Ghaziabad Nikay Chunav Reservation List: आरक्षण की गुगली से ये 15 पार्षद हुए आउट, जानिए कौन से हैं वो वार्ड
वार्डों के आरक्षण सूची जारी होने के बाद निवर्तमान पार्षद दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं। वार्ड 95 से दो बार पार्षद रहे जाकिर सैफी का कहना है कि वह दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ेगे।
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आरक्षण सूची जारी होने के बाद गाजियाबाद में चुनाव की तैयारी में जुटे कई निवर्तमान पार्षदों के मंसूबों पर पानी फिर गया है। 15 निवर्तमान पार्षद अपने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। नगर निगम के 100 वार्डों में पिछड़ा वर्ग के लिए 14, पिछड़ा वर्ग महिला के लिए 7, अनुसूचित जाति के लिए नौ, अनुसूचित जाति महिला के लिए पांच वार्ड आरक्षित किए गए हैं। वहीं महिला के कोटे में 22 और सामान्य के लिए 43 वार्ड आरक्षित किए गए हैं। प्रस्तावित आरक्षण सूची के बाद दावेदारों के दिल की धड़कनें बढ़ गई हैं।
वार्डों के आरक्षण सूची जारी होने के बाद निवर्तमान पार्षद दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं। वार्ड 95 से दो बार पार्षद रहे जाकिर सैफी का कहना है कि वह दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ेगे। उन्होंने वार्डों की आरक्षण सूची पर सवाल खड़े किए हैं और कहा कि कई पार्षद ऐसे हैं जो चार-पांच बार से लगातार एक ही वार्ड से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके वार्ड का आरक्षण कभी नहीं बदलता है। निवर्तमान पार्षद नरेश जाटव का कहना है कि वह भी अब दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ेंगे।
इन वार्डों का बदला समीकरण 2022-23 2017
वार्ड निवर्तमान पार्षद प्रस्तावित आरक्षण पुराना आरक्षण
01 द्रौपदी देवी ओबीसी महिला एससी महिला
05 चतर सिंह प्रजापति एससी महिला ओबीसी
06 माया देवी ओबीसी एससी महिला
07 नरेश जाटव ओबीसी महिला एससी
16 प्रवीन गुर्जर एससी महिला ओबीसी
17 देवेंद्र भारती ओबीसी एससी
20 विनोद कसाना एससी ओबीसी
21 आनंद गौतम एससी अनारक्षित
22 : रजनीश कुमार एससी अनारक्षित
23 सुरेंद्र सैन एससी अनारक्षित
24 आनंद चौधरी एससी ओबीसी
25 अमित पंथ एससी अनारक्षित
26 सुनील यादव एससी अनारक्षित
50 संजीव त्यागी ओबीसी महिला अनारक्षित
95 : जाकिर सैफी ओबीसी महिला अनारक्षित
गाजियाबाद में मेयर की सीट पर भाजपा का रहा कब्जा
प्रदेश में चाहे जिसकी सरकार रही हो लेकिन गाजियाबाद नगर निगम पर हमेशा भाजपा का कब्जा रहा। मेयर भाजपा का ही रहा। 1995 से चार चुनाव और एक उपचुनाव हुआ। दिसंबर 1995 में पहली बार गाजियाबाद नगर निगम का चुनाव हुआ था। पहली बार मेयर की सीट सामान्य रही। दिनेश चंद्र गर्ग मेयर बने। दूसरी बार 2001 में वह फिर से चुने गए। 2006 में मेयर की सीट महिला कोटे में चली गई। इस बार भाजपा से दमयंती गोयल मेयर की कुर्सी पर काबिज हुईं। 2012 में ओबीसी के खाते में यह सीट गई। तेलूराम कांबोज मेयर बने। 20015 में उनकी मृत्यु के उपरांत 2016 में हुए उपचुनाव में भाजपा से आशु वर्मा ने सपा के सुधन रावत को 45000 वोटों से हराकर मेयर का चुनाव जीत लिया। 2017 में एक बार फिर मेयर का आरक्षण महिला के कोटे में गया। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर आशा शर्मा ने मेयर की कुर्सी हथिया ली। इस बार फिर आरक्षण के चक्रानुक्रम में यह सीट महिला के खाते में गई है।