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Faridabad News: एशियन पैरा गेम्स में प्रणव सूरमा ने जीता स्वर्ण पदक
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फरीदाबाद। 16 वर्ष की उम्र में दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण चार वर्ष तक बिस्तर पर पड़े रहे प्रणव अथक प्रयास के बाद एशियन पैरा गेम्स की क्लब थ्रो स्पर्धा में स्वर्ण जीतने में सफल रहे। 20 मई 2011 को दुर्घटना के बाद वह 4 वर्षों तक बिस्तर से उठ नहीं सके थे। परिवार और कोच की मदद से उन्होंने आगे बढ़ने की ठानी और पैरा गेम्स में कदम रखा। 8 वर्षों के अथक प्रयास के बाद आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और करीब दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में स्वर्ण और रजत पदक झटके।
प्रणव को 16 वर्ष की आयु में घर का छज्जा ऊपर गिर जाने के कारण रीढ़ की हड्डी में चोट आ गई थी। इसके बाद वह कभी अपने पैरों पर चल नहीं सके। करीब पांच वर्षों तक दिल्ली-एनसीआर के कई नामचीन अस्पतालों में उपचार हुआ लेकिन कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। इसके बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2016 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नाहर सिंह क्रिकेट स्टेडियम के पिछले हिस्से में बने एथलेटिक्स मैदान पर अभ्यास करना शुरू कर दिया। उनके कोच नरसिंह राम ने बताया कि उसके जुनून को देखते हुए एथलेटिक्स मैदान में व्हील चेयर को रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई। अभ्यास के दौरान उस पर विशेष ध्यान रखा जाता था, ताकि उसे चोट न आए। दादा (केवल कृष्ण सूरमा) बचपन में क्रिकेट खेलते थे। उनकी क्रिकेट में रुचि थी। हालांकि उनके दादा बड़े खिलाड़ी तो नहीं बन पाए लेकिन प्रणव को बचपन में क्रिकेट मुकाबलों और तकनीक के बारे में बताते रहते थे। उनसे प्रेरित होकर स्पोर्ट्स को कॅरियर के रूप में चुना।
व्हील चेयर मिस्टर इंडिया रह चुके हैं प्रणव
घायल होने के बाद उन्होंने वर्ष 2017 में व्हील चेयर मिस्टर इंडिया का भी खिताब जीता है। उसके बाद उनकी जिंदगी में एक नई उम्मीद जगी। उसके बाद उन्होंने कभी पिछले मुड़कर नहीं देखा। मॉडलिंग में भविष्य नहीं होने के कारण वर्ष 2018 में पैरा एथलेटिक्स को कॅरियर के रूप में चुन लिया। 5 वर्ष में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में कई पदक झटक चुके हैं। खेल के साथ उन्होंने पढ़ाई में भी तालमेल बनाए रखा। दिल्ली में एक राष्ट्रीय बैंक में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि पहले खुद पर विश्वास करना चाहिए, तभी लोगों को विश्वास होता है। खेल के साथ पढ़ाई का तालमेल बनाना होता है। प्रणव कोरोना काल में अपने घर के पास स्थित एक पार्क में अभ्यास करते रहे। उसके साथ ही अपने कोच के लगातार संपर्क में रहे। प्रणव का कहना है कि कोरोना काल में अपने प्रदर्शन को लेकर काफी चिंतित थे।
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प्रणव को 16 वर्ष की आयु में घर का छज्जा ऊपर गिर जाने के कारण रीढ़ की हड्डी में चोट आ गई थी। इसके बाद वह कभी अपने पैरों पर चल नहीं सके। करीब पांच वर्षों तक दिल्ली-एनसीआर के कई नामचीन अस्पतालों में उपचार हुआ लेकिन कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। इसके बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2016 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नाहर सिंह क्रिकेट स्टेडियम के पिछले हिस्से में बने एथलेटिक्स मैदान पर अभ्यास करना शुरू कर दिया। उनके कोच नरसिंह राम ने बताया कि उसके जुनून को देखते हुए एथलेटिक्स मैदान में व्हील चेयर को रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई। अभ्यास के दौरान उस पर विशेष ध्यान रखा जाता था, ताकि उसे चोट न आए। दादा (केवल कृष्ण सूरमा) बचपन में क्रिकेट खेलते थे। उनकी क्रिकेट में रुचि थी। हालांकि उनके दादा बड़े खिलाड़ी तो नहीं बन पाए लेकिन प्रणव को बचपन में क्रिकेट मुकाबलों और तकनीक के बारे में बताते रहते थे। उनसे प्रेरित होकर स्पोर्ट्स को कॅरियर के रूप में चुना।
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व्हील चेयर मिस्टर इंडिया रह चुके हैं प्रणव
घायल होने के बाद उन्होंने वर्ष 2017 में व्हील चेयर मिस्टर इंडिया का भी खिताब जीता है। उसके बाद उनकी जिंदगी में एक नई उम्मीद जगी। उसके बाद उन्होंने कभी पिछले मुड़कर नहीं देखा। मॉडलिंग में भविष्य नहीं होने के कारण वर्ष 2018 में पैरा एथलेटिक्स को कॅरियर के रूप में चुन लिया। 5 वर्ष में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में कई पदक झटक चुके हैं। खेल के साथ उन्होंने पढ़ाई में भी तालमेल बनाए रखा। दिल्ली में एक राष्ट्रीय बैंक में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि पहले खुद पर विश्वास करना चाहिए, तभी लोगों को विश्वास होता है। खेल के साथ पढ़ाई का तालमेल बनाना होता है। प्रणव कोरोना काल में अपने घर के पास स्थित एक पार्क में अभ्यास करते रहे। उसके साथ ही अपने कोच के लगातार संपर्क में रहे। प्रणव का कहना है कि कोरोना काल में अपने प्रदर्शन को लेकर काफी चिंतित थे।
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