{"_id":"570fedbb4f1c1bd93d4a6cdd","slug":"dehradun-jan-shatabdi-man-hit-by-track-death","type":"story","status":"publish","title_hn":"देहरादून जन शताब्दी की चपेट में आया ट्रैक मैन, मौत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
देहरादून जन शताब्दी की चपेट में आया ट्रैक मैन, मौत
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Fri, 15 Apr 2016 12:54 AM IST
विज्ञापन
अपराध्ा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेलवे अफसरों की लापरवाही से एक ट्रैक मैन की मौत हो गई। ट्रैक पर काम कराने के दौरान बृहस्पतिवार सुबह साहिबाबाद क्षेत्र में वह दिल्ली जा रही देहरादून जन शताब्दी की चपेट में आ गया। गंभीर हालत में साथी कर्मचारियों ने उसे गणेश अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कर्मचारी यूनियन ने अधिकारियों पर अनुभव न होने के बावजूद ट्रैक मैन को सबसे व्यस्त ट्रैक पर भेजने का आरोप लगाया है। उच्चाधिकारियों ने मामले की जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हादसा सुबह करीब 11 बजे हुआ।
रेलवे कर्मचारियों ने बताया कि मूलरूप से रतनपुर कालोनी, पनकी कानपुर निवासी ट्रैक मैन वीरेंद्र कुमार राजपूत साहिबाबाद स्थित कांटा नंबर 108 पर ठेका कर्मचारियों से मेंटेनेंस करा रहे थे। वह लाइन नंबर-5 और 6 के बीच खड़े थे।
विज्ञापन
इसी दौरान लाइन नंबर-5 पर गाजियाबाद से दिल्ली की ओर जा रही देहरादून जन शताब्दी आ गई और वह ट्रेन की चपेट में आ गए। उनके सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। पास में ही काम कर रहे कर्मचारी उन्हें लेकर गणेश अस्पताल पहुंचे, लेकिन वह रास्ते में ही दम तोड़ चुके थे।
जानकारी के मुताबिक तीन महीने पहले ही वीरेंद्र रेलवे में भर्ती हुए थे। अनुभव कम होने के बावजूद अफसरों ने उन्हें अकेले ट्रैक पर काम कराने भेज दिया। घटना की सूचना साथी कर्मचारियों ने वीरेंद्र के परिजनों को दी।
सूचना पर दिल्ली से डीईएम-2 पमीर अरोड़ा, एनआरएमयू मैकेनिक शाखा के अध्यक्ष लोकेंद्र चौधरी, यूआरएमयू के शाखा सचिव अजय शर्मा, अध्यक्ष महेश चंद, बेनीराम शर्मा, चेतन राज शर्मा समेत कर्मचारी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डीईएम के समक्ष विरोध जताया। उधर, मृतक के परिजन रात को कानपुर से गाजियाबाद पहुंचे।
45 दिन की ट्रेनिंग थी जरूरी
एनआरएमयू की जंक्शन ब्रांच के सचिव अजय कुमार सक्सेना ने आरोप लगाया कि ट्रैक मैन को कम से कम 45 दिन की इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। ट्रेनिंग न देने की स्थिति में 6 महीने तक उसे अन्य अनुभवी कर्मचारियों के साथ काम पर भेजा जाता है।
अकेले ट्रैक पर नहीं भेजा जाता। गाजियाबाद-साहिबाबाद के बीच सबसे व्यस्त ट्रैक होने के बावजूद वीरेंद्र राजपूत को अफसरों ने अकेले ही काम पर भेज दिया।
शादी की तैयारी, मातम में बदली
मृतक के छोटे भाई नरेंद्र राजपूत ने बताया कि मजदूरी कर उनके पिता ने वीरेंद्र को पढ़ाया था। उनकी मेहनत की वजह से ही उन्हें सरकारी नौकरी मिली। वीरेंद्र की शादी कानपुर के पास अकबरपुर में तय हो चुकी थी। नवंबर 2016 में शादी होनी थी। इसको लेकर परिवार में तैयारियां चल रही थीं। उससे पहले ही खुशियां अब मातम में बदल गईं।
पहली सैलरी लेने से पहले ही हो गई मौत
वीरेंद्र के साथी कर्मचारियों ने बताया कि वीरेंद्र की ज्वाइनिंग 9 जनवरी 2016 को हुई थी। मुंबई से उसकी कागजी कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई थी। इसके चलते उसे अभी एक बार भी सैलरी नहीं मिली थी। अगले महीने उसे इकट्ठे ही तीन महीने की सैलरी मिलनी थी। वीरेंद्र सैलरी मिलने के बाद घर जाने की प्लानिंग कर रहा था।
बिना ट्रेनिंग ड्यूटी पर अकेले भेजे जाने के आरोपों की जांच कराई जाएगी। इसके लिए कमेटी बनाई जाएगी। आरोप अगर सही पाए गए तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- पमीर अरोड़ा, सीनियर डिवीजनल इंजीनियर, दिल्ली डिवीजन
खड़खड़ी फाटक के पास रेलवे ट्रेक पर मिला शव
संगम विहार कालोनी में 12वीं के छात्र ने दोबारा फेल होने के डर से खड़खड़ी फाटक के पास देर रात ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली। छात्र ने अपने दोस्त को बताया था कि पिछले वर्ष गणित में ही वह फेल हुआ था। इस बार भी उसका गणित का पेपर खराब हो गया है। छात्र के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
ट्रैक्टर चालक ब्रजेश लोनी की संगम विहार कालोनी में पत्नी विक्रम, बेटे रितेश (18) और विकास के साथ रहते थे। पुलिस के मुताबिक बुधवार शाम चार बजे रितेश परिजनों को बिना बताए घर से चला गया। देर रात तक घर नहीं आने पर परिजन पुलिस के पास पहुंचे और गुमशुदगी दी।
बृहस्पतिवार सुबह रितेश का शव खड़खड़ी फाटक के पास रेलवे ट्रैक पर मिला। परिजनों ने पुलिस को बताया कि वह करावल नगर दिल्ली स्थित सरदार पटेल इंटर कॉलेज में 12वीं का छात्र है। वह पिछले वर्ष गणित में फेल हो गया था।
उसने अपने दोस्त को बताया था कि इस वर्ष भी उसका गणित का पेपर खराब हो गया है। उसे डर था कि वह इस वर्ष फिर फेल हो जाएगा। लोनी कोतवाली एसओ एपी सिंह का कहना है कि अभी तक की जांच में छात्र के सुसाइड की बात सामने आ रही है। फिलहाल पुलिस कई कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
रितेश को हाईस्कूल में मिले थे 87 फीसदी अंक
रितेश के पिता ने बताया कि बेटा पढ़ाई में अच्छा था। हाईस्कूल की परीक्षा में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे लेकिन इंटर में पिछले वर्ष फेल हो गया था। जिसके बाद से वह डिप्रेशन में था। हालांकि उसने पूरे वर्ष पढाई की थी और टयूशन भी लिए थे। हो सकता है कि डिप्रेशन के चलते उसने यह कदम उठाया है।
विज्ञापन
कर्मचारी यूनियन ने अधिकारियों पर अनुभव न होने के बावजूद ट्रैक मैन को सबसे व्यस्त ट्रैक पर भेजने का आरोप लगाया है। उच्चाधिकारियों ने मामले की जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हादसा सुबह करीब 11 बजे हुआ।
विज्ञापन
रेलवे कर्मचारियों ने बताया कि मूलरूप से रतनपुर कालोनी, पनकी कानपुर निवासी ट्रैक मैन वीरेंद्र कुमार राजपूत साहिबाबाद स्थित कांटा नंबर 108 पर ठेका कर्मचारियों से मेंटेनेंस करा रहे थे। वह लाइन नंबर-5 और 6 के बीच खड़े थे।
विज्ञापन
इसी दौरान लाइन नंबर-5 पर गाजियाबाद से दिल्ली की ओर जा रही देहरादून जन शताब्दी आ गई और वह ट्रेन की चपेट में आ गए। उनके सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। पास में ही काम कर रहे कर्मचारी उन्हें लेकर गणेश अस्पताल पहुंचे, लेकिन वह रास्ते में ही दम तोड़ चुके थे।
जानकारी के मुताबिक तीन महीने पहले ही वीरेंद्र रेलवे में भर्ती हुए थे। अनुभव कम होने के बावजूद अफसरों ने उन्हें अकेले ट्रैक पर काम कराने भेज दिया। घटना की सूचना साथी कर्मचारियों ने वीरेंद्र के परिजनों को दी।
सूचना पर दिल्ली से डीईएम-2 पमीर अरोड़ा, एनआरएमयू मैकेनिक शाखा के अध्यक्ष लोकेंद्र चौधरी, यूआरएमयू के शाखा सचिव अजय शर्मा, अध्यक्ष महेश चंद, बेनीराम शर्मा, चेतन राज शर्मा समेत कर्मचारी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डीईएम के समक्ष विरोध जताया। उधर, मृतक के परिजन रात को कानपुर से गाजियाबाद पहुंचे।
45 दिन की ट्रेनिंग थी जरूरी
एनआरएमयू की जंक्शन ब्रांच के सचिव अजय कुमार सक्सेना ने आरोप लगाया कि ट्रैक मैन को कम से कम 45 दिन की इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। ट्रेनिंग न देने की स्थिति में 6 महीने तक उसे अन्य अनुभवी कर्मचारियों के साथ काम पर भेजा जाता है।
अकेले ट्रैक पर नहीं भेजा जाता। गाजियाबाद-साहिबाबाद के बीच सबसे व्यस्त ट्रैक होने के बावजूद वीरेंद्र राजपूत को अफसरों ने अकेले ही काम पर भेज दिया।
शादी की तैयारी, मातम में बदली
मृतक के छोटे भाई नरेंद्र राजपूत ने बताया कि मजदूरी कर उनके पिता ने वीरेंद्र को पढ़ाया था। उनकी मेहनत की वजह से ही उन्हें सरकारी नौकरी मिली। वीरेंद्र की शादी कानपुर के पास अकबरपुर में तय हो चुकी थी। नवंबर 2016 में शादी होनी थी। इसको लेकर परिवार में तैयारियां चल रही थीं। उससे पहले ही खुशियां अब मातम में बदल गईं।
पहली सैलरी लेने से पहले ही हो गई मौत
वीरेंद्र के साथी कर्मचारियों ने बताया कि वीरेंद्र की ज्वाइनिंग 9 जनवरी 2016 को हुई थी। मुंबई से उसकी कागजी कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई थी। इसके चलते उसे अभी एक बार भी सैलरी नहीं मिली थी। अगले महीने उसे इकट्ठे ही तीन महीने की सैलरी मिलनी थी। वीरेंद्र सैलरी मिलने के बाद घर जाने की प्लानिंग कर रहा था।
बिना ट्रेनिंग ड्यूटी पर अकेले भेजे जाने के आरोपों की जांच कराई जाएगी। इसके लिए कमेटी बनाई जाएगी। आरोप अगर सही पाए गए तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- पमीर अरोड़ा, सीनियर डिवीजनल इंजीनियर, दिल्ली डिवीजन
खड़खड़ी फाटक के पास रेलवे ट्रेक पर मिला शव
संगम विहार कालोनी में 12वीं के छात्र ने दोबारा फेल होने के डर से खड़खड़ी फाटक के पास देर रात ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली। छात्र ने अपने दोस्त को बताया था कि पिछले वर्ष गणित में ही वह फेल हुआ था। इस बार भी उसका गणित का पेपर खराब हो गया है। छात्र के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
ट्रैक्टर चालक ब्रजेश लोनी की संगम विहार कालोनी में पत्नी विक्रम, बेटे रितेश (18) और विकास के साथ रहते थे। पुलिस के मुताबिक बुधवार शाम चार बजे रितेश परिजनों को बिना बताए घर से चला गया। देर रात तक घर नहीं आने पर परिजन पुलिस के पास पहुंचे और गुमशुदगी दी।
बृहस्पतिवार सुबह रितेश का शव खड़खड़ी फाटक के पास रेलवे ट्रैक पर मिला। परिजनों ने पुलिस को बताया कि वह करावल नगर दिल्ली स्थित सरदार पटेल इंटर कॉलेज में 12वीं का छात्र है। वह पिछले वर्ष गणित में फेल हो गया था।
उसने अपने दोस्त को बताया था कि इस वर्ष भी उसका गणित का पेपर खराब हो गया है। उसे डर था कि वह इस वर्ष फिर फेल हो जाएगा। लोनी कोतवाली एसओ एपी सिंह का कहना है कि अभी तक की जांच में छात्र के सुसाइड की बात सामने आ रही है। फिलहाल पुलिस कई कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
रितेश को हाईस्कूल में मिले थे 87 फीसदी अंक
रितेश के पिता ने बताया कि बेटा पढ़ाई में अच्छा था। हाईस्कूल की परीक्षा में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे लेकिन इंटर में पिछले वर्ष फेल हो गया था। जिसके बाद से वह डिप्रेशन में था। हालांकि उसने पूरे वर्ष पढाई की थी और टयूशन भी लिए थे। हो सकता है कि डिप्रेशन के चलते उसने यह कदम उठाया है।