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Faridabad News: खेड़ी पुल के पास नहर किनारे सुरक्षा दीवारें हटने से बढ़ा खतरा
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नोएडा हादसे के बाद व्यापारी संगठन ने उठाई आवाज
संवाद न्यूज एजेंसी
तिगांव। खेड़ी पुल के पास नहर किनारे लगी सुरक्षा दीवारें, जिन्हें तकनीकी रूप से पैरापेट वॉल या सेफ्टी रेलिंग कहा जाता है, हटे होने से बड़ा हादसा होने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। इन दीवारों का मुख्य उद्देश्य राहगीरों और वाहन चालकों को नहर में गिरने से रोकना होता है, लेकिन मौजूदा हालात में ये सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से नदारद दिखाई दे रही है।
हाल ही में नोएडा में नहर से जुड़े एक हादसे में एक इंजीनियर की मौत का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता और भी गहरा गई है। इसी कड़ी में खेड़ी रोड व्यापारी एकता संगठन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए प्रशासन के सामने जोरदार ढंग से आवाज उठाई है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा दीवारें दोबारा नहीं लगाई गईं तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
खेड़ी पुल क्षेत्र से रोजाना सैंकड़ों वाहन और पैदल राहगीर गुजरते हैं। रात के समय रोशनी कम होने और नहर के पास किसी तरह की ठोस बैरिकेडिंग न होने के कारण जोखिम और बढ़ जाता है। बारिश के दिनों में फिसलन के चलते हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि कई बार इस बारे में संबंधित विभागों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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नहर के किनारे सेफ्टी दीवारें हटना बेहद गंभीर विषय है। यह सीधे लोगों की जान से जुड़ा मामला है। नोएडा में जो हादसा हुआ, वह एक चेतावनी है। प्रशासन को तुरंत सुरक्षा दीवारें लगवानी चाहिए । -दिनेश कुमार, प्रधान खेड़ी रोड व्यापारी एकता संगठन
यह रास्ता व्यस्ततम मार्गों में से एक है। अगर कोई दोपहिया या पैदल व्यक्ति फिसल गया तो सीधा नहर में गिर सकता है। जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है। -राजेश कुमार, व्यापारी खेड़ी रोड़
सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी के कारण लोगों में डर बना हुआ है। छोटे-छोटे कदम उठाकर बड़े हादसों को रोका जा सकता है, लेकिन लापरवाही भारी पड़ रही है। -देवेंद्र जैन, व्यापारी खेड़ी रोड़
प्रशासन को नोएडा हादसे से सबक लेना चाहिए। अगर यहां समय रहते पैरापेट वॉल नहीं लगी तो व्यापारी संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा। -दीपक गोयल, व्यापारी खेड़ी रोड़
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संवाद न्यूज एजेंसी
तिगांव। खेड़ी पुल के पास नहर किनारे लगी सुरक्षा दीवारें, जिन्हें तकनीकी रूप से पैरापेट वॉल या सेफ्टी रेलिंग कहा जाता है, हटे होने से बड़ा हादसा होने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। इन दीवारों का मुख्य उद्देश्य राहगीरों और वाहन चालकों को नहर में गिरने से रोकना होता है, लेकिन मौजूदा हालात में ये सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से नदारद दिखाई दे रही है।
हाल ही में नोएडा में नहर से जुड़े एक हादसे में एक इंजीनियर की मौत का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता और भी गहरा गई है। इसी कड़ी में खेड़ी रोड व्यापारी एकता संगठन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए प्रशासन के सामने जोरदार ढंग से आवाज उठाई है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा दीवारें दोबारा नहीं लगाई गईं तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
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खेड़ी पुल क्षेत्र से रोजाना सैंकड़ों वाहन और पैदल राहगीर गुजरते हैं। रात के समय रोशनी कम होने और नहर के पास किसी तरह की ठोस बैरिकेडिंग न होने के कारण जोखिम और बढ़ जाता है। बारिश के दिनों में फिसलन के चलते हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि कई बार इस बारे में संबंधित विभागों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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नहर के किनारे सेफ्टी दीवारें हटना बेहद गंभीर विषय है। यह सीधे लोगों की जान से जुड़ा मामला है। नोएडा में जो हादसा हुआ, वह एक चेतावनी है। प्रशासन को तुरंत सुरक्षा दीवारें लगवानी चाहिए । -दिनेश कुमार, प्रधान खेड़ी रोड व्यापारी एकता संगठन
यह रास्ता व्यस्ततम मार्गों में से एक है। अगर कोई दोपहिया या पैदल व्यक्ति फिसल गया तो सीधा नहर में गिर सकता है। जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है। -राजेश कुमार, व्यापारी खेड़ी रोड़
सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी के कारण लोगों में डर बना हुआ है। छोटे-छोटे कदम उठाकर बड़े हादसों को रोका जा सकता है, लेकिन लापरवाही भारी पड़ रही है। -देवेंद्र जैन, व्यापारी खेड़ी रोड़
प्रशासन को नोएडा हादसे से सबक लेना चाहिए। अगर यहां समय रहते पैरापेट वॉल नहीं लगी तो व्यापारी संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा। -दीपक गोयल, व्यापारी खेड़ी रोड़