{"_id":"618d094b5475e812102f8941","slug":"the-displaced-people-of-khori-village-do-not-like-the-flat-of-dabua-colony-only-400-out-of-900-accepted-the-letter-faridabad-news-noi615153826","type":"story","status":"publish","title_hn":"खोरी गांव के विस्थापितों को पसंद नहीं डबुआ कॉलोनी के फ्लैट, 900 में से सिर्फ 400 ने ही स्वीकारा पत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खोरी गांव के विस्थापितों को पसंद नहीं डबुआ कॉलोनी के फ्लैट, 900 में से सिर्फ 400 ने ही स्वीकारा पत्र
विज्ञापन
फरीदाबाद डबुआ कालोनी आशियाना फ्लेटों में फैली गंदगी ।
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद (मनोज धर द्विवेदी)। खोरी गांव के विस्थापितों को डबुुआ कॉलोनी के ईडब्ल्यूएस फ्लैट पसंद नहीं आ रहे हैं। नगर निगम ने खोरी गांव के 900 लोगों को अस्थाई रूप से पात्र माना है। इसमें से मात्र 400 ने ही प्रोविजन अलॉटमेंट लेटर स्वीकारा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने जून में खोरी गांव में अवैैध निर्माणों पर कार्रवाई की थी। इस दौरान करीब 10 हजार मकानों को तोड़ दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने खोरी गांव के विस्थापितों को डबुआ कॉलोनी व बापूधाम में ईडब्ल्यूएस फ्लैट देने को कहा था। इसके बाद पात्रों को नगर निगम ने पहले डबुआ कॉलोनी के फ्लैट देने की योजना तैयार की है। निगम को करीब 4600 आवेदन मिले। जांच के बाद नगर निगम ने पहले चरण में 900 पात्रों की पहचान कर प्रोविजन अलॉटमेंट लेटर जारी किया। ऐसे लोगों को लेटर भेजने के साथ फोन पर भी जानकारी दी गई कि डबुआ कॉलोनी के फ्लैट में शिफ्ट हो जाए। कईयों ने देेखने के बाद रहने से इनकार कर दिया है।
खोरी गांव के विस्थापितों का कहना है कि डबुआ कॉलोनी के फ्लैट रहने लायक नहीं है। करीब दो माह बाद भी अभी डबुआ के ईडब्ल्यूएस फ्लैट में कोई काम शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में फ्लैट में रहने की बजाय खोरी के मलबा में रहना मंजूर है। विस्थापित मीना ने कहा कि सरकार को उजाड़ने में जल्दबाजी थी लेकिन पुर्नवास को लेकर ऐसा नहीं है। उनका कहना है कि डबुआ कॉलोनी के फ्लैट में रहना मुश्किल है। वहीं, नाशिर ने बताया कि उन्हें प्रोविजन लेटर मिला है लेकिन स्वीकार नहीं किया है। ऐसे कई विस्थापित है जो निगम की पुर्नवास की व्यवस्था से नाराज है। उनका कहना है कि बारिश में परेशानी उठानी पड़ी थी अब सर्दी में भी अरावली में टेंट में रात काटनी होगी। नगर निगम डबुुआ कॉलोनी के ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के मरम्मत कराने के लिए प्रयास कर रहा है। लेकिन, निगम की आर्थिक स्थिति सही न होने पर ठेकेदार काम के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। निगम से मिली जानकारी के अनुसार पहले जारी टेंडर में कोई ठेकेदार आगे नहीं आया। इसके बाद दोबारा टेंडर में दो एजेंसियां सामने आई लेकिन उनमें खामी मिली। इसके बाद अब नगर निगम ने तीसरी बार ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के मरम्मत के लिए टेंडर जारी किया है। नगर निगम खोरी गांव के विस्थापितों के लिए ईडब्ल्यूएस फ्लैटों की मरम्मत कार्य पर दस करोड़ रुपये खर्च करेेगा। इसमें फ्लैटों के खिड़की-दरवाजे, टाइल्स समेत अन्य कार्य शामिल हैं। निगम को ठेकेदार न मिलने से फ्लैटों के ठीक कराने का कार्य लगातार देरी हो रही है।
आधार कार्ड मान्य होने पर 1039 आवेदन मिले
सुप्रीम कोर्ट ने पहले परिवार पहचान पत्र, राशन कार्ड व वोटर कार्ड समेत अन्य कागजात विस्थापितों के लिए रखा था। ऐसे में पहले उन लोगों के आवेदन लिए गए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने खोरी के विस्थापितों केे आधार कार्ड पर भी आवेदन लेने को कहा था। इसके तहत करीब 1039 लोग आधार कार्ड वाले मिले हैं। वहीं करीब एक हजार आवेदनों की अभी जांच की जानी है। निगम का कहना है कि इसमें पात्रों को अस्थाई रूप से फ्लैट का आवंटन होगा। कागजातों की जांच के बाद लगातार ऐसे लोगों को लेटर जारी हो रहा है। खोरी के विस्थापित फ्लैट के लिए 15 नवंबर तक नगर निगम को आवेदन कर सकते हैं। नगर दस्तावेज जांच कर फ्लैट देने की कार्रवाई करेगा। हरियाणा सरकार ने पुनर्वास की एक पॉलिसी बनाई, जिसमें खोरी में रहने वाले लोगों को डबुआ कॉलोनी और बापू नगर में खाली पड़े फ्लैटों को देने का प्रावधान रखा। ऐसे में जो लोग आवेदन करने से वंचित रह गए हैं,वे इस दौरान जरूरी कागजात के साथ आवेदन कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
खोरी गांव के विस्थापितों का कहना है कि डबुआ कॉलोनी के फ्लैट रहने लायक नहीं है। करीब दो माह बाद भी अभी डबुआ के ईडब्ल्यूएस फ्लैट में कोई काम शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में फ्लैट में रहने की बजाय खोरी के मलबा में रहना मंजूर है। विस्थापित मीना ने कहा कि सरकार को उजाड़ने में जल्दबाजी थी लेकिन पुर्नवास को लेकर ऐसा नहीं है। उनका कहना है कि डबुआ कॉलोनी के फ्लैट में रहना मुश्किल है। वहीं, नाशिर ने बताया कि उन्हें प्रोविजन लेटर मिला है लेकिन स्वीकार नहीं किया है। ऐसे कई विस्थापित है जो निगम की पुर्नवास की व्यवस्था से नाराज है। उनका कहना है कि बारिश में परेशानी उठानी पड़ी थी अब सर्दी में भी अरावली में टेंट में रात काटनी होगी। नगर निगम डबुुआ कॉलोनी के ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के मरम्मत कराने के लिए प्रयास कर रहा है। लेकिन, निगम की आर्थिक स्थिति सही न होने पर ठेकेदार काम के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। निगम से मिली जानकारी के अनुसार पहले जारी टेंडर में कोई ठेकेदार आगे नहीं आया। इसके बाद दोबारा टेंडर में दो एजेंसियां सामने आई लेकिन उनमें खामी मिली। इसके बाद अब नगर निगम ने तीसरी बार ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के मरम्मत के लिए टेंडर जारी किया है। नगर निगम खोरी गांव के विस्थापितों के लिए ईडब्ल्यूएस फ्लैटों की मरम्मत कार्य पर दस करोड़ रुपये खर्च करेेगा। इसमें फ्लैटों के खिड़की-दरवाजे, टाइल्स समेत अन्य कार्य शामिल हैं। निगम को ठेकेदार न मिलने से फ्लैटों के ठीक कराने का कार्य लगातार देरी हो रही है।
विज्ञापन
आधार कार्ड मान्य होने पर 1039 आवेदन मिले
सुप्रीम कोर्ट ने पहले परिवार पहचान पत्र, राशन कार्ड व वोटर कार्ड समेत अन्य कागजात विस्थापितों के लिए रखा था। ऐसे में पहले उन लोगों के आवेदन लिए गए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने खोरी के विस्थापितों केे आधार कार्ड पर भी आवेदन लेने को कहा था। इसके तहत करीब 1039 लोग आधार कार्ड वाले मिले हैं। वहीं करीब एक हजार आवेदनों की अभी जांच की जानी है। निगम का कहना है कि इसमें पात्रों को अस्थाई रूप से फ्लैट का आवंटन होगा। कागजातों की जांच के बाद लगातार ऐसे लोगों को लेटर जारी हो रहा है। खोरी के विस्थापित फ्लैट के लिए 15 नवंबर तक नगर निगम को आवेदन कर सकते हैं। नगर दस्तावेज जांच कर फ्लैट देने की कार्रवाई करेगा। हरियाणा सरकार ने पुनर्वास की एक पॉलिसी बनाई, जिसमें खोरी में रहने वाले लोगों को डबुआ कॉलोनी और बापू नगर में खाली पड़े फ्लैटों को देने का प्रावधान रखा। ऐसे में जो लोग आवेदन करने से वंचित रह गए हैं,वे इस दौरान जरूरी कागजात के साथ आवेदन कर सकते हैं।
विज्ञापन