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Ghaziabad News: 10 की जगह 17 साल बीते, पर योजना अधूरी
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गाजियाबाद। एनएच-9 स्थित वेव सिटी की 10 साल में पूरी होने वाली योजना आज 17 साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई और निगम ने हाउस टैक्स भी वसूलना शुरू कर दिया है। जिससे लोग परेशान हैं। उधर, आदित्य वर्ल्ड सिटी एओए इस मुद्दे को कोर्ट ले जाने की तैयारी में हैं।
इस संबंध में शिकायतकर्ता जीवन पंत का कहना है कि वेव सिटी टाउनशिप का काम 2009 में शुरू हुआ। जिसे 10 साल में 2019 तक पूरा किया जाना था लेकिन उसे पूरा नहीं किया गया। जीडीए ने पांच साल और बढ़ाकर 2024 कर दिया। उसके बाद भी यह अधूरा है। 2025 में शासन का एक आदेश आया कि अगर प्रोजेक्ट निर्धारित समय में पूरा न हो तो जीडीए उसे अपने अधिकार क्षेत्र में लेकर विकसित करे और कुछ संपत्तियों को बेचकर निवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए लेकिन हमें न तो आदेश मिला और न ही आगे की कुछ जानकारी दी गई, बल्कि निगम ने हाउस टैक्स वसूलना और शुरू कर दिया।
आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई तो 2025 के शासनादेश का हवाला दिया, जबकि अभी तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है। रेरा की वेबसाइट पर हमारी प्रॉपर्टी का अप्रूवल तक नहीं लगा है। अधिकारी बिल्डर को लाभ पहुचा रहे हैं। अधिकारी बिल्डर की मांग को तो बोर्ड में सूचीबद्ध करते हैं, लेकिन बिल्डर पर की जाने वाली कार्रवाई को इंडेक्स से हटा देते हैं। इस संबंध में उन्होंने जीडीए को पत्र भी लिखा है। 15 अप्रैल 2025 के पत्र के बाद बिल्डर को जीडीए की ओर से जो डेडलाइन देनी चाहिए, वो अभी तक नहीं दी गई। उन्होंने पिछले वर्ष हुए शासनादेश को तुरंत लागू करने की मांग की।
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इस संबंध में शिकायतकर्ता जीवन पंत का कहना है कि वेव सिटी टाउनशिप का काम 2009 में शुरू हुआ। जिसे 10 साल में 2019 तक पूरा किया जाना था लेकिन उसे पूरा नहीं किया गया। जीडीए ने पांच साल और बढ़ाकर 2024 कर दिया। उसके बाद भी यह अधूरा है। 2025 में शासन का एक आदेश आया कि अगर प्रोजेक्ट निर्धारित समय में पूरा न हो तो जीडीए उसे अपने अधिकार क्षेत्र में लेकर विकसित करे और कुछ संपत्तियों को बेचकर निवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए लेकिन हमें न तो आदेश मिला और न ही आगे की कुछ जानकारी दी गई, बल्कि निगम ने हाउस टैक्स वसूलना और शुरू कर दिया।
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आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई तो 2025 के शासनादेश का हवाला दिया, जबकि अभी तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है। रेरा की वेबसाइट पर हमारी प्रॉपर्टी का अप्रूवल तक नहीं लगा है। अधिकारी बिल्डर को लाभ पहुचा रहे हैं। अधिकारी बिल्डर की मांग को तो बोर्ड में सूचीबद्ध करते हैं, लेकिन बिल्डर पर की जाने वाली कार्रवाई को इंडेक्स से हटा देते हैं। इस संबंध में उन्होंने जीडीए को पत्र भी लिखा है। 15 अप्रैल 2025 के पत्र के बाद बिल्डर को जीडीए की ओर से जो डेडलाइन देनी चाहिए, वो अभी तक नहीं दी गई। उन्होंने पिछले वर्ष हुए शासनादेश को तुरंत लागू करने की मांग की।
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