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Faridabad News: 15 साल पुरानी जीपीए वाली संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी बनाने की तैयारी

Sat, 12 Sep 2026 12:20 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 12:20 AM IST
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Preparations underway to generate property IDs for properties held under 15-year-old GPAs.
निगम प्रशासन ने स्थानीय शहरी निकाय विभाग को भेजा प्रस्ताव, अभी रजिस्ट्री के बिना नहीं बनती प्रॉपर्टी आईडी, अवैध कॉलोनियों और फ्लैटों के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित
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केशव भारद्वाज
फरीदाबाद। शहर में रजिस्ट्री नहीं होने के कारण जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) के आधार पर खरीदी गई संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी बनाने का रास्ता साफ हो सकता है। नगर निगम प्रशासन ने करीब 15 वर्ष पुरानी जीपीए के आधार पर संपत्तियों की अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी बनाने की अनुमति देने का प्रस्ताव स्थानीय शहरी निकाय विभाग को भेजा है।
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निगम का तर्क है कि बिजली निगम जिस तरह संपत्ति के दस्तावेजों के आधार पर अस्थायी तौर पर बिजली कनेक्शन जारी करता है, उसी तर्ज पर नगर निगम को भी ऐसी संपत्तियों की अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी बनाने की अनुमति दी जाए। वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री होना जरूरी है। ऐसे में शहर की करीब 300 अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत रूप से विकसित फ्लैटों में रहने वाले लोगों की संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी नहीं बन पा रही है। इन क्षेत्रों में रजिस्ट्री पर रोक होने के कारण लोग वर्षों से जीपीए के आधार पर संपत्तियों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। इससे एक बड़ी संख्या में संपत्तियां उसके रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पा रही हैं।
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निगम के सामने दोहरी परेशानी
प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनने का असर केवल संपत्ति मालिकों पर ही नहीं, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी पड़ रहा है। प्रॉपर्टी आईडी के अभाव में निगम के पास अपने क्षेत्र की सभी संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर संपत्ति कर की वसूली पर भी पड़ता है। निगम का मानना है कि यदि जीपीए वाली पुरानी संपत्तियों को अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी के दायरे में लाया जाता है तो इनका रिकॉर्ड तैयार करने के साथ ही टैक्स वसूली का रास्ता भी खुल सकेगा।
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15 साल पुरानी जीपीए पर जोर
निगम प्रशासन ने प्रस्ताव में 15 वर्ष पुरानी जीपीए वाली संपत्तियों को आधार बनाने की पहल की है। इसका उद्देश्य उन संपत्तियों को रिकॉर्ड में शामिल करना है, जिनमें लोग लंबे समय से रह रहे हैं और जिनकी खरीद-फरोख्त रजिस्ट्री के बजाय जीपीए के माध्यम से हुई है। हालांकि, अंतिम निर्णय स्थानीय शहरी निकाय विभाग की मंजूरी के बाद ही होगा। विभाग से अनुमति मिलने पर निगम ऐसी संपत्तियों के लिए नियम और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया तय कर सकता है।

जीपीए के लिए दिल्ली-शिमला तक जा रहे लोग
शहर में रजिस्ट्री बंद होने के कारण संपत्ति खरीदने वाले लोग जीपीए और एसपीए (स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी) करवाने के लिए दिल्ली और शिमला तक जा रहे हैं। इसके लिए उन्हें करीब एक लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद ऐसी संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी नहीं बन पाने से खरीदारों के सामने संपत्ति को निगम रिकॉर्ड में दर्ज कराने की समस्या बनी हुई है। बता दें कि जीपीए करवाने पर लोगों को संपत्ति पर सभी तरह के अधिकार मिल जाते हैं। जबकि एसपीए करवाने पर कोई एक विशेष अधिकार हासिल होता है।
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निगम की माली हालत सुधारने में मिलेगी मदद
नगर निगम प्रशासन का मानना है कि जीपीए वाली संपत्तियों को अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी मिलने से शहर की संपत्तियों का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। साथ ही संपत्ति कर के दायरे से बाहर रह गई संपत्तियों की पहचान कर उनसे टैक्स वसूला जा सकेगा। इससे निगम की आय बढ़ाने और उसकी वित्तीय स्थिति सुधारने में भी मदद मिल सकती है। अब निगम को स्थानीय शहरी निकाय विभाग की मंजूरी का इंतजार है।

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शहर में अभी तक निगम के पास सभी संपत्तियों का रिकॉर्ड नहीं है। रजिस्ट्री न होने के कारण लोगों की प्रॉपर्टी आईडी नहीं बन पाती है। ऐसे में 15 वर्ष पुरानी जीपीए वाली संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी बनाने के प्रस्ताव को स्थानीय शहरी निकाय विभाग के मुख्यालय को मंजूरी के लिए भेजा गया है। - प्रवीण बत्रा जोशी, मेयर , फरीदाबाद
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