लीवर को बचाना है तो शराब से नहीं, इससे बचें
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लीवर में खराबी तभी आती है जब अत्यधिक अल्कोहल (शराब) का सेवन किया जाता है। यह राय पूरी तरह से सही नहीं है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे शोध और रूझानों से पता चला है कि लीवर को इस समय सबसे अधिक खतरा मोटापे से है।
इस समय देश में मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है। लोगों को अपने खानपान की आदत को सुधारना होगा। फास्ट फूड और जंक फूड का अधिक सेवन करने से मोटापा बढ़ता है। जो भविष्य में जानलेवा साबित होता है।
मोटापा और लीवर के खतरनाक संबंध पर शुक्रवार को साइबर सिटी में देश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चर्चा की। सभी का मत था कि लीवर सिरोसिस की इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
कर्नाटक के अलामीन मेडिकल कॉलेज के डॉ. हबीबउल्ला का कहना है कि मोटापे के कारण लीवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। यही कारण है कि लोग जानकारी के अभाव में अपनी जान तक गंवा रहे हैं।
देश में बढ़ रहे हैं लीवर सिरोसिस के केस
डॉ. हबीबउल्ला ने बताया कि एपिकॉन-2015 में नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (एनएएफएलडी) को लेकर काफी चिंता देखी गई।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रॉनिक लीवर डिजीज और मोटापे के बीच को उजागर करना बड़ी उपलब्धि है। क्रॉनिक लीवर डीजीज के तीन स्टेज हैं। पहला लीवर में फैट का जमा हो जाना।
दूसरा लीवर में जलन होना (लीवर इन फ्लेमेशन) और तीसरा स्टेज सिरोसिस (फाइब्रोसिस) होता है। पहले दो स्टेज में लीवर का इलाज दवाओं के माध्यम से हो जाता है। मगर तीसरे स्टेज में लीवर को ट्रांसप्लांट कराना पड़ता है।