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मेरी राखी आज ही बांध दो, त्योहार तो सरहद पर मनाना है
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फरीदाबाद। देश की रक्षा के लिए जान दे चुके मनोज (26) ने जान न्योझावर करने से कुछ घंटे पहले अपने पिता बाबूलाल से फोन पर बात की थी। मनोज ने कहा त्योहार खुशियों से मनाना। पत्नी कोमल के बारे में बात करते हुए कहा कि आठ माह की गर्भवती है। उसे उसके घर ले जाना भाईयों के साथ त्योहार मना के आएगी। हालचाल पूछने पर कहा मैं ठीक हूं, अपना ख्याल रखना। पिता बाबूबाल को क्या पता था ये उनकी और बेटे की आखिरी बातचीत थी। घर में सबसे छोटी और तीन भाईयों की इकलौती बहन का रो रोकर बुरा हाल है। रुंधे गले से आशा ने बताया कि मनोज 22 तारीख को अपनी छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर गया था। मनोज करीब डेढ माह की छुट्टियों पर गांव आया था। गांव से जाते समय मनोज ने कहा मेरी राखी आज ही बांध दो। त्योहार तो सरहद पर मनाना है। बृहस्पतिवार को घर आई आशा इससे पहले कि भाई को राखी बांध पाती दूसरे भाई की मौत की खबर से वह बेहोश हो गई। मनोज अपने पीछे एक छोटे और अधूरे परिवार को भी छोडृ गया है। 14 नवम्बर साल 2021 को मनोज का विवाह गांव सीकरी की कोमल के साथ हुआ था। कोमल फिलहाल करीब आठ माह की गर्भवती है।
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छोटा सा गांव और देश की सेवा में तैनात हैं 45 जवान
मनोज के गांव शाहजहांपुर की बात करें तो यह जिले का आखिरी गांव है। इसके बाद यमुना है और दूसरी तरफ यूपी। छोटे से इस गांव कि खासियत ये है कि करीब 45 युवक देश के अलग अलग हिस्सों में देश की सेवा कर रहे हैं। सेना में भर्ती होने की ललक इस बात से ही पता लगती है कि गांव के लगभग सभी युवा सुबह दौड़ लगाकर सेना की तैयारी करते देखे जा सकते हैं। मनोज का बडा भाई सुनील कुमार भी सेना में है, जो फिलहाल जालंधर में नायक के रूप में तैनात है। मनोज के गांव में कई घरों से शहीद भी हुए हैं और सेवा निर्वित भी हैं। जवान बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद भी पिता बाबूलाल ने कहा देश पर शहीद हुआ है। गर्व है अपने बेटे पर। गांव के ज्यादातर घरों में चूल्हा नहीं जला है। ग्रामीण मनोज के पार्थिव शरीर के आने का इतजार कर रहे हैं।
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छोटा सा गांव और देश की सेवा में तैनात हैं 45 जवान
मनोज के गांव शाहजहांपुर की बात करें तो यह जिले का आखिरी गांव है। इसके बाद यमुना है और दूसरी तरफ यूपी। छोटे से इस गांव कि खासियत ये है कि करीब 45 युवक देश के अलग अलग हिस्सों में देश की सेवा कर रहे हैं। सेना में भर्ती होने की ललक इस बात से ही पता लगती है कि गांव के लगभग सभी युवा सुबह दौड़ लगाकर सेना की तैयारी करते देखे जा सकते हैं। मनोज का बडा भाई सुनील कुमार भी सेना में है, जो फिलहाल जालंधर में नायक के रूप में तैनात है। मनोज के गांव में कई घरों से शहीद भी हुए हैं और सेवा निर्वित भी हैं। जवान बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद भी पिता बाबूलाल ने कहा देश पर शहीद हुआ है। गर्व है अपने बेटे पर। गांव के ज्यादातर घरों में चूल्हा नहीं जला है। ग्रामीण मनोज के पार्थिव शरीर के आने का इतजार कर रहे हैं।
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