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Faridabad News: मामुली बरसात में ही जलमग्न हुआ होडल, करोड़ों की निकासी योजनाओं पर उठे सवाल
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–– सब्जी मंडी और अग्रसेन चौक बने तालाब, अधिकारी सिर्फ कागज़ी दावे करते नज़र आए
संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। शहर में शुक्रवार सुबह हुई मामुली बरसात ने ही नगर परिषद की तैयारियों की पोल खोल दी। कुछ ही देर की बारिश में सब्जी मंडी, अग्रसेन चौक और नानक डेरी रोड ने तालाब का रूप धारण कर लिया। बरसात का पानी सड़कों पर भर जाने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पानी निकासी के नाम पर हर साल खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये पूरी तरह व्यर्थ साबित हो रहे हैं। अनाज मंडी और सब्जी मंडी से पानी निकालने के लिए विभाग ने डीजल इंजन लगाए, लेकिन जाम पड़ी नालियों और सीवरेज लाइनों के कारण ये इंजन भी बेकार साबित हुए। बरसात के बाद नगर परिषद के अधिकारी-कर्मचारी सड़क पर उतरे और जेसीबी मशीन से नालियां खुलवाईं, लेकिन पानी की निकासी नहीं हो सकी।
लोगों ने आरोप लगाया कि निकासी व ड्रेनों की सफाई के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं। बता दें कि समस्या गंभीर होने पर स्थानीय विधायक हरिंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर मुद्दा उठाया था। इस पर मुख्यमंत्री नायाब सैनी ने विधायक संग बैठक की और उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने मौके पर निरीक्षण कर अधिकारियों को फटकार भी लगाई थी। नगर परिषद एसडीओ डी.के. सोलंकी ने कहा कि परिषद के पास सीमित सफाई कर्मचारी हैं। नालियों की सफाई जेसीबी से कराई जा रही है और जहां स्लैब बाधा बने हुए हैं, उन्हें हटवाने की कार्रवाई की जा रही है।
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होडल। शहर में शुक्रवार सुबह हुई मामुली बरसात ने ही नगर परिषद की तैयारियों की पोल खोल दी। कुछ ही देर की बारिश में सब्जी मंडी, अग्रसेन चौक और नानक डेरी रोड ने तालाब का रूप धारण कर लिया। बरसात का पानी सड़कों पर भर जाने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पानी निकासी के नाम पर हर साल खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये पूरी तरह व्यर्थ साबित हो रहे हैं। अनाज मंडी और सब्जी मंडी से पानी निकालने के लिए विभाग ने डीजल इंजन लगाए, लेकिन जाम पड़ी नालियों और सीवरेज लाइनों के कारण ये इंजन भी बेकार साबित हुए। बरसात के बाद नगर परिषद के अधिकारी-कर्मचारी सड़क पर उतरे और जेसीबी मशीन से नालियां खुलवाईं, लेकिन पानी की निकासी नहीं हो सकी।
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लोगों ने आरोप लगाया कि निकासी व ड्रेनों की सफाई के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं। बता दें कि समस्या गंभीर होने पर स्थानीय विधायक हरिंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर मुद्दा उठाया था। इस पर मुख्यमंत्री नायाब सैनी ने विधायक संग बैठक की और उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने मौके पर निरीक्षण कर अधिकारियों को फटकार भी लगाई थी। नगर परिषद एसडीओ डी.के. सोलंकी ने कहा कि परिषद के पास सीमित सफाई कर्मचारी हैं। नालियों की सफाई जेसीबी से कराई जा रही है और जहां स्लैब बाधा बने हुए हैं, उन्हें हटवाने की कार्रवाई की जा रही है।
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