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Faridabad News: इंश्योरेंस में फुल कवरेज न होने से बेटी को नहीं मिला पूरा मुआवजा
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बीमा पॉलिसी में चालक व अन्य की व्यक्तिगत चोट या मृत्यु जोखिम कवर नहीं था
नहर में कार गिरने से हुई थी पति-पत्नी व तीन बच्चों की मौत
परिचित से उधार मांगकर कार ले गए थे मृतक राकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। वाहन का इंश्योरेंस कराते समय कवरेज प्लान में सभी चीजें शामिल होना कितना जरूरी है, ये जरूरत पड़ने पर ही सामने आता है। फरीदाबाद मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से हादसे के मामले ने इस अहमियत को समझाया है। 16 साल की किशोरी के माता-पिता, दो बहनें व एक भाई की कार नहर में गिरने के चलते मौत हो गई थी। लेकिन कार की बीमा पॉलिसी में चालक व अन्य सवार लोगों की चोट या मृत्यु जोखिम का कवरेज न होने से उसे पूरा मुआवजा नहीं मिल सका।
मामले में सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि ऐसी स्थिति में जहां बीमा कंपनी को पॉलिसी की शर्तों के तहत उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 140 के तहत एक न्यूनतम देयता निर्धारित की गई है। सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल ने प्रत्येक मौत के लिए 50 हजार रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। ऐसे में किशोरी को ढाई लाख रुपये क्लेम याचिका दाखिल करने की डेट से नौ प्रतिशत ब्याज के साथ ही मिलेंगे।
क्लेम याचिका 16 साल की किशोरी ने अपने मामा फरीदाबाद पुलिस लाइन में रहने वाले राजेश कुमार के जरिये दायर कराई। इसमें पार्टी डिजायर कार मालिक बलराम शर्मा और मैसर्स लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को बनाया गया। चार अक्टूबर 2019 की रात लगभग पौने नौ बजे राकेश कुमार डिजायर कार से अपनी पत्नी कमलेश, तीन बेटियों व एक बेटे के साथ राजस्थान हनुमानगढ़ स्थित हनुमान मंदिर गए। हनुमानगढ़ जिले में ही एक नहर में कार गिर गई थी। राकेश कुमार, उनकी दो बेटियों व बेटे की मौके पर ही डूबने से मौत हो गई। कमलेश व 16 साल की किशोरी को फरीदाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां 7 अक्टूबर 2019 को कमलेश की भी मौत हो गई थी। परिवार में महज 16 साल की किशोरी ही जिंदा बच सकी।
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बाद में किशोरी ने अपने मामा के जरिये क्लेम याचिका दायर की। इस पर इंश्योरेंस कंपनी की ओर से दावा किया गया कि कार का सिर्फ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लिया हुआ था। इसमें कार चालक व सवार लोगों की चोट या मौत का कवर शामिल नहीं था। ये कार किशोरी के मामा राजेश कुमार ने कार मालिक बलराम से हादसे से 2-3 दिन पहले उधार ली थी। याचिका में दावा किया गया कि राकेश कुमार 40 हजार रुपये महीना कमाता था। लेकिन सभी पक्षों को सुनकर पॉलिसी की खामियों के चलते कमाई के आधार पर किशोरी को मुआवजा नहीं मिल सका।
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नहर में कार गिरने से हुई थी पति-पत्नी व तीन बच्चों की मौत
परिचित से उधार मांगकर कार ले गए थे मृतक राकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। वाहन का इंश्योरेंस कराते समय कवरेज प्लान में सभी चीजें शामिल होना कितना जरूरी है, ये जरूरत पड़ने पर ही सामने आता है। फरीदाबाद मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से हादसे के मामले ने इस अहमियत को समझाया है। 16 साल की किशोरी के माता-पिता, दो बहनें व एक भाई की कार नहर में गिरने के चलते मौत हो गई थी। लेकिन कार की बीमा पॉलिसी में चालक व अन्य सवार लोगों की चोट या मृत्यु जोखिम का कवरेज न होने से उसे पूरा मुआवजा नहीं मिल सका।
मामले में सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि ऐसी स्थिति में जहां बीमा कंपनी को पॉलिसी की शर्तों के तहत उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 140 के तहत एक न्यूनतम देयता निर्धारित की गई है। सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल ने प्रत्येक मौत के लिए 50 हजार रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। ऐसे में किशोरी को ढाई लाख रुपये क्लेम याचिका दाखिल करने की डेट से नौ प्रतिशत ब्याज के साथ ही मिलेंगे।
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क्लेम याचिका 16 साल की किशोरी ने अपने मामा फरीदाबाद पुलिस लाइन में रहने वाले राजेश कुमार के जरिये दायर कराई। इसमें पार्टी डिजायर कार मालिक बलराम शर्मा और मैसर्स लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को बनाया गया। चार अक्टूबर 2019 की रात लगभग पौने नौ बजे राकेश कुमार डिजायर कार से अपनी पत्नी कमलेश, तीन बेटियों व एक बेटे के साथ राजस्थान हनुमानगढ़ स्थित हनुमान मंदिर गए। हनुमानगढ़ जिले में ही एक नहर में कार गिर गई थी। राकेश कुमार, उनकी दो बेटियों व बेटे की मौके पर ही डूबने से मौत हो गई। कमलेश व 16 साल की किशोरी को फरीदाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां 7 अक्टूबर 2019 को कमलेश की भी मौत हो गई थी। परिवार में महज 16 साल की किशोरी ही जिंदा बच सकी।
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बाद में किशोरी ने अपने मामा के जरिये क्लेम याचिका दायर की। इस पर इंश्योरेंस कंपनी की ओर से दावा किया गया कि कार का सिर्फ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लिया हुआ था। इसमें कार चालक व सवार लोगों की चोट या मौत का कवर शामिल नहीं था। ये कार किशोरी के मामा राजेश कुमार ने कार मालिक बलराम से हादसे से 2-3 दिन पहले उधार ली थी। याचिका में दावा किया गया कि राकेश कुमार 40 हजार रुपये महीना कमाता था। लेकिन सभी पक्षों को सुनकर पॉलिसी की खामियों के चलते कमाई के आधार पर किशोरी को मुआवजा नहीं मिल सका।