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मोदीपोन के चेयरमैन और एमडी बेटे पर एफआईआर
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मोदीपोन के चेयरमैन और बेटे एमडी पर रिपोर्ट दर्ज
मोदीनगर। मोदीपोन कंपनी की भूमि को अवैध तरीके से निजी बिल्डरों को बेचने के मामले में शासन के आदेश पर तहसीलदार मोदीनगर ने चेयरमैन डॉ. एमके मोदी व उनके बेटे एमडी मनीष कुमार मोदी और अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी है। तहसीलदार ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत की धाराओं मे रिपोर्ट दर्ज कराई है।
तीन दिन पूर्व औद्योगिक विभाग के अनुभाग तीन के सचिव ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने गाजियाबाद की डीएम को मोदीनगर स्थित बंद पड़ी मोदीपोन कंपनी की भूमि को राज्य सरकार में निहित करने व मोदीपोन के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था, जिस पर कार्रवाई करते हुए रविवार रात तहसीलदार मोदीनगर राजबहादुर सिंह ने मोदीपोन के चेयरमैन डॉ. एमके मोदी, उनके बेटे व मोदीपोन के एमडी मनीष कुमार मोदी समेत प्रबंधन समूह के कई अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत के मामले में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। कई साल पूर्व मोदीपोन की भूमि पर अवैध तरीके से कॉलोनी काटे जाने के मामले में वर्तमान समय में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने शासन को पत्र लिखा था, जिसकी जांच शासन ने मेरठ के कमिश्नर को सौंपी थी। मंडलायुक्त के आदेश पर तत्कालीन एडीएम व एसडीएम अतुल कुमार ने मामले की जांच की थी। जिसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए मंडलायुक्त ने 18 सितंबर 2017 को औद्योगिक विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई का आदेश दिया। कंपनी के प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस दिया गया था। उक्त नोटिस के जवाब में कंपनी ने हाईकोर्ट में स्टे हेतु याचिका डाली थी। जिस पर कंपनी को स्टे नहीं मिला। बाद की जांच में पाया गया है कंपनी को 24 एकड़ भूमि के विक्रय की अनुमति थी, मगर कंपनी ने 25 एकड़ बेच दी। जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी को आवासीय निर्माण हेतु भूमि क्रय करने की अनुमति नहीं थी। तहसीलदार राजबहादुर सिंह का कहना है कि शासन के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। भूमि को सरकार में निहित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। उधर, मोदीपोन से 65 एकड़ जमीन को भी राज्य सरकार ने निहित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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मोदीनगर। मोदीपोन कंपनी की भूमि को अवैध तरीके से निजी बिल्डरों को बेचने के मामले में शासन के आदेश पर तहसीलदार मोदीनगर ने चेयरमैन डॉ. एमके मोदी व उनके बेटे एमडी मनीष कुमार मोदी और अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी है। तहसीलदार ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत की धाराओं मे रिपोर्ट दर्ज कराई है।
तीन दिन पूर्व औद्योगिक विभाग के अनुभाग तीन के सचिव ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने गाजियाबाद की डीएम को मोदीनगर स्थित बंद पड़ी मोदीपोन कंपनी की भूमि को राज्य सरकार में निहित करने व मोदीपोन के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था, जिस पर कार्रवाई करते हुए रविवार रात तहसीलदार मोदीनगर राजबहादुर सिंह ने मोदीपोन के चेयरमैन डॉ. एमके मोदी, उनके बेटे व मोदीपोन के एमडी मनीष कुमार मोदी समेत प्रबंधन समूह के कई अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत के मामले में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। कई साल पूर्व मोदीपोन की भूमि पर अवैध तरीके से कॉलोनी काटे जाने के मामले में वर्तमान समय में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने शासन को पत्र लिखा था, जिसकी जांच शासन ने मेरठ के कमिश्नर को सौंपी थी। मंडलायुक्त के आदेश पर तत्कालीन एडीएम व एसडीएम अतुल कुमार ने मामले की जांच की थी। जिसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए मंडलायुक्त ने 18 सितंबर 2017 को औद्योगिक विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई का आदेश दिया। कंपनी के प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस दिया गया था। उक्त नोटिस के जवाब में कंपनी ने हाईकोर्ट में स्टे हेतु याचिका डाली थी। जिस पर कंपनी को स्टे नहीं मिला। बाद की जांच में पाया गया है कंपनी को 24 एकड़ भूमि के विक्रय की अनुमति थी, मगर कंपनी ने 25 एकड़ बेच दी। जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी को आवासीय निर्माण हेतु भूमि क्रय करने की अनुमति नहीं थी। तहसीलदार राजबहादुर सिंह का कहना है कि शासन के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। भूमि को सरकार में निहित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। उधर, मोदीपोन से 65 एकड़ जमीन को भी राज्य सरकार ने निहित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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