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Faridabad News: साक्षी के फैसले से युवा पहलवान चिंतित
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फरीदाबाद। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता महिला पहलवान साक्षी मलिक के कुश्ती से सन्यास लेने के फैसले से युवा पहलवान चिंतित हैं। जिले के पहलवानों ने साक्षी मलिक के फैसले को गलत बताया है। उनका कहना है कि अखाड़े में रहते हुए लड़ाई जारी रखनी चाहिए थी। अंतरराष्ट्रीय कोच का कहना है कि फेडरेशन में एक महिला सदस्य होनी चाहिए थी। महिला अध्यक्ष होगी तो शोषण का मामला नहीं होगा। पहले भी महिलाओं की फेडरेशन में भागीदारी नहीं थी और अब भी नहीं मिली है। सरकार ने जो वादा किया था वह पूरा नहीं हुआ, यह सही नहीं है।
खिलाड़ियों का कहना है कि बजरंग पुनिया ने भी अपना अवार्ड वापस कर दिया है। खिलाड़ियों को सबसे पहले खेल पर ध्यान देना चाहिए। कई बार राजनीति में पड़कर खिलाड़ियों का भविष्य भी खराब हो जाता है। ऐसे में किसी संगठनों या राजनीतिक दलों के उकसावे में भी नहीं आना चाहिए।
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खेल को नहीं छोड़ना चाहिए था, अगर खेल के साथ लड़ाई लड़ती तो वह अपनी बात को ज्यादा मजबूती के साथ रख सकती थी। खेल छोड़ने के बाद लोग धीरे-धीरे भूल जाएंगे। जिससे वह कमजोर हो सकती है।
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मानसी भड़ाना, अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान
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उनके इस फैसले से खिलाड़ी उदास हैं। उन्हें इस प्रकार का फैसला नहीं लेना चाहिए था। खिलाड़ी की पहचान उसका प्रदर्शन है। खेल से सन्यास लेने के बाद वह मैदान से बाहर हो जाएगी। मेरी समझ में यह उचित फैसला नहीं है।
अकांक्षा, राष्ट्रीय महिला पहलवान
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रेसलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष के खिलाफ लड़ाई शुुरू करने के लिए उन्होंने काफी हिम्मत जुटाई थी। लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद उन्हें निराशा हाथ लगी। सरकार को इस संबंध में कुछ विचार करना चाहिए।
स्नेहा दहिया, राष्ट्रीय महिला पहलवान
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फेडरेशन में एक ऐसे खिलाड़ी को शामिल करना जरूरी है, जिसे उस खेल के संबंध में जानकारी हो। जिससे बेहतरीन खिलाड़ी को सामने लाया जा सके। जो देश के लिए पदक दिलाने के लिए अपनी जान लगा दे।
तीरंदाज साहिल
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खिलाड़ियों का कहना है कि बजरंग पुनिया ने भी अपना अवार्ड वापस कर दिया है। खिलाड़ियों को सबसे पहले खेल पर ध्यान देना चाहिए। कई बार राजनीति में पड़कर खिलाड़ियों का भविष्य भी खराब हो जाता है। ऐसे में किसी संगठनों या राजनीतिक दलों के उकसावे में भी नहीं आना चाहिए।
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खेल को नहीं छोड़ना चाहिए था, अगर खेल के साथ लड़ाई लड़ती तो वह अपनी बात को ज्यादा मजबूती के साथ रख सकती थी। खेल छोड़ने के बाद लोग धीरे-धीरे भूल जाएंगे। जिससे वह कमजोर हो सकती है।
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मानसी भड़ाना, अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान
उनके इस फैसले से खिलाड़ी उदास हैं। उन्हें इस प्रकार का फैसला नहीं लेना चाहिए था। खिलाड़ी की पहचान उसका प्रदर्शन है। खेल से सन्यास लेने के बाद वह मैदान से बाहर हो जाएगी। मेरी समझ में यह उचित फैसला नहीं है।
अकांक्षा, राष्ट्रीय महिला पहलवान
रेसलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष के खिलाफ लड़ाई शुुरू करने के लिए उन्होंने काफी हिम्मत जुटाई थी। लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद उन्हें निराशा हाथ लगी। सरकार को इस संबंध में कुछ विचार करना चाहिए।
स्नेहा दहिया, राष्ट्रीय महिला पहलवान
फेडरेशन में एक ऐसे खिलाड़ी को शामिल करना जरूरी है, जिसे उस खेल के संबंध में जानकारी हो। जिससे बेहतरीन खिलाड़ी को सामने लाया जा सके। जो देश के लिए पदक दिलाने के लिए अपनी जान लगा दे।
तीरंदाज साहिल