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हौसलों से उड़ान भरकर संघर्ष गाथा लिखने वाली महिलाएं सम्मानित
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फरीदाबाद। लिंग्याज विद्यापीठ में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इस दौरान संस्थान के चेयरमैन डा. पिचेश्वर गड्डे ने कहा कि महिला दिवस पर उन नारियों का सम्मान किया गया है जिन्होंने कर्मक्षेत्र में उतरकर संघर्षों से मुकाम हासिल किया है।
चेयरमैन डा. पिचेश्वर गड्डे, वाइस चांसलर डॉ. अरविंद अग्रवाल, प्रो वाइस चांसलर प्रो. जसकिरण कौर, प्रो वाइस चांसलर आरएनडी डॉ. जीएमपाटिल व रजिस्ट्रार प्रेम कुमार सालवान ने समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद जिन हस्तियों को सम्मानित किया गया उनमें क्लीनिकल मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम पूनिया, असिस्टेंट कमांडेंट व भारतीय तैराक ऋचा मिश्रा, मिस एशिया पैसिफिक 2014 रितिका विनय, मिस दिल्ली विनर हरलीन विनय, एसिड अटैक सर्वाइवर रूकैया और मधु शामिल रही। इस दौरान मौजूद महिलाओं ने संघर्षों से अवगत कराया। महिलाओं ने कहा कि कभी हार न मानें।
इस दौरान रूकैया और मधु ने अपने जीवन के संघर्ष पलों पर बात की। रूकैया ने कहां कि किसी को मौत के घाट उतार देने से उसकी पूरी जिंदगी खत्म की जा सकती है। वहीं, उसके हाथ- पांव काट देने से उसे अपंग किया जा सकता है। तेजाब अटैक से पीड़ित व्यक्ति न मर पाता है न जी पाता है। प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर जसकिरण कौर ने कहा कि समय के साथ-साथ हमें अपनी सोच को बदलने की जरूरत है। महिलाओं के प्रति सम्मान और आदर का भाव रखें। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने अतिथियों से कुछ प्रश्न पूछे। जिनका अतिथियों ने जवाब दिया। मंच संचालन स्कूल ऑफ लॉ डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर शिल्पा शर्मा ने किया। इस दौरान अब पूर्वाग्रह नहीं थीम पर पोस्टर मेकिंग, संघर्षों का सम्मान थीम पर निबंध लेखन प्रतियोगिता, नारीत्व का जश्न मनाएं थीम पर लेखन प्रतियोगिता के सभी विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
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चेयरमैन डा. पिचेश्वर गड्डे, वाइस चांसलर डॉ. अरविंद अग्रवाल, प्रो वाइस चांसलर प्रो. जसकिरण कौर, प्रो वाइस चांसलर आरएनडी डॉ. जीएमपाटिल व रजिस्ट्रार प्रेम कुमार सालवान ने समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद जिन हस्तियों को सम्मानित किया गया उनमें क्लीनिकल मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम पूनिया, असिस्टेंट कमांडेंट व भारतीय तैराक ऋचा मिश्रा, मिस एशिया पैसिफिक 2014 रितिका विनय, मिस दिल्ली विनर हरलीन विनय, एसिड अटैक सर्वाइवर रूकैया और मधु शामिल रही। इस दौरान मौजूद महिलाओं ने संघर्षों से अवगत कराया। महिलाओं ने कहा कि कभी हार न मानें।
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इस दौरान रूकैया और मधु ने अपने जीवन के संघर्ष पलों पर बात की। रूकैया ने कहां कि किसी को मौत के घाट उतार देने से उसकी पूरी जिंदगी खत्म की जा सकती है। वहीं, उसके हाथ- पांव काट देने से उसे अपंग किया जा सकता है। तेजाब अटैक से पीड़ित व्यक्ति न मर पाता है न जी पाता है। प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर जसकिरण कौर ने कहा कि समय के साथ-साथ हमें अपनी सोच को बदलने की जरूरत है। महिलाओं के प्रति सम्मान और आदर का भाव रखें। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने अतिथियों से कुछ प्रश्न पूछे। जिनका अतिथियों ने जवाब दिया। मंच संचालन स्कूल ऑफ लॉ डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर शिल्पा शर्मा ने किया। इस दौरान अब पूर्वाग्रह नहीं थीम पर पोस्टर मेकिंग, संघर्षों का सम्मान थीम पर निबंध लेखन प्रतियोगिता, नारीत्व का जश्न मनाएं थीम पर लेखन प्रतियोगिता के सभी विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
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