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किसान संगठनों की सरकार को दो टूक, कृषि कानूनों को वापस लेने के तरीके पर होगी वार्ता
Wed, 30 Dec 2020 12:19 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 30 Dec 2020 12:19 AM IST
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किसानों का आंदोलन
- फोटो : पीटीआई
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केंद्र सरकार के साथ वार्ता की टेबल पर जाने के एक दिन पहले किसान संगठनों से स्पष्ट किया है कि बुधवार की बातचीत तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के तरीके पर होगी। बिना इसकी प्रक्रिया तय हुए किसी दूसरे मुद्दे पर किसान प्रतिनिधि चर्चा नहीं करेंगे।
मोर्चा ने मंगलवार को अपना प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। इसमें उन्हीं मसलों का जिक्र है, जिनका प्रस्ताव किसान संगठनों ने पहले भी केंद्र सरकार को दिया था।
केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल की तरफ से सोमवार को भेजे गए पत्र के जवाब में संयुक्त किसान मोर्चा ने लिखा है कि वह आज दोपहर बाद दो बजे सरकार के वार्ता का प्रस्ताव स्वीकार कर रहे हैं।
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साथ ही याद भी दिलाया है कि जिन मसलों पर चर्चा करने प्रस्ताव उन्होंने अपने पिछले पत्र में किया था, उन्हीं पर बातचीत आगे बढ़ेगी। इसमें तीनों कृषि कानूनों का रद्द करने का तरीका, एमएसपी की कानूनी गारंटी, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अध्यादेश में संशोधन व विद्युत संशोधन विधेयक की वापसी शामिल हैं। मोर्चा का मानना है कि प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान के लिए जरूरी होगा कि वार्ता इसी एजेंडा के अनुसार चले।
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मोर्चा ने मंगलवार को अपना प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। इसमें उन्हीं मसलों का जिक्र है, जिनका प्रस्ताव किसान संगठनों ने पहले भी केंद्र सरकार को दिया था।
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केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल की तरफ से सोमवार को भेजे गए पत्र के जवाब में संयुक्त किसान मोर्चा ने लिखा है कि वह आज दोपहर बाद दो बजे सरकार के वार्ता का प्रस्ताव स्वीकार कर रहे हैं।
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साथ ही याद भी दिलाया है कि जिन मसलों पर चर्चा करने प्रस्ताव उन्होंने अपने पिछले पत्र में किया था, उन्हीं पर बातचीत आगे बढ़ेगी। इसमें तीनों कृषि कानूनों का रद्द करने का तरीका, एमएसपी की कानूनी गारंटी, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अध्यादेश में संशोधन व विद्युत संशोधन विधेयक की वापसी शामिल हैं। मोर्चा का मानना है कि प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान के लिए जरूरी होगा कि वार्ता इसी एजेंडा के अनुसार चले।
गौरतलब है कि सोमवार को केंद्रीय सचिव ने किसान संगठनों को पत्र भेजकर वार्ता की तारीख 30 दिसंबर दोपहर बाद दो बजे तय करने का कहा था। साथ ही लिखा था कि बातचीत तीनों कृषि कानूनों, एमएसपी, वायु गुणवत्ता प्रबंधन अध्यादेश व विद्युत संशोधन विधेयक पर होगी।
किसान संगठनों का मानना है कि सरकार अपना एजेंडा अस्पष्ट रखकर एक बार फिर बातचीत को अधर में लटकाए रखना चाहती है। किसान संगठन कृषि कानून पर नहीं, इसको वापस लेने की तरीके पर वार्ता करना चाहते हैं। केंद्र सरकार के दूसरे एजेंडे भी इसी तरह अस्पष्ट हैं। जबकि किसान संगठन अपने एजेंडे पर टिके हुए हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा के प्रस्ताव का चार एजेंडा, जिस पर बातचीत करने का प्रस्ताव
तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द/निरस्त करने के लिए अपनाए जाने वाली क्रियाविधि।
सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, 2020 में ऐसे संशोधन जो अध्यादेश के दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हैं।
किसानों के हितों की रक्षा के लिए विद्युत संशोधन विधेयक 2020 के मसौदे को वापस लेने की प्रक्रिया।
किसान संगठनों का मानना है कि सरकार अपना एजेंडा अस्पष्ट रखकर एक बार फिर बातचीत को अधर में लटकाए रखना चाहती है। किसान संगठन कृषि कानून पर नहीं, इसको वापस लेने की तरीके पर वार्ता करना चाहते हैं। केंद्र सरकार के दूसरे एजेंडे भी इसी तरह अस्पष्ट हैं। जबकि किसान संगठन अपने एजेंडे पर टिके हुए हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा के प्रस्ताव का चार एजेंडा, जिस पर बातचीत करने का प्रस्ताव
तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द/निरस्त करने के लिए अपनाए जाने वाली क्रियाविधि।
सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, 2020 में ऐसे संशोधन जो अध्यादेश के दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हैं।
किसानों के हितों की रक्षा के लिए विद्युत संशोधन विधेयक 2020 के मसौदे को वापस लेने की प्रक्रिया।