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Ghaziabad News: कंप्लायंस प्लेट लगी, सिलिंडर टेस्टिंग का प्रमाणपत्र गायब

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2026 01:12 AM IST
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Compliance plate affixed, but cylinder testing certificate missing
अनिल त्यागी
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गाजियाबाद। दिल्ली में ट्रक में सीएनजी भरते समय सिलिंडर फटने के बाद जिले के सीएनजी पंपों पर बढ़ाई गई सख्ती ने सिलिंडर टेस्टिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंपों पर सीएनजी भराने पहुंच रहे करीब 50 फीसदी वाहन स्वामी कंप्लायंस प्लेट तो दिखा रहे हैं, लेकिन वैध हाइड्रो सिलिंडर टेस्टिंग प्रमाणपत्र नहीं दिखा पा रहे हैं। आईजीएल की तकनीकी टीम की निगरानी में यह स्थिति सामने आई है। टीम ने इसकी रिपोर्ट कंपनी मुख्यालय को भेजी है।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि कुछ वाहनों में सिलिंडर की अनिवार्य टेस्टिंग कराए बिना ही कंप्लायंस प्लेट लगा दी गई। ऐसे में सिलिंडर टेस्टिंग एजेंसियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। अब सिलिंडर टेस्टिंग केंद्रों के साथ सीएनजी किट और सिलिंडर लगाने वाली दुकानों पर भी कार्रवाई की तैयारी है।
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जिले में सीएनजी से चलने वाले करीब पौने दो लाख पंजीकृत वाहन और 45 सीएनजी पंप हैं। इन पंपों पर रोजाना करीब एक लाख वाहनों में औसतन आठ लाख किलो सीएनजी भरी जाती है। दिल्ली में हुए हादसे के बाद आईजीएल ने सीएनजी भरने से पहले सुरक्षा मानकों की जांच सख्त कर दी है। अब कंप्लायंस प्लेट के साथ सिलिंडर टेस्टिंग का प्रमाणपत्र दिखाना भी अनिवार्य किया गया है। इसके लिए आईजीएल की तकनीकी टीम पंपों पर आने वाले वाहनों की जांच और रिकॉर्ड तैयार कर रही है। 13 पंप आईजीएल सीधे संचालित करती है।
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हर पांचवें वाहन की प्लेट की मियाद खत्म
आईजीएल की तकनीकी टीम की जांच में यह भी सामने आया है कि हर पांचवें वाहन में लगे सिलिंडर की कंप्लायंस प्लेट की मियाद खत्म हो चुकी है। वहीं, हर दूसरा वाहन स्वामी सिलिंडर टेस्टिंग का प्रमाणपत्र नहीं दिखा पा रहा है। पूछताछ में कई वाहन स्वामियों ने बताया कि उन्होंने सिलिंडर या सीएनजी किट लगाने वाले मैकेनिक से ही प्लेट लगवा ली थी। उन्होंने अधिकृत टेस्टिंग केंद्र से सिलिंडर की जांच नहीं कराई और न ही इसका प्रमाणपत्र लिया। अधिकृत सिलिंडर टेस्टिंग केंद्र पर वाहन से सिलिंडर और किट निकालकर उसकी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच की जाती है। जांच के बाद इन्हें दोबारा फिट किया जाता है। निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद कंप्लायंस प्लेट और प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। इसका रिकॉर्ड ऑनलाइन भी अपडेट किया जाता है। मैकेनिक को यह अधिकार नहीं है।
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इसलिए जरूरी है टेस्टिंग
तकनीकी जानकारों के अनुसार, सीएनजी सिलिंडर की निर्धारित अवधि में हाइड्रो टेस्टिंग कराना जरूरी है। लंबे समय तक सिलिंडर की जांच नहीं होने पर उसमें पानी जमा होने से जंग लग सकती है। इससे सिलिंडर की धातु की परत कमजोर होने लगती है। ऐसे में अत्यधिक दबाव के कारण सिलिंडर के क्षतिग्रस्त होने या फटने का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए केवल सिलिंडर पर कंप्लायंस प्लेट लगी होना पर्याप्त नहीं है, उसका वैध टेस्टिंग रिकॉर्ड भी जरूरी है।

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जिले में सभी सीएनजी पंपों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश हैं। तकनीकी टीम वाहनों की जांच कर रही है। अभी तक सामने आई स्थिति की रिपोर्ट कंपनी मुख्यालय को भेजी गई है। जहां से बिना टेस्टिंग के कंप्लायंस प्लेट लगाए जाने की जानकारी मिलेगी, उन्हें भी चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा मानकों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा।
-अमित तिवारी, जिलापूर्ति अधिकारी, गाजियाबाद

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