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बीमारी के साथ भी जी सकते हैं खुशहाल जिंदगी

Wed, 10 Mar 2021 11:08 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 10 Mar 2021 11:08 PM IST
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You can live a happy life even with illness
फरीदाबाद। बदलती जीवनशैली से दूसरी बीमारियों के साथ-साथ किडनी खराब होने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। एक बार किडनी की बीमारी हो गई तो ज्यादातर लोग जिंदगी से हताश हो जाते हैं, जबकि सच यह है कि अगर सही से इलाज कराया जाए और पूरी सावधानियां बरती जाएं तो किडनी खराब होने के बाद भी मरीज लंबी जिंदगी जी सकता है।
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विश्व किडनी दिवस पर यह जानकारी शहर के डॉक्टरों ने दी। शहर में आठ बड़े अस्पताल हैं। यहां किडनी विभाग की ओपीडी में सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ लगी रहती है। रोजाना करीब एक हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। कोरोना काल में किडनी रोगियों की संख्या पांच से सात फीसदी और बढ़ गई है। डॉक्टरों ने इसकी वजह समय पर बीमारी का इलाज न करवाना बताया है। वहीं इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व किडनी दिवस की थीम किडनी डिजीज के हम अच्छे ढंग से कैसे जी सकते हैं रखा है। हालांकि किडनी रोग विशेषज्ञों का कहना है कि डब्ल्यूएचओ ने इस थीम को इस बार रखा है जबकि वह तो लंबे समय से इसी थीम पर मरीजों का इलाज करते आ रहे हैं।
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लंबे समय तक चलने वाली बीमारी
सेक्टर-16ए स्थित मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र ने बताया कि अस्पताल में रोजाना करीब किडनी रोग से संबधित 70 मरीज इलाज के लिए आते हैं। यह एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है। किडनी की बीमारी से ज्यादा उसका डर लोगों को ज्यादा परेशान करता है। किडनी रोग के दौरान यह भी संभव है कि परहेज करते हुए स्वादिष्ट और पौष्टिक खाना खाकर स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।
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तनाव से बचें
एनआईटी तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. असीम दास ने कहा कि मरीज मानसिक तनाव का शिकार हो जाता है। ऐसे में वह अपने खान-पान की ओर भी ध्यान नहीं दे पाता। साथ ही उसके परिजन भी इस समस्या के शिकार हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को खान-पान, दवाओं और डायलिसिस की ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। तनाव से बचने का प्रयास करना चाहिए।

इनसे लें प्रेरणा
सेक्टर-91 निवासी 37 वर्षीय ज्योति ने बताया कि वर्ष 2016 में बेटा होने पर किडनी की समस्या का पता चला था। पति विकास ने बताया उनकी किडनी फेल हो गई। ये सुन कर मैं बहुत परेशान हो गई। एक महीने अस्पताल में रही। काफी समय आईसीयू में रही। ठीक होने के बाद डायलिसिस पर जाने लगी। मानसिक तनाव बढ़ गया था। पति और परिवार वालों ने मुझे संभाला। डॉक्टर जितेंद्र के संपर्क में आई तो उन्होंने काफी हौसला बढ़ाया। मुझे साढ़े चार साल हो गए। अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। घर के सभी काम करती हूं। सुबह बच्चों को स्कूल छोड़कर आती हूं। पति के लिए खाना बनाती हूं। इसके बाद अकेली अपनी डायलिसिस के लिए अस्पताल जाती हूं। किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों को यही कहना चाहूंगी कि हौसलों को अपनी ताकत बनाओ और एक फाइटर की तरह बीमारी से लड़कर आगे बढ़ो।
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