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Faridabad News: चल रहीं थीं सांसें, पुलिस तीन युवाओं को शव की तरह एक के ऊपर एक लादा
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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर खराब खड़े ट्रॉला से टकराए बाइक सवार तीन युवकों की मौत का मामला
20 मिनट तक आकाश ने पिता से की बात, हाथ जोड़े रोता रहा रामू का पितापुलिस करती रही इंतजार, परिजन खुद ही लेकर गए उपचार के लिए
हेमलता रावत
बल्लभगढ़। धनतेरस की सुबह एक ही इलाके में रहने वाले तीन परिवारों में मातम पसर गया। परिजन का आरोप है कि सेक्टर-8 दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर हादसे में जान गंवाने वाले तीनों युवकों को पुलिस ने एक के ऊपर एक डाल रखा था। परिजन का कहना है कि इस दौरान आकाश और अर्चित की सांसें चल रही थीं। आकाश के पिता ने बताया कि हादसे के बाद आकाश ने मोबाइल पर 20 मिनट तक बात की थी, लेकिन कोई मदद नहीं पहुंची।
हादसे में मौत का शिकार हुए रामू, आकाश और अर्चित के परिजन का आरोप है कि वे जब पहुंचे तो तीनों युवक एक के ऊपर एक लदे हुए थे। परिजन के पहुंचने के बाद तीनों युवकों को एंबुलेंस में उपचार के लिए ले जाया गया। इस दौरान भी आकाश और अर्चित की सांसें चल रही थीं। अस्पताल पहुंचने पर दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। हादसे के बाद तीनों लगभग आधे घंटे तक मौके पर पड़े रहे। परिजनों का आरोप है कि अगर समय पर युवकों को पुलिस उपचार के लिए अस्पताल में ले जाती तो आकाश व अर्चित की जान बच सकती थी।
तीन बहनों का इकलौता भाई था आकाश
जुग्गी लाल ने बताया कि उनके बेटे आकाश ने कॉल कर बताया कि हादसे में वह घायल हो गया है। जल्दी से आ जाओ। सूचना मिलने के बाद वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे। इस दौरान उनका बेटा आकाश जिंदा था। पुलिस ने जब उसको एंबुलेंस में डाला था तो वह जिंदा था। पुलिस परिजनों के आने का इंतजार कर रही थी। जुग्गी लाल का कहना है कि अगर पुलिसकर्मी आकाश को मात्र 10 मिनट की दूरी पर स्थित निजी अस्पताल में भर्ती करवा देते तो वह बच जाता। वे लोग जब तक आकाश को बीके अस्पताल लेकर गए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। आकाश तीन बहनों का इकलौता भाई था।
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रामू पार्ट टाइम करता था जॉब
गांव सिही निवासी नौनिहाल ने बताया कि उनके मकान में रामू अपने परिवार के साथ एक साल से रह रहा था। वह भाइयों में सबसे बड़ा होने के चलते छोटे-छोटे काम करके पैसे कमाता था। इसके अलावा वह कोई नया काम भी सीख रहा था। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को भी वह सुबह 4 बजे गाड़ी को साफ करने के लिए अपने दोस्तों के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर ट्राला की चपेट में आने के बाद मृत्यु हो गई।
नहीं था कोई पार्किंग लाइट और रिफ्लेक्टर
अर्चित के पिता कमलेश कश्यप ने बताया कि एक्सप्रेस वे पर जो ट्राला खराब खड़ा हुआ था। उसके चालक ने किसी प्रकार का कोई इंडीकेटर व रिफ्लेक्टर नहीं लगाया था। इस वजह से बाइक सवार युवकों को सुबह अंधेरे में ट्राॅला नजर नहीं आया। इस ट्राॅला चालक के द्वारा बस पीछे की ओर एक पेड़ टहनी को लगाया हुआ था जोकि अंधेरे में नजर भी नहीं आई। अगर इंडीकेटर व रिफ्लेक्टर और सड़क पर स्ट्रीट लाइट होती, तो यह हादसा नहीं होता और तीनों युवकों की जान बच जाती।
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20 मिनट तक आकाश ने पिता से की बात, हाथ जोड़े रोता रहा रामू का पितापुलिस करती रही इंतजार, परिजन खुद ही लेकर गए उपचार के लिए
हेमलता रावत
बल्लभगढ़। धनतेरस की सुबह एक ही इलाके में रहने वाले तीन परिवारों में मातम पसर गया। परिजन का आरोप है कि सेक्टर-8 दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर हादसे में जान गंवाने वाले तीनों युवकों को पुलिस ने एक के ऊपर एक डाल रखा था। परिजन का कहना है कि इस दौरान आकाश और अर्चित की सांसें चल रही थीं। आकाश के पिता ने बताया कि हादसे के बाद आकाश ने मोबाइल पर 20 मिनट तक बात की थी, लेकिन कोई मदद नहीं पहुंची।
हादसे में मौत का शिकार हुए रामू, आकाश और अर्चित के परिजन का आरोप है कि वे जब पहुंचे तो तीनों युवक एक के ऊपर एक लदे हुए थे। परिजन के पहुंचने के बाद तीनों युवकों को एंबुलेंस में उपचार के लिए ले जाया गया। इस दौरान भी आकाश और अर्चित की सांसें चल रही थीं। अस्पताल पहुंचने पर दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। हादसे के बाद तीनों लगभग आधे घंटे तक मौके पर पड़े रहे। परिजनों का आरोप है कि अगर समय पर युवकों को पुलिस उपचार के लिए अस्पताल में ले जाती तो आकाश व अर्चित की जान बच सकती थी।
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तीन बहनों का इकलौता भाई था आकाश
जुग्गी लाल ने बताया कि उनके बेटे आकाश ने कॉल कर बताया कि हादसे में वह घायल हो गया है। जल्दी से आ जाओ। सूचना मिलने के बाद वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे। इस दौरान उनका बेटा आकाश जिंदा था। पुलिस ने जब उसको एंबुलेंस में डाला था तो वह जिंदा था। पुलिस परिजनों के आने का इंतजार कर रही थी। जुग्गी लाल का कहना है कि अगर पुलिसकर्मी आकाश को मात्र 10 मिनट की दूरी पर स्थित निजी अस्पताल में भर्ती करवा देते तो वह बच जाता। वे लोग जब तक आकाश को बीके अस्पताल लेकर गए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। आकाश तीन बहनों का इकलौता भाई था।
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रामू पार्ट टाइम करता था जॉब
गांव सिही निवासी नौनिहाल ने बताया कि उनके मकान में रामू अपने परिवार के साथ एक साल से रह रहा था। वह भाइयों में सबसे बड़ा होने के चलते छोटे-छोटे काम करके पैसे कमाता था। इसके अलावा वह कोई नया काम भी सीख रहा था। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को भी वह सुबह 4 बजे गाड़ी को साफ करने के लिए अपने दोस्तों के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर ट्राला की चपेट में आने के बाद मृत्यु हो गई।
नहीं था कोई पार्किंग लाइट और रिफ्लेक्टर
अर्चित के पिता कमलेश कश्यप ने बताया कि एक्सप्रेस वे पर जो ट्राला खराब खड़ा हुआ था। उसके चालक ने किसी प्रकार का कोई इंडीकेटर व रिफ्लेक्टर नहीं लगाया था। इस वजह से बाइक सवार युवकों को सुबह अंधेरे में ट्राॅला नजर नहीं आया। इस ट्राॅला चालक के द्वारा बस पीछे की ओर एक पेड़ टहनी को लगाया हुआ था जोकि अंधेरे में नजर भी नहीं आई। अगर इंडीकेटर व रिफ्लेक्टर और सड़क पर स्ट्रीट लाइट होती, तो यह हादसा नहीं होता और तीनों युवकों की जान बच जाती।