{"_id":"5c8aa0debdec22140f07567f","slug":"31552589022-ghaziabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रत्याशी को सार्वजनिक करना होगा अपना आपराधिक रिकार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रत्याशी को सार्वजनिक करना होगा अपना आपराधिक रिकार्ड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रत्याशी को सार्वजनिक करना होगा अपना आपराधिक रिकार्ड
गाजियाबाद। चुनाव लड़ने जा रहे प्रत्याशी का आपराधिक रिकार्ड अब मतदान से पहले आम जनता भी जान सकेगी। चुनाव आयोग ने इस बार से नई व्यवस्था की है। नाम वापसी से मतदान के बीच प्रत्याशी को अपनी आपराधिक पृष्ठ भूमि की जानकारी देनी होगी। उसे समाचार पत्र व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके साथ ही अपने परिवार के सभी सदस्यों की पांच वर्ष की आय का विस्तृत ब्योरा भी देना होगा। अगर कोई प्रत्याशी गलत जानकारी देता है या कुछ छिपाता है तो उसका नामांकन पत्र निरस्त करने का अधिकार निर्वाचन अधिकारी को होगा।
नई व्यवस्था के तहत नाम वापसी के बाद और मतदान तिथि से 72 घंटे पूर्व प्रत्याशी को अपना आपराधिक रिकार्ड तीन बार प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। प्र्रकाशन में उसे बताना होगा कि उसके खिलाफ कितने आपराधिक केस विचाराधीन हैं और अगर सजा हुई है तो कितने अवधि की। इसके लिए अलग-अलग प्रारूप के हिसाब से फार्म की व्यवस्था की गई है। प्रारूप-1 उम्मीदवार के लिए रखा गया है। प्रारूप-2 राजनीतिक दलों के लिए होगा और प्रारूप-3 रिटर्निंग ऑफिसर की तरफ से घोषणा के लिए रखा गया है। यानी राजनीतिक दल की भी जिम्मेदारी होगी कि वो मतदान से पहले निर्धारित अवधि तक प्रत्याशी का आपराधिक रिकार्ड सार्वजनिक करें। इस नजरिए से गाजियाबाद समेत पश्चिमी यूपी की आठ लोकसभा सीटों के लिए 11 अप्रैल को मतदान होना है, जिनके प्रत्याशियों को नौ अप्रैल की शाम तक तीन बार प्रकाशित कराना अनिवार्य होगा। उधर, फार्म-26 में भी आयोग की तरफ से संशोधन किया है। अब प्रत्याशी को अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य की आय का बीते पांच वर्ष का ब्योरा भर कर जमा करना होगा। ऐसे परिवार जो विभाजित नहीं है अर्थात संयुक्त परिवार हैं तो उसका सदस्य होने की स्थिति में प्रत्याशी को सभी की आय का ब्योरा फार्म में भरकर जमा करना होगा।
प्रत्याशी को मतदान से पूर्व निर्धारित अवधि तक अपने आपराधिक रिकार्ड का तीन बार प्रकाशन कराना होगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य की पांच वर्ष की आय का ब्योरा भी नामांकन के वक्त देना होगा। अगर कोई प्रत्याशी जानकारी छिपाता है या फिर गलत जानकारी देता है तो उसका नामांकन निरस्त कर दिया जाएगा। - रितु माहेश्वरी, जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
गाजियाबाद। चुनाव लड़ने जा रहे प्रत्याशी का आपराधिक रिकार्ड अब मतदान से पहले आम जनता भी जान सकेगी। चुनाव आयोग ने इस बार से नई व्यवस्था की है। नाम वापसी से मतदान के बीच प्रत्याशी को अपनी आपराधिक पृष्ठ भूमि की जानकारी देनी होगी। उसे समाचार पत्र व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके साथ ही अपने परिवार के सभी सदस्यों की पांच वर्ष की आय का विस्तृत ब्योरा भी देना होगा। अगर कोई प्रत्याशी गलत जानकारी देता है या कुछ छिपाता है तो उसका नामांकन पत्र निरस्त करने का अधिकार निर्वाचन अधिकारी को होगा।
नई व्यवस्था के तहत नाम वापसी के बाद और मतदान तिथि से 72 घंटे पूर्व प्रत्याशी को अपना आपराधिक रिकार्ड तीन बार प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। प्र्रकाशन में उसे बताना होगा कि उसके खिलाफ कितने आपराधिक केस विचाराधीन हैं और अगर सजा हुई है तो कितने अवधि की। इसके लिए अलग-अलग प्रारूप के हिसाब से फार्म की व्यवस्था की गई है। प्रारूप-1 उम्मीदवार के लिए रखा गया है। प्रारूप-2 राजनीतिक दलों के लिए होगा और प्रारूप-3 रिटर्निंग ऑफिसर की तरफ से घोषणा के लिए रखा गया है। यानी राजनीतिक दल की भी जिम्मेदारी होगी कि वो मतदान से पहले निर्धारित अवधि तक प्रत्याशी का आपराधिक रिकार्ड सार्वजनिक करें। इस नजरिए से गाजियाबाद समेत पश्चिमी यूपी की आठ लोकसभा सीटों के लिए 11 अप्रैल को मतदान होना है, जिनके प्रत्याशियों को नौ अप्रैल की शाम तक तीन बार प्रकाशित कराना अनिवार्य होगा। उधर, फार्म-26 में भी आयोग की तरफ से संशोधन किया है। अब प्रत्याशी को अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य की आय का बीते पांच वर्ष का ब्योरा भर कर जमा करना होगा। ऐसे परिवार जो विभाजित नहीं है अर्थात संयुक्त परिवार हैं तो उसका सदस्य होने की स्थिति में प्रत्याशी को सभी की आय का ब्योरा फार्म में भरकर जमा करना होगा।
विज्ञापन
प्रत्याशी को मतदान से पूर्व निर्धारित अवधि तक अपने आपराधिक रिकार्ड का तीन बार प्रकाशन कराना होगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य की पांच वर्ष की आय का ब्योरा भी नामांकन के वक्त देना होगा। अगर कोई प्रत्याशी जानकारी छिपाता है या फिर गलत जानकारी देता है तो उसका नामांकन निरस्त कर दिया जाएगा। - रितु माहेश्वरी, जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी
विज्ञापन