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Faridabad News: लंबी लाइनों में बारी का इंतजार करती तीन महिलाएं बेहोश
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अव्यवस्था का आलम : नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने से चरमराई व्यवस्था, नहीं मिली दवा, स्ट्रेचर और बेड
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दो दिन के अवकाश के बाद जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। पंजीकरण से लेकर ओपीडी के बाहर मरीज लंबी लाइन में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। अस्पताल में अव्यवस्था का ऐसा आलम है कि मरीजों को सुविधाओं के नाम पर सिर्फ कुछ नहीं मिल रहा है। अस्पताल की ओपीडी में एसी, पंखे केवल नाम के लिए लगे हुए हैं। ऐसे में भीषण गर्मी और उमस के कारण अस्पताल में तीन महिलाएं बेहोश हो गईं। परिजनों और नर्सिंग स्टाफ के सहयोग से महिलाओं को प्राथमिक उपचार दिया गया।
जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं की कमी का खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में तेज बुखार, पेट दर्द, गले में संक्रमण, आंखों में जलन और डायरिया के मरीज भी बढ़ रहे हैं। शनिवार और रविवार को अवकाश के बाद जिला अस्पताल में मरीजों का सैलाब आ गया। साधारण दिनों में जहां 1500 से 1800 मरीज पहुंचते हैं सोमवार को करीब 2500 मरीजों के पहुंचने से अस्पताल में व्यवस्था चरमरा गई।
हाल यह हुआ कि ओपीडी, दवा काउंटर और पंजीकरण केंद्र पर लोगों के लिए बैठने की भी जगह नहीं थी। इलाज के लिए लोग अपनी बारी का इंतजार करते रहे। वहीं, दवाइयां नहीं मिलने पर मरीज भड़क गए और हंगामा करने लगे। लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक पिछले करीब एक महीने से अस्पताल में 100 से ज्यादा दवाइयों का स्टॉक खत्म हो चुका है। काफी जद्दोजहद के बाद भी लोगों को सभी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। इसके अलावा मरीजों ने कर्मचारियों पर 50-100 रुपये लेकर ओपीडी कार्ड बनाने का आरोप लगाया। इस बात में कितनी सच्चाई है यह जांच के बाद ही साबित हो सकेगा।
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अस्पताल के इंतजाम नाकाफी
अस्पताल की ओपीडी में लगे एसी लंबे समय से खराब हैं। हाल ही में कुछ नए पंखे लगाए गए लेकिन भीषण गर्मी में यह इंतजाम नाकाफी साबित हो रहा है। ओपीडी में इलाज के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रही एक महिला बेहोश हो गई। नर्सिंग स्टाफ ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया। इसके अलावा ओपीडी के बाहर पंजीकरण केंद्र पर लाइन में कार्ड बनवाने के लिए खड़ी लड़की बेहोश हो गई। वहीं, आपातकालीन कक्ष के बाहर एक अन्य महिला गर्मी की वजह से बेहोश हो गई। अस्पताल की अव्यवस्था के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी हो रही है।
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एक बेड पर दो-दो मरीज
करीब 47 डिग्री तापमान के बीच जिले में डायरिया, पेट दर्द और सांस की दिक्कत के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सोमवार को नागरिक अस्पताल में 2500 से ज्यादा मरीज पहुंचे। बुखार और पेट दर्द ठीक नहीं होने के कारण मरीजों को भर्ती करने की नौबत आ रही है। हालात यह है कि इमरजेंसी में मरीजों की संख्या के अनुसार बेड कम पड़ने लगे हैं। सोमवार को एक-एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती देखे गए। बेड की कमी की समस्या पिछले एक पखवाड़े से जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बनी हुई है, जिससे मरीजों को परेशानी तो हो ही रही है। साथ ही संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।
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स्ट्रेचर भी नहीं मिल पा रहे
नागरिक अस्पताल में मरीजों को बेड के अलावा स्ट्रेचर की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। परिजन मरीजों को गोद में उठाकर लेकर जा रहे हैं। नाम न बताने की एवज में बल्लभगढ़ निवासी एक युवक ने बताया कि गिरने के कारण पैर टूट गया है। घंटों इंतजार के बाद पैर में प्लास्टर चढ़ा लेकिन स्ट्रेचर नहीं मिल पाया। ऐसे में परेशान होकर मरीज को गोद में उठाकर ऑटो तक लेकर गए। इसके अलावा एक व्यक्ति पत्नी को गोद में उठाकर इमरजेंसी में लेकर जाते हुए नजर आया। अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी सविता यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दो दिन के अवकाश के बाद जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। पंजीकरण से लेकर ओपीडी के बाहर मरीज लंबी लाइन में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। अस्पताल में अव्यवस्था का ऐसा आलम है कि मरीजों को सुविधाओं के नाम पर सिर्फ कुछ नहीं मिल रहा है। अस्पताल की ओपीडी में एसी, पंखे केवल नाम के लिए लगे हुए हैं। ऐसे में भीषण गर्मी और उमस के कारण अस्पताल में तीन महिलाएं बेहोश हो गईं। परिजनों और नर्सिंग स्टाफ के सहयोग से महिलाओं को प्राथमिक उपचार दिया गया।
जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं की कमी का खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में तेज बुखार, पेट दर्द, गले में संक्रमण, आंखों में जलन और डायरिया के मरीज भी बढ़ रहे हैं। शनिवार और रविवार को अवकाश के बाद जिला अस्पताल में मरीजों का सैलाब आ गया। साधारण दिनों में जहां 1500 से 1800 मरीज पहुंचते हैं सोमवार को करीब 2500 मरीजों के पहुंचने से अस्पताल में व्यवस्था चरमरा गई।
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हाल यह हुआ कि ओपीडी, दवा काउंटर और पंजीकरण केंद्र पर लोगों के लिए बैठने की भी जगह नहीं थी। इलाज के लिए लोग अपनी बारी का इंतजार करते रहे। वहीं, दवाइयां नहीं मिलने पर मरीज भड़क गए और हंगामा करने लगे। लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक पिछले करीब एक महीने से अस्पताल में 100 से ज्यादा दवाइयों का स्टॉक खत्म हो चुका है। काफी जद्दोजहद के बाद भी लोगों को सभी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। इसके अलावा मरीजों ने कर्मचारियों पर 50-100 रुपये लेकर ओपीडी कार्ड बनाने का आरोप लगाया। इस बात में कितनी सच्चाई है यह जांच के बाद ही साबित हो सकेगा।
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अस्पताल के इंतजाम नाकाफी
अस्पताल की ओपीडी में लगे एसी लंबे समय से खराब हैं। हाल ही में कुछ नए पंखे लगाए गए लेकिन भीषण गर्मी में यह इंतजाम नाकाफी साबित हो रहा है। ओपीडी में इलाज के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रही एक महिला बेहोश हो गई। नर्सिंग स्टाफ ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया। इसके अलावा ओपीडी के बाहर पंजीकरण केंद्र पर लाइन में कार्ड बनवाने के लिए खड़ी लड़की बेहोश हो गई। वहीं, आपातकालीन कक्ष के बाहर एक अन्य महिला गर्मी की वजह से बेहोश हो गई। अस्पताल की अव्यवस्था के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी हो रही है।
एक बेड पर दो-दो मरीज
करीब 47 डिग्री तापमान के बीच जिले में डायरिया, पेट दर्द और सांस की दिक्कत के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सोमवार को नागरिक अस्पताल में 2500 से ज्यादा मरीज पहुंचे। बुखार और पेट दर्द ठीक नहीं होने के कारण मरीजों को भर्ती करने की नौबत आ रही है। हालात यह है कि इमरजेंसी में मरीजों की संख्या के अनुसार बेड कम पड़ने लगे हैं। सोमवार को एक-एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती देखे गए। बेड की कमी की समस्या पिछले एक पखवाड़े से जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बनी हुई है, जिससे मरीजों को परेशानी तो हो ही रही है। साथ ही संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।
स्ट्रेचर भी नहीं मिल पा रहे
नागरिक अस्पताल में मरीजों को बेड के अलावा स्ट्रेचर की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। परिजन मरीजों को गोद में उठाकर लेकर जा रहे हैं। नाम न बताने की एवज में बल्लभगढ़ निवासी एक युवक ने बताया कि गिरने के कारण पैर टूट गया है। घंटों इंतजार के बाद पैर में प्लास्टर चढ़ा लेकिन स्ट्रेचर नहीं मिल पाया। ऐसे में परेशान होकर मरीज को गोद में उठाकर ऑटो तक लेकर गए। इसके अलावा एक व्यक्ति पत्नी को गोद में उठाकर इमरजेंसी में लेकर जाते हुए नजर आया। अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी सविता यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।