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Faridabad News: सेक्टर-78 में वर्किंग वुमन हॉस्टल का काम शुरू, केंद्र सरकार से मिली राशि
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23 करोड़ की लागत से बन रहा प्रोजेक्ट, डे-केयर सुविधा से हजारों कामकाजी महिलाओं को मिलेगा सुरक्षित ठिकाना
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और सस्ती आवासीय सुविधा का सपना अब हकीकत में बदलने लगा है। सेक्टर-78 में प्रस्तावित 500 क्षमता वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। केंद्र सरकार से 23 करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अमलीजामा पहना रहा है। विभाग ने निर्माण एजेंसियों को समयबद्ध ढंग से काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
फरीदाबाद हरियाणा का प्रमुख औद्योगिक जिला है। यहां एनआईटी, बाटा चौक, ओल्ड फरीदाबाद, सेक्टर-24, 25, 58 और 59 समेत विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में हजारों महिलाएं निजी कंपनियों, बीपीओ, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में कार्यरत हैं। आईएमटी क्षेत्र और उभरते आईटी सेक्टर के कारण पलवल, बल्लभगढ़, गुरुग्राम, मेवात और दिल्ली-एनसीआर से भी युवतियां यहां रोजगार के लिए आ रही हैं। ऐसे में सुरक्षित और नियंत्रित आवास की मांग लगातार बढ़ रही थी।
निजी पीजी के महंगे किराये से मिलेगी राहत
मौजूदा समय में अधिकतर कामकाजी महिलाएं निजी पीजी या किराये के मकानों में रह रही हैं, जहां 8 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह तक खर्च करना पड़ता है। इसके बावजूद सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रस्तावित हॉस्टल में किराया निजी आवास की तुलना में लगभग आधा रखने की योजना है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग की महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। शुरुआती वेतन पर नौकरी करने वाली युवतियों के लिए यह बड़ी राहत मानी जा रही है।
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245 कमरे, 500 महिलाओं के रहने की व्यवस्था
यह हॉस्टल करीब 1.076 एकड़ भूखंड पर बन रहा है। इसमें 245 कमरे तैयार किए जा रहे हैं और लगभग 500 महिलाओं को आवास उपलब्ध होगा। भवन में सामुदायिक रसोई, भोजन कक्ष, कॉमन रूम, अध्ययन कक्ष, लाइब्रेरी और फिटनेस सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। परिसर में हरियाली और खुला स्थान भी रखा जा रहा है ताकि रहने वाली महिलाओं को संतुलित और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
कामकाजी माताओं के लिए क्रेच की सुविधा
परियोजना की खास बात यह है कि परिसर में डे-केयर सेंटर (क्रेच) भी स्थापित किया जाएगा। शहर में कामकाजी महिलाओं के लिए विश्वसनीय डे-केयर सुविधा की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है। कई महिलाएं बच्चों की देखभाल के अभाव में नौकरी छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। प्रस्तावित क्रैच में प्रशिक्षित स्टाफ तैनात रहेगा, जिससे एकल माताओं और छोटे बच्चों वाली महिलाओं को विशेष सहारा मिलेगा।
सुरक्षा व्यवस्था होगी सख्त
हॉस्टल परिसर में सीसीटीवी कैमरे, बॉयोमेट्रिक एंट्री सिस्टम और 24 घंटे सुरक्षा गार्ड की तैनाती की जाएगी। सेक्टर-78 दिल्ली-मथुरा रोड और बाईपास से जुड़ा हुआ तेजी से विकसित क्षेत्र है। यहां सरकारी स्तर पर सुरक्षित आवास विकसित होने से आसपास के इलाके में भी सुरक्षा और आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
महिला सशक्तीकरण की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध होने से महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी और बढ़ेगी। फरीदाबाद जैसे औद्योगिक शहर में जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं दूसरे जिलों से आवागमन करती हैं उनके लिए स्थायी आवास सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद जरूरी है।
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केंद्र सरकार की यह योजना महिलाओं के लिए काफी अच्छी है। बस इसे जल्द से जल्द पूरा कर दिया जाना चाहिए ताकि लाभ मिलना शुरू हो जाए। -आरती शर्मा
इस कार्य से पैसे की बचत होने के साथ सुरक्षा भी मिलेगी। सरकार को इसे प्राथमिकता पर रखते हुए पूरा करना चाहिए। ताकि बाहर से आने वाले लोगों को राहत मिले। -अंकुर श्रीवास्तव
निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि तय समयसीमा में परियोजना पूरी कर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत आवंटन किया जाए। -संदीप दहिया, एसई एचएसवीपी
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और सस्ती आवासीय सुविधा का सपना अब हकीकत में बदलने लगा है। सेक्टर-78 में प्रस्तावित 500 क्षमता वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। केंद्र सरकार से 23 करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अमलीजामा पहना रहा है। विभाग ने निर्माण एजेंसियों को समयबद्ध ढंग से काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
फरीदाबाद हरियाणा का प्रमुख औद्योगिक जिला है। यहां एनआईटी, बाटा चौक, ओल्ड फरीदाबाद, सेक्टर-24, 25, 58 और 59 समेत विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में हजारों महिलाएं निजी कंपनियों, बीपीओ, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में कार्यरत हैं। आईएमटी क्षेत्र और उभरते आईटी सेक्टर के कारण पलवल, बल्लभगढ़, गुरुग्राम, मेवात और दिल्ली-एनसीआर से भी युवतियां यहां रोजगार के लिए आ रही हैं। ऐसे में सुरक्षित और नियंत्रित आवास की मांग लगातार बढ़ रही थी।
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निजी पीजी के महंगे किराये से मिलेगी राहत
मौजूदा समय में अधिकतर कामकाजी महिलाएं निजी पीजी या किराये के मकानों में रह रही हैं, जहां 8 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह तक खर्च करना पड़ता है। इसके बावजूद सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रस्तावित हॉस्टल में किराया निजी आवास की तुलना में लगभग आधा रखने की योजना है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग की महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। शुरुआती वेतन पर नौकरी करने वाली युवतियों के लिए यह बड़ी राहत मानी जा रही है।
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245 कमरे, 500 महिलाओं के रहने की व्यवस्था
यह हॉस्टल करीब 1.076 एकड़ भूखंड पर बन रहा है। इसमें 245 कमरे तैयार किए जा रहे हैं और लगभग 500 महिलाओं को आवास उपलब्ध होगा। भवन में सामुदायिक रसोई, भोजन कक्ष, कॉमन रूम, अध्ययन कक्ष, लाइब्रेरी और फिटनेस सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। परिसर में हरियाली और खुला स्थान भी रखा जा रहा है ताकि रहने वाली महिलाओं को संतुलित और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
कामकाजी माताओं के लिए क्रेच की सुविधा
परियोजना की खास बात यह है कि परिसर में डे-केयर सेंटर (क्रेच) भी स्थापित किया जाएगा। शहर में कामकाजी महिलाओं के लिए विश्वसनीय डे-केयर सुविधा की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है। कई महिलाएं बच्चों की देखभाल के अभाव में नौकरी छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। प्रस्तावित क्रैच में प्रशिक्षित स्टाफ तैनात रहेगा, जिससे एकल माताओं और छोटे बच्चों वाली महिलाओं को विशेष सहारा मिलेगा।
सुरक्षा व्यवस्था होगी सख्त
हॉस्टल परिसर में सीसीटीवी कैमरे, बॉयोमेट्रिक एंट्री सिस्टम और 24 घंटे सुरक्षा गार्ड की तैनाती की जाएगी। सेक्टर-78 दिल्ली-मथुरा रोड और बाईपास से जुड़ा हुआ तेजी से विकसित क्षेत्र है। यहां सरकारी स्तर पर सुरक्षित आवास विकसित होने से आसपास के इलाके में भी सुरक्षा और आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
महिला सशक्तीकरण की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध होने से महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी और बढ़ेगी। फरीदाबाद जैसे औद्योगिक शहर में जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं दूसरे जिलों से आवागमन करती हैं उनके लिए स्थायी आवास सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद जरूरी है।
केंद्र सरकार की यह योजना महिलाओं के लिए काफी अच्छी है। बस इसे जल्द से जल्द पूरा कर दिया जाना चाहिए ताकि लाभ मिलना शुरू हो जाए। -आरती शर्मा
इस कार्य से पैसे की बचत होने के साथ सुरक्षा भी मिलेगी। सरकार को इसे प्राथमिकता पर रखते हुए पूरा करना चाहिए। ताकि बाहर से आने वाले लोगों को राहत मिले। -अंकुर श्रीवास्तव
निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि तय समयसीमा में परियोजना पूरी कर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत आवंटन किया जाए। -संदीप दहिया, एसई एचएसवीपी