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Faridabad News: खादी, जूट, रेशम, और प्राकृतिक बीजों से तैयार राखियां बनी पहली पसंद

Thu, 27 Aug 2026 12:33 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 12:33 AM IST
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Rakhis made from khadi, jute, silk, and natural seeds have become the top choice.
फरीदाबाद में रक्षा बंधन को लेकर एनआईटी पांच मार्केट में राखी की खरीदारी करती महिलाएं। फोटो जाेग
चीनी राखियों के बहिष्कार से पारंपरिक स्वदेशी राखियों की मांग में उछाल
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। फरीदाबाद के राखी बाजार में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। चीनी राखियों के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने की मुहिम ने जिले के स्थानीय कारीगरों, महिला समूहों और छोटे व्यापारियों के लिए ग्लोबल स्तर के अवसर खोल दिए हैं। बाजार में मेड इन इंडिया और पारंपरिक हैंडमेड राखियों की मांग में उछाल आया है।

पारंपरिक कला और संस्कृति को पुनर्जीवित करते हुए इस बार खादी, जूट, रेशम, और प्राकृतिक बीजों से तैयार इको-फ्रेंडली राखियां ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। महिलाएं और युवा वर्ग विशेष रूप से इन स्वदेशी और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर हो रहे इस उत्पादन से न केवल पारंपरिक शिल्पकारों की आमदनी बढ़ी है, बल्कि भारत का हस्तशिल्प बाजार अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर भी कदम बढ़ा रहा है।
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दुकानदारों के अनुसार, इस त्योहारी सीजन में फरीदाबाद के प्रमुख बाजारों एनआईटी नंबर-1, ओल्ड फरीदाबाद, और सेक्टर-15 मार्केट में स्वदेशी राखियों का कारोबार पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक दर्ज किया गया है। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों में देशभक्ति की भावना के साथ-साथ गुणवत्ता को लेकर जागरूकता आई है, जिससे चीनी सामान की मांग लगभग कम हुई है।
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बाहर भी जा रही हैं राखियां

दुकानदारों का कहना है कि अब सिर्फ राखियों की बिक्री फरीदाबाद तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन शॉपिंग के इस दौर में कई ग्राहक अन्य राज्य और जिलों से भी राखियों के ऑर्डर दे रहे हैं। साथ ही कई ग्राहक राखियां खरीदकर अन्य जिले और राज्यों में रहने वाले भाई-बहनों को भी भेज रहे हैं।


सगी बहनों से ऊपर मानते हैं चाचा, ताऊ के बच्चे
बल्लभगढ़ निवासी हिमानी और मिनी सिंगला ने बताया कि उनका कोई सगा भाई नहीं है। बचपन से वह अपने ताऊ और चाचा के बच्चों को राखी बांध रही हैं। उनका कहना है कि वैसे तो भाई होना जरूरी है, लेकिन उनको कभी भाई की कमी महसूस नहीं हुई। क्योंकि शादी के बाद उनको चाचा और ताऊ के बच्चे अपनी सगी बहनों से ऊपर मानते हैं। वह हर साल मायके जाकर सभी को राखी बांधकर त्योहार मनाती हैं।
माता-पिता को राखी बांधकर मनाते हैं त्योहार
सेक्टर-64 निवासी सोनिया ने बताया कि वह सात बहने हैं, उनके कोई भाई नहीं है। सभी बहनों की शादी हो चुकी है। उनका कहना है सातों बहनों को भाई की कमी तो होती है लेकिन सभी बहने एक-दूसरे के साथ हमेशा खड़ी रहती हैं। यहां तक की उनके माता पिता भी उनके साथ होते हैं। वह एक-दूसरे और माता-पिता को राखी बांधकर रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं।

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बातचीत

चीनी राखियों के बहिष्कार से हमारे स्थानीय कारीगरों को अपनी कला दिखाने का बेहतरीन मौका मिला है। इस बार मेड इन इंडिया राखियों की मांग दिखाई दे रही है।- सचिन, दुकानदार

खादी और जूट से बनी इको-फ्रेंडली राखियों की भारी मांग है। लोग पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक और सुंदर हैंडमेड उत्पादों को अधिक खरीद रहे हैं।-सुनीता

इस बार का त्योहारी सीजन पूरी तरह स्वदेशी के नाम रहा है। ग्राहकों का रुझान देखकर साफ है कि बाजार में अब स्वदेशी और पारंपरिक उत्पादों का ही बोलबाला है।-अनिल


सरकार के वोकल फॉर लोकल अभियान ने हमारी स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है। पारंपरिक रेशम और जरी की राखियों की मांग ज्यादा है।-संतोष

फरीदाबाद में रक्षा बंधन को लेकर एनआईटी पांच मार्केट में राखी की खरीदारी करती महिलाएं। फोटो जाेग

फरीदाबाद में रक्षा बंधन को लेकर एनआईटी पांच मार्केट में राखी की खरीदारी करती महिलाएं। फोटो जाेग

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