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Faridabad News: पराली जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण, ग्रेप के नियम जमीन पर बेअसर
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लोगों का कहना, सरकार अगर मशीनें मुफ्त या सस्ती दर पर उपलब्ध कराए तो नहीं जलेगी पराली
संवाद न्यूज एजेंसी
तिगांव। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए लागू की गई ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) का गांवों में कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है। खेतों में पराली जलाने का सिलसिला लगातार जारी है, जिसके चलते हवा की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की जा रही है। सुबह और शाम के समय गांवों में धुआं छा जाता है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है।
जानकारी अनुसार, पराली को खेत से हटाने में अधिक खर्च आता है, वहीं कुछ किसानों को पराली प्रबंधन मशीनों और उनके उपयोग की जानकारी भी ठीक तरीके से नहीं है। कई जगहों पर सरकारी मशीनें समय पर उपलब्ध नहीं हो पातीं, जिसके कारण किसान मजबूरी में पराली को जलाने को मजबूर हो जाते हैं।
इन गांवों में जलाई जा रही पराली
लोगों का कहना है कि मंझावली, चीरसी, घरौंडा, रायपुर, अल्लीपुर और चांदपुर गांवों में लगातार पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, प्रशासन का दावा है कि जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद खेतों में आग लगने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
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गांव में सुबह से ही हवा में धुआं फैल जाता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। प्रशासन को सिर्फ चालान या जुर्माना लगाने की जगह गांवों में जागरूकता अभियान चलाना चाहिए और किसानों को विकल्प भी उपलब्ध करवाने चाहिए। -जयस कुमार,स्थानीय निवासी
किसान पराली जलाने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन पराली हटाने की लागत बहुत अधिक है। सरकार अगर सच में पराली जलाना बंद करवाना चाहती है तो मशीनें मुफ्त या सस्ती दरों पर उपलब्ध कराए और समय पर सेवा दे, तभी कुछ बदलाव हो पाएगा। -भारत लुहेरा, स्थानीय निवासी
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संवाद न्यूज एजेंसी
तिगांव। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए लागू की गई ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) का गांवों में कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है। खेतों में पराली जलाने का सिलसिला लगातार जारी है, जिसके चलते हवा की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की जा रही है। सुबह और शाम के समय गांवों में धुआं छा जाता है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है।
जानकारी अनुसार, पराली को खेत से हटाने में अधिक खर्च आता है, वहीं कुछ किसानों को पराली प्रबंधन मशीनों और उनके उपयोग की जानकारी भी ठीक तरीके से नहीं है। कई जगहों पर सरकारी मशीनें समय पर उपलब्ध नहीं हो पातीं, जिसके कारण किसान मजबूरी में पराली को जलाने को मजबूर हो जाते हैं।
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इन गांवों में जलाई जा रही पराली
लोगों का कहना है कि मंझावली, चीरसी, घरौंडा, रायपुर, अल्लीपुर और चांदपुर गांवों में लगातार पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, प्रशासन का दावा है कि जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद खेतों में आग लगने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
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गांव में सुबह से ही हवा में धुआं फैल जाता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। प्रशासन को सिर्फ चालान या जुर्माना लगाने की जगह गांवों में जागरूकता अभियान चलाना चाहिए और किसानों को विकल्प भी उपलब्ध करवाने चाहिए। -जयस कुमार,स्थानीय निवासी
किसान पराली जलाने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन पराली हटाने की लागत बहुत अधिक है। सरकार अगर सच में पराली जलाना बंद करवाना चाहती है तो मशीनें मुफ्त या सस्ती दरों पर उपलब्ध कराए और समय पर सेवा दे, तभी कुछ बदलाव हो पाएगा। -भारत लुहेरा, स्थानीय निवासी