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IAS नवीन तंवर को बड़ी राहत: दूसरे की परीक्षा देने के आरोप से बरी, निचली अदालत के फैसले पर की अहम टिप्पणी

Wed, 07 Jan 2026 07:43 PM IST
अनुज कुमार आशुतोष यादव, अमर उजाला, गाजियाबाद
आशुतोष यादव, अमर उजाला, गाजियाबाद Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 07 Jan 2026 07:43 PM IST
सार

गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने आईएएस अधिकारी नवीन तंवर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले  को रद्द किया और उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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CBI court in Ghaziabad granted significant relief to IAS officer Naveen Tanwar
Court room - फोटो : Freepik

विस्तार

आईबीपीएस परीक्षा मामले में दोषी ठहराए गए आईएएस नवीन तंवर को अपीलीय सीबीआई अदालत से बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को गलत मानते हुए उसे रद कर दिया। अदालत ने नवीन तंवर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि निचली अदालत ने जिन साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी माना था, वे भरोसेमंद नहीं हैं।

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16 मार्च 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई ने सुनाई थी सजा
दूसरे की जगह परीक्षा देने के दोषी 2019 बैच के आईएएस अधिकारी नवीन तंवर को 16 मार्च 2024 को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवम वर्मा ने हिमाचल प्रदेश के चंबा में एडीएम नवीन पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। हालांकि, उन्हें जमानत मिल गई थी।

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13 दिसंबर 2014 को दूसरे की परीक्षा देने का था आरोप
नवीन तंवर पर आरोप था कि 13 दिसंबर 2014 को गाजियाबाद में आयोजित हुई इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) की क्लर्क भर्ती परीक्षा में झांसी के अमित की जगह परीक्षा दी थी। सीबीआई ने सॉल्वर गिरोह पकड़ा था, जिसमें नवीन समेत छह आरोपी शामिल थे। सुनवाई के दौरान वर्ष 2019 में नवीन का चयन आईएएस में हुआ था। मामले में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि परीक्षा के दौरान धोखाधड़ी की गई, अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों से परीक्षा दिलाई गई और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

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संदेह के आधार पर किसी को नहीं ठहराया जा सकता दोषी
अपील पर सुनवाई करते हुए विशेष सीबीआई अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने 51 पेज के फैसल में कहा कि सिर्फ संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते और कई अहम बातें पहली बार अदालत में कही गईं, जिनकी पुष्टि पहले जांच के दौरान नहीं हुई थी। निचली अदालत का फैसला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। इसलिए दोषसिद्धि और सजा दोनों को रद किया जाता है और नवीन तंवर को सभी आरोपों से मुक्त किया जाता है।

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