मंदिर में पुजारी का कत्ल: दो आशिफ ने सिल-बट्टे से कुचल दिया बाबा का सिर, हत्या के बाद दोनों ने किया एक और पाप
घटना स्थल बेहद सुनसान इलाके में था और वहां लोगों की आवाजाही न के बराबर थी, इसलिए शुरुआती दौर में पुलिस को कोई ठोस सुराग या साक्ष्य नहीं मिल पा रहा था। यह पूरी तरह से एक ब्लाइंड मर्डर केस था। वारदात को अंजाम देने के बाद चारों आरोपी बिल्कुल बेफिक्र होकर शहर में सामान्य जिंदगी जी रहे थे और ऑटो चला रहे थे।
विस्तार
चार सप्ताह पहले नशा करने से मना करने पर पुजारी की हत्या के मामले में अपराध शाखा डीएलएफ ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान आशिफ उर्फ टीटी (20) निवासी गांव हुसैनी, जिला मथुरा, यूपी व आशिफ उर्फ कालिया (34) निवासी गांव बामनी, जिला भरतपुर, राजस्थान के रूप में हुई है। दोनों आरोपी वर्तमान में फरीदाबाद की किसान मजदूर कॉलोनी, बाईपास रोड में रहते हैं और पेशे से ऑटो चालक हैं। आरोपी आशिफ उर्फ टीटी पर पूर्व में भी आर्म्स एक्ट और चोरी की तीन प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुजारी को मिली नशा करने से रोकने की सजा
सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) अमन यादव ने बताया कि सेक्टर-30 बाईपास रोड पर नहर के पास बने मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश (65) की सिर में चोट मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों गिरफ्तार आरोपी और उनके दो अन्य साथी नशा करने के आदी हैं। 30/31 अगस्त की रात चारों आरोपी सेक्टर-30 बाईपास कट के पास नहर किनारे बैठकर नशा कर रहे थे। इसी दौरान पुजारी ओमप्रकाश वहां पहुंचे और उन्हें धार्मिक स्थल के पास नशा करने से मना करते हुए वहां से जाने को कहा था। इस बात से नाराज होकर चारों आरोपी पुजारी के पीछे मंदिर परिसर तक पहुंचे और उनसे मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान आरोपियों ने मंदिर में रखा पत्थर का भारी सिल-बट्टा उठाकर पुजारी के सिर पर दे मारा, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद पीतल की परात और इंडक्शन चूल्हा चुराया
आरोपियों की दरिंदगी यहीं खत्म नहीं हुई। पुजारी की हत्या करने के बाद वे मंदिर का सामान खंगालने लगे। आरोपी मंदिर से पीतल की परात और एक इंडक्शन चूल्हा चुराकर मौके से रफूचक्कर हो गए। वारदात के बाद मृतक पुजारी के चचेरे भाई अशोक कुमार निवासी अहीरवाड़ा, ओल्ड फरीदाबाद की शिकायत पर थाना सेक्टर-31 में हत्या की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गयी और जांच क्राइम ब्रांच डीएलएफ को सौंपी गई थी।
सुराग न मिलने से बेफिक्र घूम रहे थे आरोपी
चूंकि घटना स्थल बेहद सुनसान इलाके में था और वहां लोगों की आवाजाही न के बराबर थी, इसलिए शुरुआती दौर में पुलिस को कोई ठोस सुराग या साक्ष्य नहीं मिल पा रहा था। यह पूरी तरह से एक ब्लाइंड मर्डर केस था। वारदात को अंजाम देने के बाद चारों आरोपी बिल्कुल बेफिक्र होकर शहर में सामान्य जिंदगी जी रहे थे और ऑटो चला रहे थे। उन्हें लगा कि घटना सुनसान इलाका होने के कारण पुलिस कभी उन तक नहीं पहुंच पाएगी। हालांकि, क्राइम ब्रांच की टीम ने इलाके के संदिग्ध लोगों की सूची तैयार कर पूछताछ शुरू की, करीब चार सप्ताह की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को एक अहम सुराग मिला। स्थानीय पूछताछ में पुलिस को पता चला कि वारदात वाली रात चारों आरोपी मौके पर मौजूद थे और उन्होंने अपने एक परिचित के सामने इस वारदात का जिक्र भी किया था।
दो अन्य वांछित साथियों की तलाश जारी
इस हत्याकांड में कुल चार आरोपी शामिल थे, जिनमें से तीन ऑटो चालक हैं। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि चोरी किया गया सामान (पीतल की परात व इंडक्शन चूल्हा) और हत्या में इस्तेमाल सिल-बट्टा बरामद किया जा सके। वहीं घटना में शामिल दो अन्य वांछित आरोपियों की भी पहचान कर ली गई है, जिन्हें लगाकर जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। सभी आरोपी फरीदाबाद में रहते हैं।
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