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शबनम का बेटा बोला, राष्ट्रपति से लगाऊंगा मां के लिए गुहार
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शबनम का बेटा बोला, राष्ट्रपति से लगाऊंगा मां के लिए गुहार
बुलंदशहर। मैं अपनी मां को बचाने के लिए राष्ट्रपति अंकल के पास मार्च में जाऊंगा, मैं उनसे कहूंगा कि वो उन्हें माफ कर दें। मैं अपनी मां से बहुत प्यार करता हूं। यह बातें अमरोहा के बावन खेड़ी गांव में हुए नरसंहार की आरोपी शबनम के मासूम पुत्र ने कहीं। मां को हुई फांसी की सजा के बाद जब से वह जेल में उससे अंतिम बार मिलकर आया है, तब से उसका पढ़ाई में भी मन नहीं लग रहा है।
अमरोहा के बावन खेड़ी गांव में 14 अप्रैल 2008 में एक नरसंहार हुआ था। जिसमें परिवार की महिला शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, उस दौरान वह गर्भवती थी। जेल में ही उसने 13 दिसंबर 2008 को अपने पुत्र को जन्म दिया था। जो उसके साथ करीब छह वर्ष तक जेल में ही रहा। जिसे जुलाई 2015 में बाल कल्याण समिति ने बुलंदशहर निवासी एक दंपती को दे दिया था। वहीं, अब शबनम को फंासी की सजा सुनाई गई है, उसे मथुरा जेल में फांसी दी जानी है। गत दिनों दंपती शबनम से मिलाने के लिए उसके पुत्र को जेल में ले गया था। मां के पास से लौटने के बाद उसका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है। दंपती ने बताया कि वहां से आने के बाद उसने किताब को हाथ तक नहीं लगाया है। साथ ही उन्होंने कहा कि मार्च में राष्ट्रपति से मुलाकात कर वह अपनी मां की जिंदगी की गुहार लगाएगा।
निर्मम नरसंहार की मुख्य आरोपी शबनम का पुत्र छह वर्ष तक जेल में रहा। इसके बाद बाल कल्याण समिति ने उसे गोद देने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। लेकिन, मासूम को गोद लेने के लिए कोई आगे नहीं आया। बाद में बुलंदशहर निवासी दंपती ने उसे गोद लिया और प्रत्येक तीन माह में दंपती बच्चे को उसकी मां से मिलाने के लिए जेल जाते हैं।
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नगर निवासी दंपती ने बताया कि नियम के अनुसार वह शबनम के बेटे को हर तीन माह में रामपुर जेल में मिलाने ले जाते हैं। इस दौरान बाल संरक्षण समिति के सदस्य भी बच्चे के साथ रहते हैं और देखते हैं कि उसकी परवरिश आदि सही से हो रही है या नहीं। इसके बाद बच्चे के संरक्षण के कागजात मां की मर्जी के बाद फिर से तीन माह के लिए रिन्यूअल होते हैं। साथ ही बताया कि जब बच्चा 18 वर्ष का हो जाएगा तो वह खुद निर्णय लेगा कि उसे कहां रहना है। उन्होंने बताया कि उनकी अपनी कोई संतान नहीं है। वह इस बच्चे को ही अपनी संतान मानकर उसकी परवरिश करते हैं।
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बुलंदशहर। मैं अपनी मां को बचाने के लिए राष्ट्रपति अंकल के पास मार्च में जाऊंगा, मैं उनसे कहूंगा कि वो उन्हें माफ कर दें। मैं अपनी मां से बहुत प्यार करता हूं। यह बातें अमरोहा के बावन खेड़ी गांव में हुए नरसंहार की आरोपी शबनम के मासूम पुत्र ने कहीं। मां को हुई फांसी की सजा के बाद जब से वह जेल में उससे अंतिम बार मिलकर आया है, तब से उसका पढ़ाई में भी मन नहीं लग रहा है।
अमरोहा के बावन खेड़ी गांव में 14 अप्रैल 2008 में एक नरसंहार हुआ था। जिसमें परिवार की महिला शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, उस दौरान वह गर्भवती थी। जेल में ही उसने 13 दिसंबर 2008 को अपने पुत्र को जन्म दिया था। जो उसके साथ करीब छह वर्ष तक जेल में ही रहा। जिसे जुलाई 2015 में बाल कल्याण समिति ने बुलंदशहर निवासी एक दंपती को दे दिया था। वहीं, अब शबनम को फंासी की सजा सुनाई गई है, उसे मथुरा जेल में फांसी दी जानी है। गत दिनों दंपती शबनम से मिलाने के लिए उसके पुत्र को जेल में ले गया था। मां के पास से लौटने के बाद उसका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है। दंपती ने बताया कि वहां से आने के बाद उसने किताब को हाथ तक नहीं लगाया है। साथ ही उन्होंने कहा कि मार्च में राष्ट्रपति से मुलाकात कर वह अपनी मां की जिंदगी की गुहार लगाएगा।
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निर्मम नरसंहार की मुख्य आरोपी शबनम का पुत्र छह वर्ष तक जेल में रहा। इसके बाद बाल कल्याण समिति ने उसे गोद देने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। लेकिन, मासूम को गोद लेने के लिए कोई आगे नहीं आया। बाद में बुलंदशहर निवासी दंपती ने उसे गोद लिया और प्रत्येक तीन माह में दंपती बच्चे को उसकी मां से मिलाने के लिए जेल जाते हैं।
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नगर निवासी दंपती ने बताया कि नियम के अनुसार वह शबनम के बेटे को हर तीन माह में रामपुर जेल में मिलाने ले जाते हैं। इस दौरान बाल संरक्षण समिति के सदस्य भी बच्चे के साथ रहते हैं और देखते हैं कि उसकी परवरिश आदि सही से हो रही है या नहीं। इसके बाद बच्चे के संरक्षण के कागजात मां की मर्जी के बाद फिर से तीन माह के लिए रिन्यूअल होते हैं। साथ ही बताया कि जब बच्चा 18 वर्ष का हो जाएगा तो वह खुद निर्णय लेगा कि उसे कहां रहना है। उन्होंने बताया कि उनकी अपनी कोई संतान नहीं है। वह इस बच्चे को ही अपनी संतान मानकर उसकी परवरिश करते हैं।