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Faridabad News: बहन ने लीवर देकर भाई को दिया नया जीवनदान
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फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-16 स्थित निजी अस्पताल में रक्षाबंधन से पहले एक बहन ने अपने लीवर का हिस्सा दान कर भाई की जान बचाई है। लीवर ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. पुनीत सिंगला ने बताया कि जब पंजाब निवासी बूटा सिंह (40) को हमारे पास लाया गया तो उस समय वह बेहद गंभीर हालत में था। वह लीवर की एंड स्टेज बीमारी से ग्रस्त था। जांच करने पर पता चला कि मरीज को गंभीर पीलिया और पेट में पानी भरा हुआ था। उसके शरीर की मांसपेशियां भी कमजोर थीं। वह पिछले 2-3 साल से इस बीमारी से जूझ रहा था। ठीक से इलाज न होने के कारण मरीज की जान को खतरा बढ़ रहा था। ऐसी स्थिति में तुरंत लीवर ट्रांसप्लांट एकमात्र ऑप्शन होता है। जिंदगी और मौत से लड़ता देख मरीज की पत्नी लीवर देने आगे आई, लेकिन वह लीवर डोनेट करने के लिए फिट नहीं थी। हालात बिगड़ते देख मरीज की बड़ी बहन 45 वर्षीय शरणजीत कौर आगे आईं। मेडिकल फिट होने पर बहन ने स्वेच्छा से भाई को लीवर का एक हिस्सा दिया। स्वस्थ होने पर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। लीवर ट्रांसप्लांट करने में लगभग 10 घंटे का समय लगा। ट्रांसप्लांट होने के बाद मरीज ने तेजी से रिकवरी की। मरीज बूटा सिंह ने उसे जीवन का सर्वोत्तम उपहार देने के लिए बहन का आभार व्यक्त किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-16 स्थित निजी अस्पताल में रक्षाबंधन से पहले एक बहन ने अपने लीवर का हिस्सा दान कर भाई की जान बचाई है। लीवर ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. पुनीत सिंगला ने बताया कि जब पंजाब निवासी बूटा सिंह (40) को हमारे पास लाया गया तो उस समय वह बेहद गंभीर हालत में था। वह लीवर की एंड स्टेज बीमारी से ग्रस्त था। जांच करने पर पता चला कि मरीज को गंभीर पीलिया और पेट में पानी भरा हुआ था। उसके शरीर की मांसपेशियां भी कमजोर थीं। वह पिछले 2-3 साल से इस बीमारी से जूझ रहा था। ठीक से इलाज न होने के कारण मरीज की जान को खतरा बढ़ रहा था। ऐसी स्थिति में तुरंत लीवर ट्रांसप्लांट एकमात्र ऑप्शन होता है। जिंदगी और मौत से लड़ता देख मरीज की पत्नी लीवर देने आगे आई, लेकिन वह लीवर डोनेट करने के लिए फिट नहीं थी। हालात बिगड़ते देख मरीज की बड़ी बहन 45 वर्षीय शरणजीत कौर आगे आईं। मेडिकल फिट होने पर बहन ने स्वेच्छा से भाई को लीवर का एक हिस्सा दिया। स्वस्थ होने पर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। लीवर ट्रांसप्लांट करने में लगभग 10 घंटे का समय लगा। ट्रांसप्लांट होने के बाद मरीज ने तेजी से रिकवरी की। मरीज बूटा सिंह ने उसे जीवन का सर्वोत्तम उपहार देने के लिए बहन का आभार व्यक्त किया।