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आठ माह बाद भी नहीं सुधरी उद्योगों की हालत
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फरीदाबाद (धनंजय चौहान)। कोरोना महामारी के आठ महीने बाद भी उद्योगों की हालत सुधर नहीं पाई है। दिवाली पर ऑटो इंडस्ट्री में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है, लेकिन एक्सपोर्ट कंपनियों की स्थिति अब तक खराब है। इसकी वजह मार्केट में डिमांड की कमी मानी जा रही है। इस कारण कंपनियों में छंटनी प्रक्रिया जारी है। कर्मचारियों को ब्रेक देकर बुलाया जा रहा है। शहर की एक बड़ी एक्सपोर्ट कंपनी में मंगलवार को अनेक कर्मचारियों को ब्रेक दिया गया।
औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में छोटे-बड़े करीब 32 हजार उद्योग हैं। इनमें सौ से अधिक एक्सपोर्ट हाउस है। कोरोना महामारी के कारण 23 मार्च को देशभर में लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। उद्योगों सहित सभी व्यावसायिक स्थलों पर ताले लटक गए। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव एक्सपोर्ट कंपनियों पर पड़ा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद होने से व्यापार ठप हो गया।
करीब एक माह बाद सरकार की ओर से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई। कोविड-19 नियमों के तहत 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ कंपनियों को धीरे-धीरे खोला गया। बाजार में ऑटो इंडस्ट्री में उछाल आने के साथ कारों की मांग बढ़ी मगर एक्सपोर्ट कंपनियों में कोई बदलाव नहीं आया। इस कारण सेक्टर-37, सेक्टर-28, सेक्टर-56 और सेक्टर-24 स्थित शिवालिक प्रिंट कंपनी में कर्मचारियों को रोक-रोक बुलाया जा रहा है।
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वर्जन-
कोरोना महामारी में ऑटो इंडस्ट्री में उछाल की वजह यह है कि लोग कोरोना संक्रमण से डरे हुए है। सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए कार खरीद रहे हैं। इसी कारण दिल्ली एनसीआर में कारों की बिक्री बढ़ी है। वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद होने से टेक्सटाइल उद्योगों में मंदी आ गई है। लागत चार गुना बढ़ गई है। इस अवस्था में भी कंपनी द्वारा किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला नहीं गया। सभी को पूरा वेतन दिया गया है। - अक्षय करण, सीईओ, अंबुजा एंड अंबुजा एक्ससराइज एंव क्लॉदिंग
अनलॉक की प्रक्रिया में टेक्सटाइल उद्योगों में 20 प्रतिशत का उछाल है, 80 फीसदी की अभी भी गिरावट बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय उड़ाने शुरू होने के बाद मार्केट में उछाल आने की संभावना है। जैसे-जैसे लोगों की मांग बढ़ेगी, उत्पादन में सुधार होगा। कंपनी से अभी तक किसी कर्मचारी को निकाला नहीं गया, लेकिन जरूरत के हिसाब से लोगों को बुलाया जा रहा है। - नरेंद्र अग्रवाल, चेयरमैन, शिवालिक प्रिंट
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औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में छोटे-बड़े करीब 32 हजार उद्योग हैं। इनमें सौ से अधिक एक्सपोर्ट हाउस है। कोरोना महामारी के कारण 23 मार्च को देशभर में लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। उद्योगों सहित सभी व्यावसायिक स्थलों पर ताले लटक गए। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव एक्सपोर्ट कंपनियों पर पड़ा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद होने से व्यापार ठप हो गया।
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करीब एक माह बाद सरकार की ओर से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई। कोविड-19 नियमों के तहत 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ कंपनियों को धीरे-धीरे खोला गया। बाजार में ऑटो इंडस्ट्री में उछाल आने के साथ कारों की मांग बढ़ी मगर एक्सपोर्ट कंपनियों में कोई बदलाव नहीं आया। इस कारण सेक्टर-37, सेक्टर-28, सेक्टर-56 और सेक्टर-24 स्थित शिवालिक प्रिंट कंपनी में कर्मचारियों को रोक-रोक बुलाया जा रहा है।
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वर्जन-
कोरोना महामारी में ऑटो इंडस्ट्री में उछाल की वजह यह है कि लोग कोरोना संक्रमण से डरे हुए है। सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए कार खरीद रहे हैं। इसी कारण दिल्ली एनसीआर में कारों की बिक्री बढ़ी है। वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद होने से टेक्सटाइल उद्योगों में मंदी आ गई है। लागत चार गुना बढ़ गई है। इस अवस्था में भी कंपनी द्वारा किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला नहीं गया। सभी को पूरा वेतन दिया गया है। - अक्षय करण, सीईओ, अंबुजा एंड अंबुजा एक्ससराइज एंव क्लॉदिंग
अनलॉक की प्रक्रिया में टेक्सटाइल उद्योगों में 20 प्रतिशत का उछाल है, 80 फीसदी की अभी भी गिरावट बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय उड़ाने शुरू होने के बाद मार्केट में उछाल आने की संभावना है। जैसे-जैसे लोगों की मांग बढ़ेगी, उत्पादन में सुधार होगा। कंपनी से अभी तक किसी कर्मचारी को निकाला नहीं गया, लेकिन जरूरत के हिसाब से लोगों को बुलाया जा रहा है। - नरेंद्र अग्रवाल, चेयरमैन, शिवालिक प्रिंट