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Faridabad News: बीके अस्पताल में टीबी के मरीजों का सामान्य मरीजों के साथ हो रहा इलाज, संक्रमण का खतरा बढ़ा
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अस्पताल में टीबी संक्रमण के करीब सात हजार मरीज हैं पंजीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। भारत सरकार का 2025 तक देश को टीबी मुक्त कराने का संकल्प है लेकिन औद्योगिक नगरी को टीबी मुक्त कैसे कराया जाए जब टीबी संक्रमित और सामान्य मरीजों को एक साथ, साथ एक ही ओपीडी में इलाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग एक ओर संक्रमित मरीजों को खांसते समय मुंह को ढकने और परिवार के सदस्यों से दूरी बनाने की सलाह देता है। जिससे संक्रमण एक से दूसरे में न फैले। वहीं, जिले में इस वर्ष टीबी संक्रमण के मरीजों की संख्या करीब सात हजार हो गई है और यह सभी मरीज बीके अस्पताल में पंजीकृत हैं।
बीके अस्पताल में रोजाना दो से ढाई हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से कई मरीज टीबी से संक्रमित आते हैं। अस्पताल में टीबी के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी नहीं है, जिस कारण टीबी संक्रमित मरीजों का सामान्य मरीजों के साथ ही इलाज किया जाता है। इससे संक्रमण के संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा अस्पताल में सुविधाएं की कमी होने के कारण टीबी के गंभीर मरीजों को भर्ती न करके दिल्ली के महरौली टीबी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिससे मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में टीबी के लिए मरीजों को आपातकालीन विभाग में भी अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। उनका सामान्य मरीजों के साथ ही इलाज किया जाता है। जिस कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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आपातकालीन विभाग में अलग से नहीं है कोई व्यवस्था
अस्पताल के आपातकालीन विभाग में टीबी के मरीजों के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। टीबी से संक्रमित मरीजों को अस्पताल के आपातकालीन विभाग में सामान्य मरीजों के साथ भर्ती कर लिया जाता है, जिससे मरीजों में संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा अस्पताल में टीबी के गंभीर मरीजों के लिए सुविधाएं नहीं है। सुविधाएं न होने के कारण मरीजों को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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मरीजों के लिए वार्ड में पर्याप्त जगह नहीं
अस्पताल में टीबी संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए कंटेनर वार्ड में पुरुष और महिलाओं के लिए अलग से 12 बेड का वार्ड बनाया गया है। जिसकी संख्या काफी कम है। इसके साथ ही वार्ड में वेंटिलेशन की सुविधा भी नहीं है, जिस कारण मरीजों को काफी दिक्कत होती है।
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बातचीत
टीबी के संक्रमण को रोकने के लिए अस्पताल में टीबी के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी चलाई जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बातचीत हुई है। जिसके बाद उन्होंने पत्र जारी करके इस पर संज्ञान लिया है। - सतीश चोपड़ा, समाजसेवी
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वर्जन
टीबी के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी शुरू की जाए। इसके लिए बीके अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजा गया है। आदेश आने के बाद टीबी के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी शुरू की जाएगी। -
डॉ. हरजिंदर सिंह, जिला टीबी अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। भारत सरकार का 2025 तक देश को टीबी मुक्त कराने का संकल्प है लेकिन औद्योगिक नगरी को टीबी मुक्त कैसे कराया जाए जब टीबी संक्रमित और सामान्य मरीजों को एक साथ, साथ एक ही ओपीडी में इलाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग एक ओर संक्रमित मरीजों को खांसते समय मुंह को ढकने और परिवार के सदस्यों से दूरी बनाने की सलाह देता है। जिससे संक्रमण एक से दूसरे में न फैले। वहीं, जिले में इस वर्ष टीबी संक्रमण के मरीजों की संख्या करीब सात हजार हो गई है और यह सभी मरीज बीके अस्पताल में पंजीकृत हैं।
बीके अस्पताल में रोजाना दो से ढाई हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से कई मरीज टीबी से संक्रमित आते हैं। अस्पताल में टीबी के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी नहीं है, जिस कारण टीबी संक्रमित मरीजों का सामान्य मरीजों के साथ ही इलाज किया जाता है। इससे संक्रमण के संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा अस्पताल में सुविधाएं की कमी होने के कारण टीबी के गंभीर मरीजों को भर्ती न करके दिल्ली के महरौली टीबी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिससे मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में टीबी के लिए मरीजों को आपातकालीन विभाग में भी अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। उनका सामान्य मरीजों के साथ ही इलाज किया जाता है। जिस कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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आपातकालीन विभाग में अलग से नहीं है कोई व्यवस्था
अस्पताल के आपातकालीन विभाग में टीबी के मरीजों के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। टीबी से संक्रमित मरीजों को अस्पताल के आपातकालीन विभाग में सामान्य मरीजों के साथ भर्ती कर लिया जाता है, जिससे मरीजों में संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा अस्पताल में टीबी के गंभीर मरीजों के लिए सुविधाएं नहीं है। सुविधाएं न होने के कारण मरीजों को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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मरीजों के लिए वार्ड में पर्याप्त जगह नहीं
अस्पताल में टीबी संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए कंटेनर वार्ड में पुरुष और महिलाओं के लिए अलग से 12 बेड का वार्ड बनाया गया है। जिसकी संख्या काफी कम है। इसके साथ ही वार्ड में वेंटिलेशन की सुविधा भी नहीं है, जिस कारण मरीजों को काफी दिक्कत होती है।
बातचीत
टीबी के संक्रमण को रोकने के लिए अस्पताल में टीबी के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी चलाई जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बातचीत हुई है। जिसके बाद उन्होंने पत्र जारी करके इस पर संज्ञान लिया है। - सतीश चोपड़ा, समाजसेवी
वर्जन
टीबी के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी शुरू की जाए। इसके लिए बीके अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजा गया है। आदेश आने के बाद टीबी के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी शुरू की जाएगी। -
डॉ. हरजिंदर सिंह, जिला टीबी अधिकारी