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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 34वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का किया उद्घाटन

Sat, 01 Feb 2020 11:36 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2020 11:36 PM IST
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president ramnath covind inaugurates surajkund fair
फरीदाबाद। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला भारत के लोगों के कला-कौशल, प्रतिभा और उद्यमशीलता के प्रदर्शन का एक स्थापित मंच बन गया है। यह मेला विलुप्त हो रही हस्तशिल्प और हथकरघा की विशेष कला-विधाओं को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और कारीगरों को उनके काम को प्रदर्शित करने का उचित मंच प्रदान कर रहा है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को 34वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव आर्य, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व उज्बेकिस्तान के राजदूत फरहोद अरजीव उपस्थित थे।
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भारत की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत त्योहारों और मेलों का देश है। इस मेले में शिल्पकारों और हथकरघा कारीगरों के अलावा विविध अंचलों के पहनावे, लोक-कलाओं, व्यंजनों, संगीत और लोक-नृत्यों का भी संगम होता है। उन्होंने कहा कि इस मेले में भारत के गांवों की खुशबू और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक के विविध रंग, यहां आने वालों को हमेशा आकर्षित करते रहेंगे।
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राष्ट्रपति कोविंद ने पार्टनर कंट्री उज्बेकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि बेशक हमारी भौगोलिक सीमा नहीं मिलती, लेकिन हमारे बीच दिलों के रिश्ते हमेशा से रहे हैं और भविष्य में यह और अधिक सुदृढ़ होंगे। उन्होंने कहा कि यह मेला भारत व उज्बेकिस्तान के लोगों के बीच संस्कृति, कला एवं कृषि के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी प्रस्तुत करेगा। थीम राज्य हिमाचल प्रदेश व हरियाणा के सूरजकुंड मेले को पर्यटकों को आकर्षित करने का मंच बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इन त्योहारों और मेलों ने देश और विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया है। भारत के सभी त्योहार और मेले हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पारंपरिक उल्लास के प्रतीक है।
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उज्ज्वल कल के लिए लोकल को अपनाएं
राष्ट्रपति ने कहा कि शुक्रवार को संसद के बजट सत्र के शुभारंभ पर दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि ‘उज्ज्वल कल के लिए लोकल’ का मूल मंत्र हमें अपनाना चाहिए। उन्होंने मेले के मंच पर इसे दोबारा दोहराते हुए कहा कि पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक, देश के प्रत्येक जनप्रतिनिधियों और सभी राज्य सरकारों द्वारा ‘उज्ज्वल कल के लिए लोकल’ को अपनाने के एक आंदोलन में परिवर्तित किया जाए। स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर हम सभी अपने क्षेत्र के शिल्पकारों तथा लघु उद्यमियों की बहुत बड़ी मदद दे सकते हैं।
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