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Ghaziabad News: बैंक घोटाले में 15 साल से गायब आरोपी पकड़ी गई

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 12:31 AM IST
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Accused woman, missing for 15 years in a bank fraud case, arrested
गाजियाबाद। सीबीआई गाजियाबाद शाखा की टीम को शुक्रवार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। 2.61 करोड़ रुपये के बैंकिंग घोटाले में 15 साल से भगोड़ा घोषित आरोपी बैंक कर्मचारी पूनम को टीम ने गिरफ्तार कर लिया है।
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पूनम पर वर्ष 2010-11 में पंजाब एंड सिंध बैंक की मेरठ स्थित दीवान पब्लिक स्कूल शाखा में रहते हुए 2,61,58,000 रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है। अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। इसके बाद से लगातार सीबीआई उसकी तलाश में लगी थी। पूनम को हरियाणा के यमुना नगर से गिरफ्तार कर सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया। यहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया गया। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए दो जुलाई की तारीख लगाई है।
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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) सूत्रों का कहना है कि पूनम गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान और नाम बदलकर रह रही थी। अधिक पूछताछ के लिए सीबीआई की टीम कोर्ट से रिमांड मांगेगी। पूछताछ में और अधिक राज खुलकर सामने आएंगे। मामले की जांच में तत्कालीन बैंक के शाखा प्रबंधक देवेंद्र पाल सिंह समेत 50 से अधिक अन्य आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया था। साथ ही बताया कि उनके पास इस केस में पर्याप्त साक्ष्य हैं।
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फर्जी सेल डीड भी की थी तैयार

सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि आरोपियों ने बैंक से अवैध लाभ लेने के उद्देश्य से काल्पनिक व्यक्तियों के नाम पर बचत खाते और ऋण खाते खोले। फर्जी संपत्तियां खरीदने का रिकॉर्ड दर्शाते हुए फर्जी नामों से गृह ऋण के आवेदन किए और बैंक की प्रक्रिया का उल्लंघन कर ऋण स्वीकृत कराए। इसके अलावा फर्जी दस्तावेज और सेल डीड भी तैयार कराए। इसी आधार पर ऋण की धनराशि प्राप्त की गई।


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पूनम के खिलाफ पहले हुई थी कुर्की की कार्रवाई

पूनम के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत ने पहले वारंट फिर गैरजमानती वारंट जारी किए। इसके बाद भी वह अदालत में पेश नहीं हुई तो कुर्की की कार्रवाई की गई और बाद में भगोड़ा घोषित कर दिया। विवेचना में मिले साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता व भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) सहपठित धारा 13 (1) (डी) के तहत आरोप पत्र दाखिल करने के पर्याप्त आधार पाए हैं। मामले में अन्य सह-आरोपियों की भूमिका की भी जांच में पुष्टि होने की बात कही गई है।

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