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Faridabad News: प्रतापगढ़, बादशाहपुर और मिर्जापुर एसटीपी को अपग्रेड किया जाएगा
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73 करोड़ से सुधरेगी व्यवस्था, सीवर के पानी को साफ करने के लिए लगेंगी आधुनिक तकनीकें
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में सीवरेज के पानी को बेहतर तरीके से साफ करने और जल प्रदूषण कम करने के लिए फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने योजना बनाई है। इस योजना पर एफएमडीए करीब 73 करोड़ रुपये खर्च करेगा। मास्टर सीवर स्कीम के तहत प्रतापगढ़, बादशाहपुर और मिर्जापुर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। इसमें पानी को अधिक साफ करने, उसकी गुणवत्ता की निगरानी करने और उपचारित पानी का दोबारा इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर रहेगा। परियोजना का उद्देश्य सीवरेज के पानी का बेहतर उपचार कर पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करना है।
शहर में प्रतिदिन 120 एमएलडी सीवेज का पानी निकलता है। यदि इसका उचित उपचार नहीं हो तो नालों, जलस्रोतों और जमीन के नीचे मौजूद पानी के प्रदूषित होने का खतरा रहता है। ऐसे में एसटीपी की कार्यक्षमता बेहतर होने से आम लोगों को भी लाभ मिल सकता है।
तीन प्लांट में लगेंगे आधुनिक उपकरण
योजना के तहत प्रतापगढ़ के 100 एमएलडी, बादशाहपुर के 45 एमएलडी और मिर्जापुर के 80 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी में सुधार किया जाएगा। इनमें डिस्क फिल्टर सहित पानी के उपचार से जुड़े आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। ब्लोअर, न्यूट्रलाइजेशन टैंक, फ्लैश मिक्सर और क्लैरीफ्लोक्यूलेटर जैसी प्रणालियां भी परियोजना का हिस्सा हैं। इनकी मदद से पानी में मौजूद बारीक अशुद्धियों को हटाने और उपचार प्रक्रिया को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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ऑनलाइन होगी पानी की गुणवत्ता की निगरानी
प्लांट से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए विभिन्न एनालाइजर और एससीएडीए व पीएलसी आधारित नियंत्रण प्रणाली लगाई जाएगी। इससे संचालन की निगरानी और तकनीकी गड़बड़ियों की पहचान में मदद मिलेगी। प्रतापगढ़ एसटीपी में बायोगैस के सुरक्षित प्रबंधन के लिए स्क्रबर और फ्लेयरिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा।
उद्योगों और सिंचाई में मिलेगा लाभ
उपचारित पानी का इस्तेमाल उद्योगों, पार्कों की सिंचाई और निर्माण कार्यों में किया जाएगा। इससे इन कामों के लिए पेयजल और भूजल पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। बेहतर उपचार से नालों में प्रदूषित पानी जाने का खतरा भी कम हो सकता है। हालांकि, यमुना में प्रदूषण घटाने के लिए अन्य स्रोतों से आने वाले गंदे पानी पर नियंत्रण भी जरूरी होगा।
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वर्जन
तीनों एसटीपी की व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से बेहतर बनाने के लिए टेंडर जारी किया गया है। इससे सीवरेज के पानी का प्रभावी ढंग से उपचार हो सकेगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।- समुंद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में सीवरेज के पानी को बेहतर तरीके से साफ करने और जल प्रदूषण कम करने के लिए फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने योजना बनाई है। इस योजना पर एफएमडीए करीब 73 करोड़ रुपये खर्च करेगा। मास्टर सीवर स्कीम के तहत प्रतापगढ़, बादशाहपुर और मिर्जापुर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। इसमें पानी को अधिक साफ करने, उसकी गुणवत्ता की निगरानी करने और उपचारित पानी का दोबारा इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर रहेगा। परियोजना का उद्देश्य सीवरेज के पानी का बेहतर उपचार कर पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करना है।
शहर में प्रतिदिन 120 एमएलडी सीवेज का पानी निकलता है। यदि इसका उचित उपचार नहीं हो तो नालों, जलस्रोतों और जमीन के नीचे मौजूद पानी के प्रदूषित होने का खतरा रहता है। ऐसे में एसटीपी की कार्यक्षमता बेहतर होने से आम लोगों को भी लाभ मिल सकता है।
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तीन प्लांट में लगेंगे आधुनिक उपकरण
योजना के तहत प्रतापगढ़ के 100 एमएलडी, बादशाहपुर के 45 एमएलडी और मिर्जापुर के 80 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी में सुधार किया जाएगा। इनमें डिस्क फिल्टर सहित पानी के उपचार से जुड़े आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। ब्लोअर, न्यूट्रलाइजेशन टैंक, फ्लैश मिक्सर और क्लैरीफ्लोक्यूलेटर जैसी प्रणालियां भी परियोजना का हिस्सा हैं। इनकी मदद से पानी में मौजूद बारीक अशुद्धियों को हटाने और उपचार प्रक्रिया को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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ऑनलाइन होगी पानी की गुणवत्ता की निगरानी
प्लांट से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए विभिन्न एनालाइजर और एससीएडीए व पीएलसी आधारित नियंत्रण प्रणाली लगाई जाएगी। इससे संचालन की निगरानी और तकनीकी गड़बड़ियों की पहचान में मदद मिलेगी। प्रतापगढ़ एसटीपी में बायोगैस के सुरक्षित प्रबंधन के लिए स्क्रबर और फ्लेयरिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा।
उद्योगों और सिंचाई में मिलेगा लाभ
उपचारित पानी का इस्तेमाल उद्योगों, पार्कों की सिंचाई और निर्माण कार्यों में किया जाएगा। इससे इन कामों के लिए पेयजल और भूजल पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। बेहतर उपचार से नालों में प्रदूषित पानी जाने का खतरा भी कम हो सकता है। हालांकि, यमुना में प्रदूषण घटाने के लिए अन्य स्रोतों से आने वाले गंदे पानी पर नियंत्रण भी जरूरी होगा।
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वर्जन
तीनों एसटीपी की व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से बेहतर बनाने के लिए टेंडर जारी किया गया है। इससे सीवरेज के पानी का प्रभावी ढंग से उपचार हो सकेगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।- समुंद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए