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Faridabad News: जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सिही गांव में हुए हादसे को लेकर नगर निगम आयुक्त ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। यह टीम इस हादसे की जांच करेगी कि किसकी लापरवाही है। जांच के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंपेगी।
नगर निगम की जमीन पर सिही गांव में दुकानदार ने अपना बिल्डिंग मैटेरियल का सामान डाला हुआ था। इसी जमीन पर करीब 15 वर्ष पहले टंकी हुआ करती थी। निगम प्रशासन ने इस टंकी को बंद कर दिया था। निगम अधिकारियों का दावा है कि यहां पर गेटवॉल और बैंड लगा दिया गया था। वहीं इसमें कट्टा भी भी फंसा दिया गया था। अब यह पता नहीं है कि यह कब से खुला पड़ा था। इस गेटवॉल के हटने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई कह रहा है कि इसे किसी नशेड़ी ने चोरी कर लिया था तो कोई अनुमान लगा रहा था कि बिल्डिंग मैटेरियल की अर्थमूवर मशीन से यह गेटवॉल टूटा होगा। यह बिल्डिंग मैटेरियल में भी दबा रहता था। एक अधिकारी ने बताया कि यदि यह खुला रहता तो बिल्डिंग मैटेरियल इसमें जा सकता था। इस वजह से यह पता नहीं चल सका है कि यह कब से खुला था।
निगम ने रिकॉर्ड खंगाला
निगम के एक अधिकारी ने बताया कि हादसे के बाद निगम प्रशासन ने अपना रिकॉर्ड खंगाला है जिसमें इसमें गेटवॉल और बैंड लगाने की रिपोर्ट है। यह जमीन निगम की निगरानी में भी नहीं थी। इस वजह से निगम प्रशासन सीधे इसे अपनी लापरवाही नहीं मान रहा है। उधर, बच्ची की मौत के बाद नगर निगम आयुक्त ने शहर में सभी बोरवेल के हालात का पता करने का आदेश दिया। यदि कोई खुला है तो उसे तुरंत बंद कर दिया जाए। इसके बाद सभी निगम अधिकारी हरकत में नजर आए।
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इस मामले की जांच के लिए निगमायुक्त ने मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता सहित तीन अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी इस पूरे मामले की जांच करेगी। बोरवेल वाली जमीन निगम की है, लेकिन इस पर दुकानदार ने अपना बिल्डिंग मैटेरियल डाला हुआ था।
- संजीव कुमार, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम
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फरीदाबाद। सिही गांव में हुए हादसे को लेकर नगर निगम आयुक्त ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। यह टीम इस हादसे की जांच करेगी कि किसकी लापरवाही है। जांच के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंपेगी।
नगर निगम की जमीन पर सिही गांव में दुकानदार ने अपना बिल्डिंग मैटेरियल का सामान डाला हुआ था। इसी जमीन पर करीब 15 वर्ष पहले टंकी हुआ करती थी। निगम प्रशासन ने इस टंकी को बंद कर दिया था। निगम अधिकारियों का दावा है कि यहां पर गेटवॉल और बैंड लगा दिया गया था। वहीं इसमें कट्टा भी भी फंसा दिया गया था। अब यह पता नहीं है कि यह कब से खुला पड़ा था। इस गेटवॉल के हटने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई कह रहा है कि इसे किसी नशेड़ी ने चोरी कर लिया था तो कोई अनुमान लगा रहा था कि बिल्डिंग मैटेरियल की अर्थमूवर मशीन से यह गेटवॉल टूटा होगा। यह बिल्डिंग मैटेरियल में भी दबा रहता था। एक अधिकारी ने बताया कि यदि यह खुला रहता तो बिल्डिंग मैटेरियल इसमें जा सकता था। इस वजह से यह पता नहीं चल सका है कि यह कब से खुला था।
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निगम ने रिकॉर्ड खंगाला
निगम के एक अधिकारी ने बताया कि हादसे के बाद निगम प्रशासन ने अपना रिकॉर्ड खंगाला है जिसमें इसमें गेटवॉल और बैंड लगाने की रिपोर्ट है। यह जमीन निगम की निगरानी में भी नहीं थी। इस वजह से निगम प्रशासन सीधे इसे अपनी लापरवाही नहीं मान रहा है। उधर, बच्ची की मौत के बाद नगर निगम आयुक्त ने शहर में सभी बोरवेल के हालात का पता करने का आदेश दिया। यदि कोई खुला है तो उसे तुरंत बंद कर दिया जाए। इसके बाद सभी निगम अधिकारी हरकत में नजर आए।
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इस मामले की जांच के लिए निगमायुक्त ने मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता सहित तीन अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी इस पूरे मामले की जांच करेगी। बोरवेल वाली जमीन निगम की है, लेकिन इस पर दुकानदार ने अपना बिल्डिंग मैटेरियल डाला हुआ था।
- संजीव कुमार, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम