाद
Updated Mon, 03 Apr 2017 12:26 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम ने स्ट्रीट लाइट्स की रिपेयरिंग के लिए पांच एलिवेटर मशीनें खरीदीं हैं। रविवार को महापौर अशु वर्मा, अपर नगरायुक्त डीके सिन्हा और कई पार्षदों ने कविनगर जोनल कार्यालय में हरी झंडी दिखाकर इन्हें रवाना किया।
खास बात यह है कि नगर निगम जनवरी महीने में शहर की 60 हजार स्ट्रीट लाइट्स को बदलने और सात साल तक मेंटेनेंस का जिम्मा प्राइवेट कंपनी को दे दिया था। बावजूद इसके पांच वाहन लाइट्स की मेंटेनेंस के लिए खरीद लिए गए। हालांकि निगम अधिकारी अब इसका अलग तर्क दे रहे हैं।
नगर निगम ने टाटा ऐस वाहन खरीदे हैं। इनके ऊपर एलिवेटर लगाए गए हैं। निगम अधिकारियों का तर्क है कि बड़े वाहन छोटी गलियों में नहीं पहुंच पाते थे, ऐसे में अब छोटे वाहनों पर एलिवेटर लगाए गए हैं, ताकि गलियों में भी लाइटें आसानी से रिपेयर हो सकें।
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वहीं महापौर अशु वर्मा ने खुद यह सवाल उठाया कि जब प्राइवेट कंपनी को स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस का जिम्मा दिया जा रहा है तो फिर 40-50 लाख रुपए खर्च कर एलिवेटर खरीदे का क्या मतलब है।
भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी, अनिल स्वामी समेत कई पार्षदों ने भी महापौर का समर्थन किया। हालांकि अपर नगरायुक्त व प्रकाश विभाग के प्रभारी डीके सिन्हा ने बताया कि कंपनी पर मेंटेनेंस का जिम्मा होने पर भी कुछ स्थान ऐसे रह जाएंगे जहां निगम को अपने स्तर पर लाइटें लगानी और मेंटेनेंस करनी पड़ेगी।
ऐसे में एलिवेटर का होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इन वाहनों को मेंटेनेंस करने वाली कंपनी को किराए पर भी दिया जा सकता है। इसको लेकर बोर्ड में चर्चा कर ली जाएगी। इस दौरान भाजपा पार्षद अनिल स्वामी, राजेंद्र त्यागी, प्रवीन चौधरी, मनवीर नागर, अजय शर्मा, पार्षद पति राजकुमार नागर, हिमांशु मित्तल, संयुक्त नगरायुक्त एसके तिवारी मौजूद रहे।
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खास बात यह है कि नगर निगम जनवरी महीने में शहर की 60 हजार स्ट्रीट लाइट्स को बदलने और सात साल तक मेंटेनेंस का जिम्मा प्राइवेट कंपनी को दे दिया था। बावजूद इसके पांच वाहन लाइट्स की मेंटेनेंस के लिए खरीद लिए गए। हालांकि निगम अधिकारी अब इसका अलग तर्क दे रहे हैं।
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नगर निगम ने टाटा ऐस वाहन खरीदे हैं। इनके ऊपर एलिवेटर लगाए गए हैं। निगम अधिकारियों का तर्क है कि बड़े वाहन छोटी गलियों में नहीं पहुंच पाते थे, ऐसे में अब छोटे वाहनों पर एलिवेटर लगाए गए हैं, ताकि गलियों में भी लाइटें आसानी से रिपेयर हो सकें।
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वहीं महापौर अशु वर्मा ने खुद यह सवाल उठाया कि जब प्राइवेट कंपनी को स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस का जिम्मा दिया जा रहा है तो फिर 40-50 लाख रुपए खर्च कर एलिवेटर खरीदे का क्या मतलब है।
भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी, अनिल स्वामी समेत कई पार्षदों ने भी महापौर का समर्थन किया। हालांकि अपर नगरायुक्त व प्रकाश विभाग के प्रभारी डीके सिन्हा ने बताया कि कंपनी पर मेंटेनेंस का जिम्मा होने पर भी कुछ स्थान ऐसे रह जाएंगे जहां निगम को अपने स्तर पर लाइटें लगानी और मेंटेनेंस करनी पड़ेगी।
ऐसे में एलिवेटर का होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इन वाहनों को मेंटेनेंस करने वाली कंपनी को किराए पर भी दिया जा सकता है। इसको लेकर बोर्ड में चर्चा कर ली जाएगी। इस दौरान भाजपा पार्षद अनिल स्वामी, राजेंद्र त्यागी, प्रवीन चौधरी, मनवीर नागर, अजय शर्मा, पार्षद पति राजकुमार नागर, हिमांशु मित्तल, संयुक्त नगरायुक्त एसके तिवारी मौजूद रहे।