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सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता का सशक्त उदाहरण है सूरजकुंड मेला : उपराष्ट्रपति

Sun, 01 Feb 2026 12:47 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:47 AM IST
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Surajkund Mela is a powerful example of cultural heritage as well as commercial success: Vice President
फरीदाबाद में अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प सूरजकुंड मेला का उद्घाटन करते उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्ण
उपराष्ट्रपति ने कहा, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से सशक्त हो रहा कारीगर समुदाय
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सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीनता और आधुनिकता का संगम : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
मुख्यमंत्री ने कहा, लोकल को ग्लोबल बनाकर आत्मनिर्भर भारत को दें नई पहचान


अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। बड़े पैमाने पर उत्पादन के इस युग में सूरजकुंड मेला हमें हाथ से बनी वस्तुओं, मानवीय स्पर्श और प्रामाणिक शिल्प के अमूल्य महत्व की याद दिलाता है। पिछले वर्ष लगभग 15 लाख लोगों ने मेले का भ्रमण किया, जो यह दर्शाता है कि यह मेला आमजन से गहराई से जुड़ा हुआ है। मेले में कारीगरों के उत्पादों की बिक्री प्रतिदिन बढ़ती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सूरजकुंड मेला न केवल सांस्कृतिक रूप से, बल्कि व्यावसायिक दृष्टि से भी अत्यंत सफल और प्रभावशाली आयोजन है। ये बातें सूरजकुंड मेले का उद्घाटन करने के बाद बतौर मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहीं। उपराष्ट्रपति ने इस दौरान कारीगरों, आयोजकों व दर्शकों से इस विरासत को समझने, अपनाने और आगे बढ़ाने का आह्वान भी किया।

फरीदाबाद के सूरजकुंड में शनिवार को 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ, जो 15 फरवरी तक चलेगा। मेला परिसर की मुख्य चौपाल के मंच से उपराष्ट्रपति ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेले में आने वाले आगंतुकों की सुविधा हेतु मेला साथी एप का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा द्वारा उन्हें पांच जन्य शंख और महाभारत के दृश्य को दर्शाती एक आकर्षक पेंटिंग भेंट की गई।
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उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, मेले में सहयोगी देश मिस्र के एम्बेसडर कमल जायद गलाल, हरियाणा के राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर, हरियाणा के खेल, युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता मंत्री गौरव गौतम, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्णा व पर्यटन विभाग हरियाणा के आयुक्त एवं सचिव डॉ अमित अग्रवाल उपस्थित रहे।
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उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने मेला परिसर में हरियाणा के अपना घर पवेलियन का दौरा किया, जहां हरियाणवी पगड़ी पहनाकर उनका पारंपरिक स्वागत-सत्कार किया गया। उपराष्ट्रपति ने मेले के थीम स्टेट मेघालय के स्टॉलों पर जाकर शिल्पकारों से संवाद किया और उनके हुनर की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने मेले में सहभागी विभिन्न देशों और राज्यों की सांस्कृतिक विधाओं का अवलोकन कर कलाकारों एवं शिल्पकारों का उत्साहवर्धन किया।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ के शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है सूरजकुंड शिल्प मेला : उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक रहा है। यह उत्सव ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उस शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है। यह मेला निर्माण करने वाले हाथों, नवाचार से भरे मस्तिष्कों और हमारी पहचान गढ़ने वाली परंपराओं को एक साझा मंच पर एकत्र करता है। पिछले लगभग चार दशकों से यह आयोजन हमारे कारीगरों, बुनकरों, मूर्तिकारों, चित्रकारों और लोक कलाकारों को वैश्विक पहचान दिला रहा है, जिनमें से अनेक पीढ़ियों से चली आ रही कलाओं को जीवित रखे हुए हैं। इस वर्ष आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित दृष्टिकोण ने मेले के महत्व को और भी गहन बना दिया है, क्योंकि हमारे कारीगर सदियों पुराने ज्ञान के संरक्षक हैं और उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव है।

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से सशक्त हो रहा कारीगर समुदाय
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प क्षेत्र को राष्ट्रीय पुनर्जागरण के केंद्र में रखा गया है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना जैसे परिवर्तनकारी प्रयासों ने कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल विकास, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव प्रदान कर पूरे इकोसिस्टम को सशक्त बनाया है। उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष के सहभागी राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय का उल्लेख करते हुए कहा कि ये ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करते हैं, जहां विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। साथ ही, भागीदार देश मिस्र का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि मिस्र की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक गहराई और कलात्मक परंपराएं भारत की ऐतिहासिक यात्रा से गहरे स्तर पर मेल खाती हैं। ऐसी साझेदारियां देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूत बनाती हैं।

सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीनता और आधुनिकता का संगम : नायब सिंह सैनी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीन विरासत और आधुनिक सोच का सजीव संगम है। पिछले 38 वर्षों से यह मेला भारतीय लोक कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं को न केवल संरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी और वैश्विक मंच से भी जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को साकार करती है, जिसके तहत देश के हर कोने में बसे हुनरमंद कारीगर के हाथों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति पर गर्व, अपनी विरासत का संरक्षण और उसे विश्व के समक्ष आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने का संकल्प है। सूरजकुंड शिल्प मेला इसी आत्मनिर्भरता का जीवंत और प्रेरक प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा, सहयोग और समागम से समृद्ध होती हैं सभ्यताएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभ्यताएं समागम और सहयोग से ही समृद्ध होती हैं। इसलिए, इस दिशा में दुनिया के दूसरे सभी देशों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। इस बार सूरजकुंड शिल्प मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक समृद्ध हो रहा है, जिसमें सहयोगी देश के रूप में हमारे मित्र राष्ट्र मिस्र की विशेष भागीदारी रहेगी। उन्होंने कहा कि मिस्र विश्व की प्राचीनतम और गौरवशाली सभ्यताओं में से एक है, जोकि आधुनिकता के साथ साथ अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ अफ्रीका और मध्य पूर्व के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक सेतु की भूमिका निभा रहा है। इसके साथ ही भागीदार राज्यों के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय की सहभागिता मेले की विविधता को और विस्तार देगी। उत्तर प्रदेश की गंगा-जमुनी तहजीब, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं तथा मेघालय की अनोखी मातृसत्तात्मक संस्कृति और जनजातीय विरासत इस मेले को रंगों, परंपराओं और संस्कृतियों का जीवंत उत्सव बनाएंगी। यह सांस्कृतिक सहभागिता ही वह सेतु है, जो राज्यों और देशों के बीच दूरियों को मिटाकर आपसी सौहार्द और एकता को सुदृढ़ करती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति बढ़ रहा विश्वास : अरविंद शर्मा

उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है, जिसका प्रमाण मेले में बढ़ती वैश्विक भागीदारी है। पिछली बार आयोजित 38वें सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में जहां लगभग 44 देशों ने मेले में भाग लिया था, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिनिधि और प्रतिभागी सूरजकुंड शिल्प मेले में शामिल हो रहे हैं, जो इस आयोजन के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
डॉ शर्मा ने उपराष्ट्रपति को अवगत कराया कि हरियाणा की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व रखती हैं। उन्होंने विशेष रूप से राखीगढ़ी का उल्लेख करते हुए बताया कि यह लगभग 7000 वर्ष पुरानी विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक सभ्यता में जिन व्यवस्थाओं को हम विकास का प्रतीक मानते हैं, उनकी जड़ें राखीगढ़ी जैसी उन्नत सभ्यताओं में मिलती हैं। जल निकासी व्यवस्था, स्वच्छता की सुदृढ़ प्रणाली, पहिए (व्हील) की अवधारणा तथा सामुदायिक संरचनाओं की योजना जैसे अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांत इसी सभ्यता से विकसित हुए।



यह रहे मौजूद
कार्यक्रम में बल्लभगढ़ से विधायक एवं पूर्व मंत्री मूलचंद शर्मा, बड़खल से विधायक धनेश अदलखा, फरीदाबाद एनआईटी से विधायक सतीश फागना, सोहना से विधायक तेजपाल तंवर, राई से विधायक कृष्णा गहलावत, नलवा से विधायक रणधीर पनिहार, फरीदाबाद की मेयर प्रवीण जोशी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बाड़ौली, फरीदाबाद मंडलायुक्त संजय जून, मेला के मुख्य प्रशासक पार्थ गुप्ता, डीसी आयुष सिन्हा, नगर निगम के आयुक्त धीरेंद्र खडगटा, सीपी सतेंद्र कुमार गुप्ता समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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