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डेढ माह से बंद थी फैक्ट्री, सफाई नहीं होने के चलते बनी जहरीली गैस
Updated Mon, 17 Sep 2018 05:24 PM IST
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डेढ़ माह से बंद थी फैक्ट्री, सफाई न होने से टैंक में बनी जहरीली गैस
लोनी। दौलत नगर चर्च कॉलोनी स्थित जिस अचार फैक्ट्री में हादसा हुआ, डेढ़ माह से बंद थी। टैंक में सड़ा अचार, काई और केमिकल युक्त पानी था, जिससे उसमें जहरीली गैस बन गई। जब लोग टैंक को साफ करने उतरे तो गैस की चपेट में आकर बेहोश होकर पानी से भरे टैंक में गिर गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बरसात में अचार का सीजन बंद होने से डेढ़ माह से फैक्ट्री बंद थी। रविवार को मालिक लवकेश परिवार के साथ टैंक की सफाई करने आए थे। टैंक में पुराना अचार पड़ा था, जो कि सड़ गया था। उसमें गाजर, मूली, आम आदि थे। 12 फीट गहरे और पांच फीट चौडे़ टैंक में केमिकल युक्त पानी भी भरा था। टैंक में पड़ी हुई चीजें पूरी तरह से सड़ चुकी थीं। उसमें जहरीली गैस बन गई थी। टैंक में हाइड्रोजन सल्फाइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा अधिक होने के चलते तीनों पहले बेहोश हुए और फिर टैंक में गिर गए। माना जा रहा है कि आक्सीजन की मात्रा कम होने से तीनों का दम घुट गया। दमकल कर्मियों और पुलिस ने टैंक की दीवार तोड़कर जहरीली गैस निकाली। तीनों शवों को बाहर निकाला। एसडीएम सतेंद्र कुमार ने बताया कि जहरीली गैस से तीनों लोगों की मौत हुई है। फैक्ट्री को सील कर दिया गया है।
ऐसे गलाया जाता था अचार
गाजर, आम, मूली, टाटरी आदि को टैंक में डालकर उसमें सोडा, नमक और केमिकल मिलाया जाता था। फिर अचार को दो से चार दिन के लिए छोड़ दिया जाता था। अचार जल्दी गल जाए, इसके लिए इसमें कई केमिकल का प्रयोग होता था। इसके बाद इसे डब्बों में पैक करके दुकानों पर बेचा जाता था।
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टैंक को तोड़कर निकाली गैस
सूचना पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग के कर्मचारियों ने संयुक्त रेस्क्यू आपरेशन किया। पुलिस ने फैक्ट्री की पिछली दीवार तोड़ी। इसके बाद टीम ने गैस की मात्रा कम करने के लिए टैंक में पानी भरा। गैस की मात्रा कम होने पर टीम ने टैंक से तीनों लोगों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी की मौत हो चुकी थी। जहरीली गैस की मात्रा ज्यादा होने पर एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया था। टीम करीब 12 बजे घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने बताया कि मल्टी गैस डिटेक्टर से पता चला है कि टैंक के अंदर भारी मात्रा में जहरीली गैस थी।
मजदूरी करते थे हृदय राज
पड़ोसी हृदय राज की मौत की खबर सुनते ही कालोनी और परिवार के लोग वहां पहुंचे। मूलरूप से गांव अतरस प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश के रहने वाले ह्रदयराज, पत्नी नीलम, तीन बेटों अश्वनी (20), आदर्श (15) और अमन (12) के साथ शमशेर के मकान में किराए पर रहते थे। वह मजदूरी करते थे। सूचना पर बेटे घटनास्थल पहुंचे। एसडीएम सतेंद्र कुमार ने परिवार के लोगों को सांत्वना दी।
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लोनी। दौलत नगर चर्च कॉलोनी स्थित जिस अचार फैक्ट्री में हादसा हुआ, डेढ़ माह से बंद थी। टैंक में सड़ा अचार, काई और केमिकल युक्त पानी था, जिससे उसमें जहरीली गैस बन गई। जब लोग टैंक को साफ करने उतरे तो गैस की चपेट में आकर बेहोश होकर पानी से भरे टैंक में गिर गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बरसात में अचार का सीजन बंद होने से डेढ़ माह से फैक्ट्री बंद थी। रविवार को मालिक लवकेश परिवार के साथ टैंक की सफाई करने आए थे। टैंक में पुराना अचार पड़ा था, जो कि सड़ गया था। उसमें गाजर, मूली, आम आदि थे। 12 फीट गहरे और पांच फीट चौडे़ टैंक में केमिकल युक्त पानी भी भरा था। टैंक में पड़ी हुई चीजें पूरी तरह से सड़ चुकी थीं। उसमें जहरीली गैस बन गई थी। टैंक में हाइड्रोजन सल्फाइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा अधिक होने के चलते तीनों पहले बेहोश हुए और फिर टैंक में गिर गए। माना जा रहा है कि आक्सीजन की मात्रा कम होने से तीनों का दम घुट गया। दमकल कर्मियों और पुलिस ने टैंक की दीवार तोड़कर जहरीली गैस निकाली। तीनों शवों को बाहर निकाला। एसडीएम सतेंद्र कुमार ने बताया कि जहरीली गैस से तीनों लोगों की मौत हुई है। फैक्ट्री को सील कर दिया गया है।
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ऐसे गलाया जाता था अचार
गाजर, आम, मूली, टाटरी आदि को टैंक में डालकर उसमें सोडा, नमक और केमिकल मिलाया जाता था। फिर अचार को दो से चार दिन के लिए छोड़ दिया जाता था। अचार जल्दी गल जाए, इसके लिए इसमें कई केमिकल का प्रयोग होता था। इसके बाद इसे डब्बों में पैक करके दुकानों पर बेचा जाता था।
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टैंक को तोड़कर निकाली गैस
सूचना पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग के कर्मचारियों ने संयुक्त रेस्क्यू आपरेशन किया। पुलिस ने फैक्ट्री की पिछली दीवार तोड़ी। इसके बाद टीम ने गैस की मात्रा कम करने के लिए टैंक में पानी भरा। गैस की मात्रा कम होने पर टीम ने टैंक से तीनों लोगों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी की मौत हो चुकी थी। जहरीली गैस की मात्रा ज्यादा होने पर एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया था। टीम करीब 12 बजे घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने बताया कि मल्टी गैस डिटेक्टर से पता चला है कि टैंक के अंदर भारी मात्रा में जहरीली गैस थी।
मजदूरी करते थे हृदय राज
पड़ोसी हृदय राज की मौत की खबर सुनते ही कालोनी और परिवार के लोग वहां पहुंचे। मूलरूप से गांव अतरस प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश के रहने वाले ह्रदयराज, पत्नी नीलम, तीन बेटों अश्वनी (20), आदर्श (15) और अमन (12) के साथ शमशेर के मकान में किराए पर रहते थे। वह मजदूरी करते थे। सूचना पर बेटे घटनास्थल पहुंचे। एसडीएम सतेंद्र कुमार ने परिवार के लोगों को सांत्वना दी।