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बिल्डरों ने लगाया सरकार की योजना को पलीता
Updated Sun, 17 Jun 2018 05:44 PM IST
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जीडीए को जमीन देने में बिल्डरों ने दिया ‘गच्चा’
गाजियाबाद। इंटीग्रेटेड टाउनशिप योजना 2005 के तहत बिल्डरों ने टाउनशिप तो खड़ी कर दी, लेकिन कूड़ा ठिकाने के लिए शर्त के मुताबिक गालंद में डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन मुहैया कराने में जीडीए को गच्चा दे रहे हैं। नगर निगम पर कूड़ा का बोझ बढ़ने की इस वजह में हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण की लेटलतीफी का भी है। बिल्डरों ने कुछ जमीन उपलब्ध कराई है, लेकिन अभी करीब 16 एकड़ जमीन और उपलब्ध कराई जानी है। शुक्रवार को हुई जीडीए की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। जीडीए मामले में अब सख्ती के मूड में है।
टाउनशिप विकसित होने के आठ से 10 वर्ष बाद भी बिल्डरों ने अपने हिस्से की जमीन जीडीए को नहीं दी है। जबकि शर्तों के तहत हर टाउनशिप से निकलने वाले कूड़ा का निस्तारण गालंद स्थित डंपिंग यार्ड में किया जाना है, जो अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। मौजूदा समय में आठ बिल्डर ने अपने हिस्से की जमीन मुहैया नहीं कराई है, जबकि इनमें से कई बिल्डर की तरफ से टाउनशिप विकसित की जा चुकी है। ऐसे में इन टाउनशिप से निकलने वाला कूड़ा नगर निगम पर बोझ है। कूड़े का निस्तारण प्रताप विहार और पिलखुवा में बने निजी डंपिंग ग्राउंड में किया जा रहा है। जबकि शर्तों के तहत बिल्डरों को टाउनशिप के बदले गालंद में अपने हिस्से की जमीन खरीद कर देनी थी, जिस पर जीडीए द्वारा अत्याधुनिक डंपिंग ग्राउंड विकसित किया जा सके, जिससे की टाउनशिप से निकलने वाले बायो वेस्ट का निस्तारण गालंद में किया जा सके। इससे मामला साफ है कि हापुड़ के गालंद व पिपलहेड़ा में प्रस्तावित डंपिंग यार्ड पर अभी काम नहीं हो पाएगा, क्योंकि पूरी जमीन जीडीए को नहीं मिली है।
किसके हिस्से की कितनी जमीन बाकी
उप्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड - 4.88 एकड़
क्रासिंग इंफ्रा. प्रा. लिमिटेड - 3.41 एकड़
अंसल प्रापर्टीज एंड इंफ्रा. लिमिटेड - 1.33 एकड़
अग्रवाल एसोसिएट्स प्रमोटर्स लिमिटेड - 1.75 एकड़
यूटीलिटी एस्टेटस प्रा. लिमिटेड - 1.11 एकड़
एसएमवी एजेंसीज प्रा. लिमिटेड - 2.84 एकड़
सामग कांस्ट्रक्शन लिमिटेड - 0.69 एकड़
लैंडक्राफ्ट डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड - 0.87 एकड़
क्या है इंटीग्रेटेड टाउनशिप
निजी पूंजी निवेश के माध्यम से आवासीय योजनाओं के लिए शासन ने वर्ष 2005 में इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी बनाई। इसके तहत वर्तमान में जीडीए के अधीन 10 निजी विकासकर्ता पंजीकृत हैं। इसमें से ‘ए’ श्रेणी में आठ व ‘बी’ श्रेणी में दो विकासकर्ता पंजीकृत हैं। इनमें से सात विकासकर्ताओं ने भू-स्वामित्व प्रस्तुत कर प्राधिकरण से लाइसेंस प्राप्त किया है।
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ं
गालंद में 18 एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है जबकि 12 एकड़ जमीन की फाइल हापुड़ जिला प्रशासन के पास है। काफी बिल्डर जमीन खरीद कर देने को तैयार हैं, लेकिन एससी श्रेणी के लोगों की जमीन है, जिसे खरीदने में दिक्कत आ रही है। करीब चार महीने से फाइल हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण व प्रशासन में अटकी है। अब डीएम हापुड़ से बात कर मामले का समाधान निकाला जाएगा। नियम के तहत एससी श्रेणी के किसी व्यक्ति से जमीन खरीदी जाती है तो उसमें संबंधित जिले के डीएम की स्वीकृति होने आवश्यक है। - रितु माहेश्वरी, जिलाधिकारी
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गाजियाबाद। इंटीग्रेटेड टाउनशिप योजना 2005 के तहत बिल्डरों ने टाउनशिप तो खड़ी कर दी, लेकिन कूड़ा ठिकाने के लिए शर्त के मुताबिक गालंद में डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन मुहैया कराने में जीडीए को गच्चा दे रहे हैं। नगर निगम पर कूड़ा का बोझ बढ़ने की इस वजह में हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण की लेटलतीफी का भी है। बिल्डरों ने कुछ जमीन उपलब्ध कराई है, लेकिन अभी करीब 16 एकड़ जमीन और उपलब्ध कराई जानी है। शुक्रवार को हुई जीडीए की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। जीडीए मामले में अब सख्ती के मूड में है।
टाउनशिप विकसित होने के आठ से 10 वर्ष बाद भी बिल्डरों ने अपने हिस्से की जमीन जीडीए को नहीं दी है। जबकि शर्तों के तहत हर टाउनशिप से निकलने वाले कूड़ा का निस्तारण गालंद स्थित डंपिंग यार्ड में किया जाना है, जो अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। मौजूदा समय में आठ बिल्डर ने अपने हिस्से की जमीन मुहैया नहीं कराई है, जबकि इनमें से कई बिल्डर की तरफ से टाउनशिप विकसित की जा चुकी है। ऐसे में इन टाउनशिप से निकलने वाला कूड़ा नगर निगम पर बोझ है। कूड़े का निस्तारण प्रताप विहार और पिलखुवा में बने निजी डंपिंग ग्राउंड में किया जा रहा है। जबकि शर्तों के तहत बिल्डरों को टाउनशिप के बदले गालंद में अपने हिस्से की जमीन खरीद कर देनी थी, जिस पर जीडीए द्वारा अत्याधुनिक डंपिंग ग्राउंड विकसित किया जा सके, जिससे की टाउनशिप से निकलने वाले बायो वेस्ट का निस्तारण गालंद में किया जा सके। इससे मामला साफ है कि हापुड़ के गालंद व पिपलहेड़ा में प्रस्तावित डंपिंग यार्ड पर अभी काम नहीं हो पाएगा, क्योंकि पूरी जमीन जीडीए को नहीं मिली है।
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किसके हिस्से की कितनी जमीन बाकी
उप्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड - 4.88 एकड़
क्रासिंग इंफ्रा. प्रा. लिमिटेड - 3.41 एकड़
अंसल प्रापर्टीज एंड इंफ्रा. लिमिटेड - 1.33 एकड़
अग्रवाल एसोसिएट्स प्रमोटर्स लिमिटेड - 1.75 एकड़
यूटीलिटी एस्टेटस प्रा. लिमिटेड - 1.11 एकड़
एसएमवी एजेंसीज प्रा. लिमिटेड - 2.84 एकड़
सामग कांस्ट्रक्शन लिमिटेड - 0.69 एकड़
लैंडक्राफ्ट डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड - 0.87 एकड़
क्या है इंटीग्रेटेड टाउनशिप
निजी पूंजी निवेश के माध्यम से आवासीय योजनाओं के लिए शासन ने वर्ष 2005 में इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी बनाई। इसके तहत वर्तमान में जीडीए के अधीन 10 निजी विकासकर्ता पंजीकृत हैं। इसमें से ‘ए’ श्रेणी में आठ व ‘बी’ श्रेणी में दो विकासकर्ता पंजीकृत हैं। इनमें से सात विकासकर्ताओं ने भू-स्वामित्व प्रस्तुत कर प्राधिकरण से लाइसेंस प्राप्त किया है।
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गालंद में 18 एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है जबकि 12 एकड़ जमीन की फाइल हापुड़ जिला प्रशासन के पास है। काफी बिल्डर जमीन खरीद कर देने को तैयार हैं, लेकिन एससी श्रेणी के लोगों की जमीन है, जिसे खरीदने में दिक्कत आ रही है। करीब चार महीने से फाइल हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण व प्रशासन में अटकी है। अब डीएम हापुड़ से बात कर मामले का समाधान निकाला जाएगा। नियम के तहत एससी श्रेणी के किसी व्यक्ति से जमीन खरीदी जाती है तो उसमें संबंधित जिले के डीएम की स्वीकृति होने आवश्यक है। - रितु माहेश्वरी, जिलाधिकारी