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Ghaziabad News: प्रमोद की हत्या में 12 पर केस, चौकी इंचार्ज निलंबित
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साहिबाबाद। महमूदपुर गांव में रविवार की रात करीब साढ़े आठ बजे की गई किसान प्रमोद कसाना (40) की हत्या के बाद पुलिस के खिलाफ गांव वालों का गुस्सा फूट पड़ा। हत्या के लिए रिस्तल चौकी और टीला मोड़ थाना की पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए शव को 15 घंटे तक नहीं उठने दिया। अफसरों ने रिस्तल चौकी प्रभारी प्रमोद कुमार को निलंबित कर टीला मोड़ थाना प्रभारी चंद्रकांत पांडेय के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए। इस पर हंगामा-प्रदर्शन थमा और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका।
प्रमोद के भाई विनोद ने प्रधान अर्चना कसाना के पति कपिल कसाना , गांव के ही निवासी जितेंद्र, सोनू कुमार, सोनू, हरिओम, शीतल, धर्मवीर, धर्मपाल और आनंद को नामजद कराते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। तीन आरोपी अज्ञात में हैं। विनोद ने बताया कि भाई रोज की तरह कुत्ते को रोटी खिलाने के लिए खेत पर जा रहे थे। रास्ते में उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं। उन्हें छह गोलियां लगीं। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर पहले से घात लगाकर बैठे थे। हत्या के बाद भी वे भागे नहीं। दस मिनट तक वहीं पर रहे। इसके बाद जब उनके परिवार के लोग पहुंचे, तब उनके सामने वे प्रमोद का मोबाइल फोन लूटकर हथियार लहराते हुए आराम से गए।
गोलियों की आवाज सुनकर आसपास से बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। प्रमोद की शव देखते ही उनका गुस्सा फूट पड़ा। पुलिस के खिलाफ हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गई। पुलिस के आने के बाद भी लोग नारे लगाते रहे। अफसरों के पहुंचने पर लोगों ने आरोप लगाया कि हत्या के आरोपियों के साथ पुलिस की मिलीभगत है। यही वजह है कि शिकायत करने पर भी पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है। इसी से उनका दुस्साहस बढ़ा और प्रमोद की हत्या की। रातभर पुलिस लोगों को समझाने और शव को उठने देने के लिए मनाने का प्रयास करती रही लेकिन निराशा ही मिली।
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सोमवार सुबह 11 बजे अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दिनेश पी. कुमार ने प्रमोद के परिजनों को बताया कि चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया था। थाना प्रभारी के खिलाफ भी जांच होगी। इस पर परिजन और अन्य लोग शांत हुए। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। गांव में गुस्सा देखते हुए तीन थानों की फोर्स लगाई गई है। त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) और प्रादेशिक सशस्त्र बल (पीएसी) को भी तैनात किया गया है।
लिखित शिकायत पर भी
नहीं की पुलिस ने कार्रवाई
( ढिलाई )
प्रमोद के परिजनों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही कपिल ने हत्या की धमकी दी थी। इसकी लिखित शिकायत चौकी पर दी गई थी। थाना पुलिस को भी बताया था। कपिल के खिलाफ पहले से संगीन धाराओं में केस दर्ज हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। उसे पुलिस का संरक्षण है। राजनीतिक दलों से कुछ लोग भी उसे संरक्षण देते हैं। इसी वजह से वह कार्रवाई से बच जाता है। विनोद का कहना है कि कुछ दिन पहले कपिल ने उनके चाचा सुभाष पर हमला किया था। उस मामले में भी अब तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
लगेगा एनएसए, जब्त होगी संपत्ति
( दावा )
अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर दिनेश पी. कुमार का कहना है कि प्रमोद की हत्या के आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में गैंगस्टर एक्ट का केस भी दर्ज किया जाएगा। आरोपियों की संपत्ति को भी पुलिस जब्त करेगी। उन्हें संरक्षण देने वालों की पहचान की जा रही है। उन पर भी कार्रवाई होगी। मौका ए वारदात के आसपास से कुछ सीसीटीवी फुटेज मिली हैं। उन्हें देखा जा रहा है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। जल्द ही मामले का खुलासा होगा।
कड़ी कार्रवाई की जाए
खतौली से रालोद के विधायक मदन भैया ने प्रमोद के परिजनों से मिलकर सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि लिखित शिकायत मिलने पर पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए थी। पुलिस सतर्कता दिखाती तो वारदात नहीं होती। आरोपी चाहें कितना ही पहुंच वाला हो, उस पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। पुलिस को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
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प्रमोद के भाई विनोद ने प्रधान अर्चना कसाना के पति कपिल कसाना , गांव के ही निवासी जितेंद्र, सोनू कुमार, सोनू, हरिओम, शीतल, धर्मवीर, धर्मपाल और आनंद को नामजद कराते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। तीन आरोपी अज्ञात में हैं। विनोद ने बताया कि भाई रोज की तरह कुत्ते को रोटी खिलाने के लिए खेत पर जा रहे थे। रास्ते में उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं। उन्हें छह गोलियां लगीं। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर पहले से घात लगाकर बैठे थे। हत्या के बाद भी वे भागे नहीं। दस मिनट तक वहीं पर रहे। इसके बाद जब उनके परिवार के लोग पहुंचे, तब उनके सामने वे प्रमोद का मोबाइल फोन लूटकर हथियार लहराते हुए आराम से गए।
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गोलियों की आवाज सुनकर आसपास से बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। प्रमोद की शव देखते ही उनका गुस्सा फूट पड़ा। पुलिस के खिलाफ हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गई। पुलिस के आने के बाद भी लोग नारे लगाते रहे। अफसरों के पहुंचने पर लोगों ने आरोप लगाया कि हत्या के आरोपियों के साथ पुलिस की मिलीभगत है। यही वजह है कि शिकायत करने पर भी पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है। इसी से उनका दुस्साहस बढ़ा और प्रमोद की हत्या की। रातभर पुलिस लोगों को समझाने और शव को उठने देने के लिए मनाने का प्रयास करती रही लेकिन निराशा ही मिली।
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सोमवार सुबह 11 बजे अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दिनेश पी. कुमार ने प्रमोद के परिजनों को बताया कि चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया था। थाना प्रभारी के खिलाफ भी जांच होगी। इस पर परिजन और अन्य लोग शांत हुए। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। गांव में गुस्सा देखते हुए तीन थानों की फोर्स लगाई गई है। त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) और प्रादेशिक सशस्त्र बल (पीएसी) को भी तैनात किया गया है।
लिखित शिकायत पर भी
नहीं की पुलिस ने कार्रवाई
( ढिलाई )
प्रमोद के परिजनों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही कपिल ने हत्या की धमकी दी थी। इसकी लिखित शिकायत चौकी पर दी गई थी। थाना पुलिस को भी बताया था। कपिल के खिलाफ पहले से संगीन धाराओं में केस दर्ज हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। उसे पुलिस का संरक्षण है। राजनीतिक दलों से कुछ लोग भी उसे संरक्षण देते हैं। इसी वजह से वह कार्रवाई से बच जाता है। विनोद का कहना है कि कुछ दिन पहले कपिल ने उनके चाचा सुभाष पर हमला किया था। उस मामले में भी अब तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
लगेगा एनएसए, जब्त होगी संपत्ति
( दावा )
अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर दिनेश पी. कुमार का कहना है कि प्रमोद की हत्या के आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में गैंगस्टर एक्ट का केस भी दर्ज किया जाएगा। आरोपियों की संपत्ति को भी पुलिस जब्त करेगी। उन्हें संरक्षण देने वालों की पहचान की जा रही है। उन पर भी कार्रवाई होगी। मौका ए वारदात के आसपास से कुछ सीसीटीवी फुटेज मिली हैं। उन्हें देखा जा रहा है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। जल्द ही मामले का खुलासा होगा।
कड़ी कार्रवाई की जाए
खतौली से रालोद के विधायक मदन भैया ने प्रमोद के परिजनों से मिलकर सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि लिखित शिकायत मिलने पर पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए थी। पुलिस सतर्कता दिखाती तो वारदात नहीं होती। आरोपी चाहें कितना ही पहुंच वाला हो, उस पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। पुलिस को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।