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ड्रोन सर्वे के आधार पर भी पुनर्वास करना आसान नहीं

Mon, 27 Sep 2021 10:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 27 Sep 2021 10:39 PM IST
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Rehabilitation is not easy even on the basis of drone survey
फरीदाबाद। खोरी गांव तोड़फोड़ मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई । इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम और हरियाणा सरकार से पूछा किया तोड़फोड़ से पहले क्या नगर निगम ने खोरी में कोई सर्वे कराया है। इस पर ड्रोन सर्वे की बात कही। कोर्ट ने ड्रोन सर्वे के आधार पर खोरी वासियों को मकान देने के आदेश दिए। लेकिन खोरी वासियों को पुनर्वासित करना निगम के लिए आसान कार्य नहीं है। क्योंकि निगम द्वारा तोड़फोड़ से पहले कराए गए सर्वे में न तो लोगों के आधार नंबर लिए गए थे और अनेक लोगों ने सर्वे में शामिल होने से इनकार भी कर दिया था। इससे पुनर्वास योजना को ठीक से लागू करने में परेशानी आने की संभावना जताई जा रही है।
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अरावली में वन विभाग की करीब पांच सौ हेक्टेयर जमीन पर अवैध निर्माण है। इनमें लगभग 140 फार्म हाउस, शिक्षण संस्थान, होटल व कॉलोनियां बसी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम और वन विभाग की ओर से दो माह से तोड़फोड़ की जा रही है, लेकिन यह कार्रवाई नामात्र तक सीमित हैं। निगम की ओर से अब तक 13 फार्म हाउस को तोड़ा जा चुका है। इनमें चार फार्म हाउसों में तोड़फोड़ कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बुधवार को की गई थी। उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में हरियाणा सरकार को कहा था कि अरावली में बने अवैध निर्माणों तोड़े जाने के संबंध में क्या बार-बार कहना पड़ेगा।
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निगम ने पुनर्वास के लिए तीन दस्तावेज मांगे
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में मामले में खोरी गांव रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के वकील ने बताया कि निगम ने पुनर्वास के लिए तीन दस्तावेज मांगे हैं। जिसमें बिजली बिल, परिवार पहचान पत्र और वोटर आईडी कार्ड, जबकि परिवार पहचान पत्र बनाने की योजना सरकार ने साल 2019 में शुरू की। इसलिए कई परिवार यह नहीं बना पाए। मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव के सदस्य निर्मल गोराना ने बताया कि समिति ने खोरी से मजदूर परिवारों की बेदखली से पहले कई बार निगम और हरियाणा सरकार से खोरी गांव का संयुक्त सर्वे करवाने की मांग की थी, लेकिन निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। सोमवार को कोर्ट ने सर्वे के रास्ते पर नगर निगम को खड़ा कर दिया है। इसलिए सर्वे के आधार पर मकान देना आसान नहीं है।
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खोरी मामले को लेकर चार अक्तूबर को सुनवाई है। नगर निगम पूरी निष्पक्षता से मामले पर कार्रवाई कर रहा है।
- यशपाल यादव, आयुक्त नगर निगम
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