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Faridabad News: अब स्कूल दिखाएंगे नशे के खिलाफ सही राह
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नशे के दुष्प्रभावों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी, जिले के 853 स्कूलों में पहले से चल रहा जागरूकता अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। किसी बच्चे का भविष्य गलत संगत या नशे की आदत के कारण खराब न हो, इसके लिए अब स्कूल स्तर पर ही उसे जागरूक करने की तैयारी है। सरकार नशे के दुष्प्रभावों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की योजना पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य बच्चों को नशे से जुड़े खतरों को समझाकर सही फैसला लेने के लिए तैयार करना है।
जानकारी के अनुसार, जिले में हरियाणा बोर्ड से संबद्ध 379 सरकारी और 474 निजी स्कूल हैं। इन स्कूलों में पहले से ड्रग फ्री हरियाणा और नशे से जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। विद्यार्थियों को भाषण, जागरूकता कार्यक्रम और अन्य गतिविधियों के जरिए नशे के नुकसान बताए जाते हैं। अब इसी जागरूकता को नियमित पढ़ाई से जोड़ने की तैयारी है। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार बताया जा सकता है कि नशे की शुरुआत किस तरह पढ़ाई, स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इससे बच्चों को गलत संगत और साथियों के दबाव से बचने में भी मदद मिल सकती है।
स्कूलों में विद्यार्थियों की परेशानियों को समझने के लिए खंड स्तर पर काउंसलर भी मौजूद हैं। विद्यार्थी पढ़ाई, व्यवहार या किसी अन्य परेशानी को लेकर उनसे सलाह ले सकते हैं। नशे से जुड़ी समस्या सामने आने पर काउंसलर बच्चे और अभिभावक को उचित मार्गदर्शन दे सकते हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि बच्चों को नशे से बचाने की शुरुआत केवल रोकने से नहीं, बल्कि समय रहते समझाने और उनकी बात सुनने से होनी चाहिए। स्कूल में शिक्षक और काउंसलर इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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कोट्स
नशे के नुकसान को पाठ्यक्रम से जोड़ने पर बच्चों को कम उम्र में सही जानकारी मिलेगी और वे गलत संगत से बचने के प्रति जागरूक होंगे। -रामकरन, अध्यापक
स्कूल में बच्चों से खुलकर बातचीत जरूरी है। पाठ्यक्रम में नशे से जुड़ी जानकारी होने से शिक्षक उन्हें समय रहते सही मार्गदर्शन दे सकेंगे। -मोहित, अध्यापक
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। किसी बच्चे का भविष्य गलत संगत या नशे की आदत के कारण खराब न हो, इसके लिए अब स्कूल स्तर पर ही उसे जागरूक करने की तैयारी है। सरकार नशे के दुष्प्रभावों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की योजना पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य बच्चों को नशे से जुड़े खतरों को समझाकर सही फैसला लेने के लिए तैयार करना है।
जानकारी के अनुसार, जिले में हरियाणा बोर्ड से संबद्ध 379 सरकारी और 474 निजी स्कूल हैं। इन स्कूलों में पहले से ड्रग फ्री हरियाणा और नशे से जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। विद्यार्थियों को भाषण, जागरूकता कार्यक्रम और अन्य गतिविधियों के जरिए नशे के नुकसान बताए जाते हैं। अब इसी जागरूकता को नियमित पढ़ाई से जोड़ने की तैयारी है। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार बताया जा सकता है कि नशे की शुरुआत किस तरह पढ़ाई, स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इससे बच्चों को गलत संगत और साथियों के दबाव से बचने में भी मदद मिल सकती है।
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स्कूलों में विद्यार्थियों की परेशानियों को समझने के लिए खंड स्तर पर काउंसलर भी मौजूद हैं। विद्यार्थी पढ़ाई, व्यवहार या किसी अन्य परेशानी को लेकर उनसे सलाह ले सकते हैं। नशे से जुड़ी समस्या सामने आने पर काउंसलर बच्चे और अभिभावक को उचित मार्गदर्शन दे सकते हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि बच्चों को नशे से बचाने की शुरुआत केवल रोकने से नहीं, बल्कि समय रहते समझाने और उनकी बात सुनने से होनी चाहिए। स्कूल में शिक्षक और काउंसलर इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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नशे के नुकसान को पाठ्यक्रम से जोड़ने पर बच्चों को कम उम्र में सही जानकारी मिलेगी और वे गलत संगत से बचने के प्रति जागरूक होंगे। -रामकरन, अध्यापक
स्कूल में बच्चों से खुलकर बातचीत जरूरी है। पाठ्यक्रम में नशे से जुड़ी जानकारी होने से शिक्षक उन्हें समय रहते सही मार्गदर्शन दे सकेंगे। -मोहित, अध्यापक